Home Latest News & Updates ‘वादों से आगे बढ़कर काम करें…’ सिंध सरकार के खिलाफ ट्रांसजेंडर समुदाय का हल्लाबोल, रखी ये मांगें

‘वादों से आगे बढ़कर काम करें…’ सिंध सरकार के खिलाफ ट्रांसजेंडर समुदाय का हल्लाबोल, रखी ये मांगें

by Sachin Kumar 4 October 2026, 3:59 PM IST
4 October 2026, 3:59 PM IST
Sindh Transgender Protest

Sindh Transgender Protest: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ट्रांसजेंडर समुदाय अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहा है. समुदाय ने सिंध सरकार से अपील की है कि वह केवल नीतिगत वादों तक सीमित न रहे, बल्कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करें. ट्रांसजेंडर समुदाय ने ये मांगें ‘आवाज II’ कार्यक्रम के तहत ‘जेंडर इंटरैक्टिव एलायंस’ (GIA) के साथ मिलकर लीगल एड सोसाइटी की ओर से आयोजित सिंध ट्रांसजेंडर समिट में उठाईं.

बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करें

इस समिट में ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी, सिविल सोसाइटी ग्रुप और डेवलपमेंट पार्टनर एक प्लेटफॉर्म पर आए. इस दौरान उन्होंने कानूनी सुरक्षा और बुनियादी ढांचे दुरुस्त करना शामिल हैं. वहीं, ट्रांसजेंडर समुदाय की प्रतिनिधि आराध्या खान ने मुख्य मांगों वाला पांच-सूत्रीय चार्टर पेश किया. इसमें मुख्य रूप से सिंध की ट्रांसजेंडर शिक्षा नीति को पूरी तर लागू करना शामिल था. समुदाय ने बिना किसी भेदभावपूर्ण मेडिकल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता के सरकारी नौकरियों में 0.5 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की भी मांग की.

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ट्रांसजेंडर ने की आर्थिक मदद की मांग

इसके अलावा दूसरी मांगों में सरकारी अस्पतालों में ट्रांसजेंडर मरीजों के लिए अलग वार्ड और बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम (BISP) में रजिस्टर्ड ख्वाजा सिरा लोगों को शामिल किया जाए. साथ ही ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए स्कॉलरशिप, शिक्षण संस्थानों में भेदभाव के खिलाफ मजबूत सुरक्षा, जेंडर-अफर्मिंग और संवेदनशील हेल्थकेयर तक पहुंच की भी मांग की. उन्होंने समुदाय के कमजोर सदस्यों के लिए तुरंत आर्थिक मदद की भी मांग की.

सभी संस्थानों को मिलकर काम करना होगा

उन्होंने हर जिले में ट्रांसजेंडर फोकल पर्सन नियुक्त करने, वोकेशनल ट्रेनिंग और आत्मनिर्भरता के लिए सरकारी फंडिंग देने का प्रस्ताव रखा. वहीं, सिंध के सोशल वेलफेयर सेक्रेटरी मुनव्वर अली मिठाणी ने मौजूदा कानूनी वादों और ट्रांसजेंडर लोगों द्वारा सामना की जा रही असलियतों के बीच के अंतर को माना. उन्होंने आगे कहा कि कानूनी अधिकारों को व्यवहारिक मौकों में बदलने के लिए सरकारी संस्थानों, NGO, सिविल सोसाइटी और ट्रांसजेंडर समुदाय को मिलकर काम करने की जरूरत है.

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