US Attack Iran: अमेरिकी सेना ने एक बार फिर ईरान में बड़े सैन्य हमले किए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, ईरानी ड्रोन को मार गिराने के बाद US फोर्स ने बुधवार को ईरान की एक मिलिट्री फैसिलिटी पर स्ट्राइक की. US सेंट्रल कमांड फोर्स ने चार ईरानी वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराया. US फोर्स ने बंदर अब्बास में एक ईरानी ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर भी हमला किया, जो पांचवां ड्रोन लॉन्च करने वाला था.
बचाव में किया हमला
US का कहना है कि ईरान पर हमले अमेरिका के बचाव में किए गए. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बुधवार, 27 मई को किया गया यह दूसरा बचाव वाला हमला था. यह हमला तब किया गया जब अधिकारियों ने ईरानी सेना की कुछ आक्रामक हरकतें देखीं. दो US अधिकारियों के मुताबिक, सेना ने चार ईरानी ड्रोन मार गिराए और एक बेस को निशाना बनाया जो पांचवां ड्रोन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा था. सेना ने यह कार्रवाई तब की जब उन्हें लगा कि ये विमान होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए खतरा हैं.
बातचीत के बीच किया हमला
ये स्ट्राइक तब हुए जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान सिर्फ खोखले दावे कर रहा है और जोर देकर कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव के कारण वे तीन महीने पुराने संघर्ष को खत्म करने के लिए जल्दबाजी में कोई डील नहीं करेंगे, जिसने ग्लोबल इकॉनमी में बेचैनी पैदा कर दी है. कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में बोलते हुए, ट्रंप ने भरोसा जताया कि एक डील करीब है. वीकेंड में, उन्होंने यह भी ऐलान किया कि उनके एडमिनिस्ट्रेशन और तेहरान ने “काफी हद तक” एक सेटलमेंट पर बातचीत कर ली है, हालांकि बातचीत अभी भी चल रही है.
क्या चाहते हैं ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप एक ऐसे सेटलमेंट की तलाश में हैं जो होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दे और उन्हें यह पक्का तर्क दे कि ईरान की न्यूक्लियर कैपेबिलिटी इतनी कम हो गई है कि वह हार रहे हैं. लेकिन जैसे हालात हैं, ट्रंप को यह भी खतरा है कि उनकी पसंद के युद्ध का अंत एक खराब अंत के साथ होगा. यह नई डील कई जरूरी मुद्दों को बाद में सुलझाने के लिए टाल देती है और इसने रिपब्लिकन प्रेसिडेंट को पहले ही कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है. यहां तक कि उनके अपने कुछ सपोर्टर्स का भी कहना है कि ईरान के कट्टरपंथी नेता इस झगड़े से बुरी तरह हारे हुए लेकिन हिम्मत वाले होकर निकलेंगे.
पिछले तीन महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है यह युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद शुरू हुआ था. इस लड़ाई में हज़ारों लोग मारे गए हैं, जबकि ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर बहुत बुरा असर पड़ा है.
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News Source: PTI
