Home पर्यटन जून की गर्मी से चाहिए राहत? भारत के ये 8 Cool Places बना देंगे समर वेकेशन को यादगार

जून की गर्मी से चाहिए राहत? भारत के ये 8 Cool Places बना देंगे समर वेकेशन को यादगार

by Preeti Pal 9 June 2026, 3:47 PM IST (Updated 9 June 2026, 3:48 PM IST)
9 June 2026, 3:47 PM IST (Updated 9 June 2026, 3:48 PM IST)
जून की गर्मी से चाहिए राहत? भारत के ये 8 Cool Places बना देंगे आपका समर वेकेशन यादगार और परफेक्ट

Best Cool Places in India: जून का महीना आते ही देश के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी लोगों का हाल बेहाल कर देती है. तेज धूप, उमस और बढ़ता टेंपरेचर हर किसी को ऐसी जगह की तलाश में लगा देता है जहां कुछ दिनों के लिए सुकून और ठंडक मिल सके. अच्छी बात ये है कि भारत में कई ऐसे डेस्टिनेशन हैं जहां जून में भी मौसम सुहाना रहता है. कहीं बादलों से घिरे चाय बागान हैं, तो कहीं बर्फ से ढकी चोटियां और कहीं शांत घाटियां आपका इंतजार कर रही हैं. ऐसे में अगर आप भी इस गर्मी में छुट्टियों की प्लानिंग कर रहे हैं, तो भारत की ये शानदार और ठंडी जगहें आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए.

कोडाइकनाल, तमिलनाडु

तमिलनाडु की पालनी पहाड़ियों में बसा कोडाइकनाल साउथ इंडिया का सबसे खूबसूरत हिल स्टेशन माना जाता है. जून में यहां का मौसम काफी सुहाना रहता है. हल्की बारिश, ठंडी हवाएं और पहाड़ियों पर तैरते बादल इस जगह को किसी फिल्मी लोकेशन जैसा बना देते हैं. यहां आप कोडाई झील में बोटिंग का मज़ा ले सकते हैं, पाइन के जंगलों में सैर कर सकते हैं या कोकर्स वॉक से घाटियों का शानदार नजारा देख सकते हैं. शहर की भागदौड़ से दूर सुकून भरी छुट्टियां बिताने वालों के लिए ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं. जून के महीने में भी यहां का टेंपरेचर 15°C से 24°C के बीच ही रहता है.

कैसे पहुंचें?

अगर आप फ्लाइट से कोडाइकनाल आना चाहते हैं, तो नई दिल्ली से मदुरै इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए सीधी फ्लाइट मिल जाती हैं. यहां से कोडाइकनाल की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है. आप प्रीपेड टैक्सी या बस से कोडाइकनाल पहुंच सकते हैं. वहीं, अगर आप ट्रेन से आना चाहते हैं तो, हज़रत निज़ामुद्दीन या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से सीधी ट्रेनें मिल जाएंगी. कोडाइकनाल के सबसे करीबी रेलवे स्टेशन का नाम कोडाई रोड है. स्टेशन से कोडाइकनाल 80 किलोमीटर दूर है. यहां से आगे का सफर आप टैक्सी या बस से पूरा कर सकते हैं.

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मुन्नार, केरल

मुन्नार का नाम आते ही हरी-भरी पहाड़ियां और दूर तक फैले चाय के बागान आंखों के सामने आ जाते हैं. जून में यहां का टेंपरेचर 17°C से 25°C के बीच रहता है. इस टाइम यहां मानसून की शुरुआत हो जाती है, जिससे पूरा इलाका और भी खूबसूरत दिखने लगता है. बारिश की बूंदों से चमकते चाय के बागान, पहाड़ियों पर छाई धुंध और झरनों की गूंज यहां के माहौल को रोमांटिक बना देती है. नेचर लवर्स और कपल्स के लिए मुन्नार किसी ड्रीम डेस्टिनेशन से कम नहीं. यहां पहुंचकर आप एराविकुलम नेशनल पार्क, टॉप स्टेशन, मट्टुपेट्टी बांध भी देख सकते हैं.

कैसे पहुंचें?

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कोचीन एयरपोर्ट के लिए सीधी फ्लाइट्स मिलती हैं. आप 3 से 4 घंटे में वहां पहुंच जाएंगे. कोचीन एयपोर्ट से मुन्नार लगभग 130 किलोमीटर दूर है. आप वहां पहुंचने के लिए एयरपोर्ट से टैक्सी बुक कर सकते हैं. वहीं, दिल्ली से मुन्नार के लिए कोई डायरेक्ट ट्रेन नहीं है. ऐसे में आपको दिल्ली से एर्नाकुलम या अलुवा के लिए ट्रेन लेनी होगी. ट्रेन से यहां पहुंचने में 45 से 50 घंटें लग जाते हैं. एर्नाकुलम या अलुवा रेलवे स्टेशन से मुन्नार की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है. स्टेशन के बाहर से आप लोकल बसें या टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं.

कूर्ग, कर्नाटक

कर्नाटक का कूर्ग अपनी कॉफी एस्टेट्स और नेचुरल ब्यूटी के लिए फेमस है. जून में यहां मानसून दस्तक देता है और पूरा इलाका हरियाली की चादर ओढ़ लेता है. कॉफी के बागानों के बीच टहलना, झरनों की खूबसूरती को देखना और नदी किनारे बने होमस्टे में ठहरना यहां के खास एक्सपीरियंस में शामिल है. अगर आप शांति और नेचर दोनों का मज़ा लेना चाहते हैं, तो कूर्ग आपके लिए परफेक्ट जगह है. यहां पहुंचकर आप तिब्बती मठ, दुबारे एलीफेंट कैंप में भी अच्छा टाइम बिता सकते हैं. जून के महीने में भी यहां का टेंपरेचर 18°C से 26°C के बीच ही रहता है.

कैसे पहुंचें

सड़क से दिल्ली और कूर्ग के बीच की दूरी लगभग 2400 किलोमीटर है. वहीं, अगर आप प्लेन से जाना चाहते हैं, तो नई दिल्ली से बेंगलुरु या मंगलौर के लिए आपको सीधी फ्लाइट्स मिल जाएंगी. बेंगलुरु से कूर्ग की दूरी लगभग 250 किलोमीटर है. वहीं, मंगलौर से कूर्ग लगभग 140 किलोमीटर दूर है. आप इन दोनों एयरपोर्ट से वोल्वो बस या एक प्राइवेट टैक्सी लेकर आसानी से कूर्ग पहुंच सकते हैं. वहीं, अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं, तो दिल्ली से बेंगलुरु या मैसूर तक जा सकते हैं. मैसूर रेलवे स्टेशन कूर्ग से लगभग 120 किलोमीटर दूर है. इससे आगे का रास्ता आप बस या टैक्सी से पूरा कर सकते हैं.

मशोबरा, हिमाचल प्रदेश

शिमला के पास बसा मशोबरा अभी भी बहुत से टूरिस्ट्स की नजरों से दूर है. यही वजह है कि यहां आपको भीड़भाड़ कम और शांति ज्यादा मिलेगी. देवदार के घने जंगल, सेब के बाग और खूबसूरत ट्रैकिंग ट्रेल्स इस जगह को खास बनाते हैं. जून में यहां का टेंपरेचर 15°C से 25°C के बीच ही बना रहता है. आप यहां रिजर्व फॉरेस्ट सेंचुरी में नेचर का मज़ा ले सकते हैं.

कैसे पहुंचें?

दिल्ली से मशोबरा की दूरी लगभग 350 किलोमीटर है. यहां के लिए सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट शिमला है. शिमला से मशोबरा सिर्फ 10 किलोमीटर दूर है. वहीं, नज़दीकी रेलवे स्टेशन भी शिमला ही है. यानी आप ट्रेन और फ्लाइट, दोनों तरीकों से यहां आसानी से पहुंच सकते हैं. बाकी अगर आपको रोड ट्रिप का मज़ा लेना है तो, आप अपनी कार से भी यहां जा सकते हैं.

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लेह-लद्दाख

अगर आपको एडवेंचर पसंद है तो जून की छुट्टियों में लेह-लद्दाख घूमना सबसे बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है. इस टाइम तक बर्फ पिघलने लगती है और ज्यादातर सड़कें खुल जाती हैं. इस महीने में लेह-लद्दाख का टेंपरेचर 8°C से 22°C के बीच रहता है. यहां पैंगोंग झील का नीला पानी, ऊंचे-ऊंचे पहाड़, पुराने बौद्ध मठ और नेचर की खूबसूरती हर ट्रैवलर का दिल जीत लेती है. साफ आसमान और ठंडी हवाएं इस सफर को और भी यादगार बना देती हैं. थिकसे, हेमिस और शांति स्तूप जैसे बौद्ध मठ यहां के रिच कल्चर को दिखाते हैं.

कैसे पहुंचें?

अगर आप यहां जल्दी पहुंचना चाहते हैं तो, फ्लाइट से जाना सबसे बेहतर रहेगा. दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लेह के कुशोक बकुला रिम्पोची एयरपोर्ट के लिए सीधी फ्लाइट्स मिलती हैं. इसके अलावा दिल्ली से लेह के लिए बसें भी चलती हैं. हालांकि, ये बसें जून से सितंबर के महीनों में ही चलती हैं. बस से लेह पहुंचने में 30-32 घंटे का टाइम लग जाता है.

तवांग, अरुणाचल प्रदेश

नॉर्थ ईस्ट भारत का तवांग अपनी नेचुरल ब्यूटी और बौद्ध कल्चर के लिए जाना जाता है. ऊंचे पहाड़ों के बीच बसे मठ, रंग-बिरंगे प्रेयर फ्लैग और शांत झीलें इस जगह को बहुत खास बनाते हैं. जून के महीने में भी यहां का टेंपरेचर 10°C से 20°C के बीच ही रहता है. ये भारत के सबसे खूबसूरत और पीसफुल टूरिस्ट्स प्लेसेस में से एक है. यहां पहुंचकर आप तवांग मठ, सेला दर्रा, बुमला दर्सा, माधुरी झील, कई वॉटर फॉल्स, तवांग वॉर मेमोरियल देख सकते हैं. अगर आप भीड़ से दूर किसी खूबसूरत और पीसफुल जगह की तलाश में हैं, तो तवांग आपको निराश नहीं करेगा.

कैसे पहुंचें?

तवांग में कोई एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन नहीं है, इसलिए यहां पहुंचने के लिए आपको फ्लाइट और रोड ट्रिप, दोनों का आनंद उठाना पड़ेगा. दिल्ली से तवांग जाने के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है गुवाहाटी (असम) के लिए फ्लाइट लेना. इसके बाद आप टैक्सी या बस लेकर तवांग पहुंच सकते हैं. वैसे, गुवाहाटी से आप हेलीकॉप्टर सर्विस के ज़रिए भी तवांग जा सकते हैं. वहीं, अगर आप ट्रेन से वहां पहुंचना चाहते हैं, तो दिल्ली से गुवाहाटी और तेजपुर के लिए भी ट्रेन जाती हैं. स्टेशन पहुंचने के बाद आज प्राइवेट या शेयर्ड कैब और बस लेकर भी तवांग पहुंच सकते हैं.

स्पीति वैली, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश की स्पीति वैली उन चुनिंदा जगहों में शामिल है जहां जून में भी बारिश का ज्यादा असर नहीं पड़ता. हिमालय की रेन-शैडो ज़ोन में होने की वजह से यहां मौसम साफ रहता है. प्राचीन मठ, लांगलोज़ और हिक्किम जैसे खूबसूरत गांव, चीचम ब्रिज, चांद्राताल झील, ऊंचे पहाड़, सुनसान सड़कें और तारों से भरा आसमान स्पीति को एक अलग ही पहचान देते हैं. रोड ट्रिप पसंद करने वालों के लिए ये जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है. जून के महीने में स्पीति वैली का टेंपरेचर 5°C से 20°C के बीच रहता है. इस जगह को ‘कोल्ड डेजर्ट’ भी कहा जाता है.

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कैसे पहुंचें?

स्पीति वैली पहुंचने के लिए भी कोई सीधा रास्ता नहीं हैं. आपको चंडीगढ़ या शिमला के लिए फ्लाइट लेनी होगी. स्पीति वैली के लिए सबसे करीबी एयरपोर्ट भुंतर है, जो कुल्लू में पड़ता है. यहां से स्पीति की दूरी लगभग 245 किलोमीटर है. आप एयरपोर्ट से लोकल बस और टैक्सी से स्पीति पहुंच सकते हैं. वहीं, अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं, तो नजदीकी रेलवे स्टेशन शिमला और जोगिंदर नगर है. आगे के रास्ते के लिए यहां से भी आपको बस और टैक्सी की सुविधा मिल जाएगी.

लाचुंग, सिक्किम

बर्फीली चोटियों और हरे-भरे मैदानों से घिरा लाचुंग जून के महीने में भारत की सबसे ठंडी जगहों में गिना जाता है. ये फेमस युमथांग वैली का एंट्री गेट है, जिसे ईस्ट की फूलों की घाटी भी कहा जाता है. तिब्बत के बॉर्डर पर बसा छोटा सा लाचुंग गांव, चीड़ के जंगल, सुंदर सीन, ताजी हवा, शानदार पहाड़ी नजारे और पीसफुल एनवायरमेंट के लिए फेमस है. यहां बहने वाली लाचुंग नदी, सेब के बाग और झरने इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है. जून के महीने में भी यहां का टेंपरेचर 8°C से 18°C के बीच ही रहता है.

कैसे पहुंचें?

लाचुंग सिक्किम की राजधानी गंगटोक से करीब 118 किलोमीटर दूर है. अगर आप फ्लाइट से यहां पहुंचना चाहते हैं, तो सिलीगुड़ी का बागडोगरा एयरपोर्ट लाचुंग से सबसे करीब है. इस एयरपोर्ट से लाचुंग की दूरी 125 किलोमीटर है. आप एयरपोक्ट से गंगटोक तक के लिए टैक्सी ले सकते हैं. इसके आगे जाने के लिए आपको इनर लाइन परमिट लेना होगा, जो आपको ट्रैवल एजेंसी से मिल जाएगा. इसके अलावा आप इसके लिए ऑनलाइन भी अप्लाई कर सकते हैं. ट्रेन से लाचुंग पहुंचना काफी यादगार हो सकता है. वहां के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन जलपाईगुड़ी है, जो लाचुंग से करीब 191 किलोमीटर दूर है. रेलवे स्टेशन से गंगटोक तक के लिए टैक्सी मिल जाती हैं. गंगटोक से परमिट लेकर आप लाचुंग के लिए निकल पड़ें. गंगटोक से लाचुंग की दूरी 102 किलोमीटर है.

जून के महीने में घूमने का असली मजा तभी है जब आप ऐसी जगह जाएं जहां मौसम भी शानदार हो और नेचर की खूबसूरती भी पूरी मिले. चाहे आप नेचर लवर हों या सुकून पसंद करने वालें या बस गर्मी से राहत चाहते हों, भारत के ये खूबसूरत डेस्टिनेशन आपकी छुट्टियों को यादगार बना सकते हैं. बस अपना बैग पैक कीजिए और निकल पड़िए उन वादियों की तरफ, जहां ठंडी हवाएं और नेचर की खूबसूरती आपका इंतजार कर रही हैं.

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