Bengal Budget: पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित बीजेपी सरकार ने अपने पहले बजट में एक लाख सरकारी नौकरियां और महंगाई भत्ते (DA) में 20% बढ़ोतरी का बड़ा वादा किया है. एसबीआई (SBI) रिसर्च ने इसे पिछले 17 वर्षों का सबसे सकारात्मक और उम्मीद जगाने वाला बजट बताया है.
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की इकोनॉमिक रिसर्च विंग ने कहा कि यह बजट लेफ्ट और टीएमसी (TMC) के पुराने आर्थिक ढांचे से एक बड़ा बदलाव दिखाता है. इसमें भविष्य के विकास और वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया गया है. बजट भाषण में सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल पिछली सरकार की तुलना में चार गुना अधिक रहा, जो राज्य में प्रशासनिक बदलाव का संकेत है.
प्रति व्यक्ति आय में भारी गिरावट
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की आर्थिक चुनौतियां इस पॉलिसी बदलाव के महत्व को दर्शाती हैं. पश्चिम बंगाल, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 1978 में राष्ट्रीय औसत से ज़्यादा थी और जो देश में पांचवें स्थान पर था, FY25 तक 19वें स्थान पर खिसक गया और अब यह पूरे भारत की प्रति व्यक्ति आय के स्तर से लगभग 23 प्रतिशत नीचे है. रिपोर्ट में 1977-78 से 2010-11 तक CPI(M) सरकार, 2011-12 से 2025-26 तक TMC के दौर और BJP सरकार के पहले साल के दौरान राजकोषीय और आर्थिक रुझानों की तुलना की गई है.
लेफ्ट फ्रंट के 34 साल के कार्यकाल के दौरान, नॉमिनल GSDP 1977-78 में 6,423 करोड़ से बढ़कर 2010-11 में 4.61 लाख करोड़ हो गया. राजस्व प्राप्तियां 699 करोड़ से बढ़कर 47,264 करोड़ हो गईं, जबकि रेवेन्यू खर्च 701 करोड़ से बढ़कर 64,538 करोड़ हो गया.इस दौरान कैपिटल खर्च 78 करोड़ से बढ़कर 2,226 करोड़ हो गया. SBI रिसर्च के अनुसार, असल में कैपिटल खर्च की तुलना में रेवेन्यू खर्च काफी तेज़ी से बढ़ा. TMC के कार्यकाल में नॉमिनल GSDP 2011-12 में 5.20 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 19.91 लाख करोड़ हो गया, जबकि कैपिटल खर्च 2,763 करोड़ से बढ़कर 26,438 करोड़ हो गया.
राजस्व घाटा बढ़ा
हालांकि, रेवेन्यू घाटा 2011-12 में 14,571 करोड़ से बढ़कर 2025-26 के संशोधित अनुमानों में 41,164 करोड़ हो गया, जबकि राज्य बढ़ते कर्ज़ और वित्तीय दबावों से जूझता रहा. BJP सरकार के पहले पूर्ण बजट में रेवेन्यू घाटे को घटाकर 21,984 करोड़ (राज्य के GDP का 1.02%) करने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले साल के संशोधित आंकड़े का लगभग आधा है. वहीं, कैपिटल खर्च के 54.8% बढ़कर 40,930 करोड़ होने का अनुमान है. बजट में राजकोषीय घाटा को GSDP का 2.9 प्रतिशत तय किया गया है, जो FY26 में 3.4 प्रतिशत था. रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर औद्योगिक सुधार की रणनीति के तहत दुर्गापुर में सेमीकंडक्टर यूनिट, कल्याणी में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट और पूर्वी मेदिनीपुर में गहरे समुद्र वाले बंदरगाह (डीप-सी पोर्ट) की योजनाओं के साथ-साथ औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं को फिर से शुरू करने पर ज़ोर दिया गया है.
राजस्व घाटे वाला राज्य रहा है बंगाल
हालांकि, रिपोर्ट में तीनों सरकारों के समय से चली आ रही गहरी संरचनात्मक चिंताओं की ओर भी इशारा किया गया है. पश्चिम बंगाल इस पूरी 21 साल की अवधि में राजस्व घाटे वाला राज्य रहा है और FRBM फ्रेमवर्क के तहत बकाया कर्ज और GSDP के अनुपात के लक्ष्य को कभी हासिल नहीं कर पाया है. राज्य की बकाया देनदारियां GSDP का लगभग 38 प्रतिशत हैं, जो 34.3 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ज़्यादा हैं. इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की 50 प्रतिशत से ज़्यादा राजस्व प्राप्तियां अभी भी केंद्र से मिलने वाले फंड और टैक्स के बंटवारे से आती हैं, जबकि उसका अपना नॉन-टैक्स रेवेन्यू कुल प्राप्तियों का लगभग 3 प्रतिशत ही बना हुआ है.
कानूनी विवादों में फंसी सूबे की राजस्व वसूली
रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 तक राज्य द्वारा तय और जुटाए गए 7,844 करोड़ रुपये के राजस्व की वसूली नहीं हो पाई है. यह रकम कानूनी विवादों या प्रशासनिक अड़चनों में फंसी हुई है. SBI रिसर्च ने सुझाव दिया है कि इस वित्तीय पैटर्न को बदलने के लिए पश्चिम बंगाल को प्रशासनिक सुधारों, संपत्ति से कमाई, प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन में सुधार और अपने खनिज संसाधनों में वैल्यू एडिशन (जैसे कोल-बेड मीथेन रिज़र्व का इस्तेमाल करके मेथनॉल बनाना) के ज़रिए गैर-कर राजस्व बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नए तरीके की सफलता मुख्य रूप से वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाने, निजी निवेश को आकर्षित करने और आय के स्तर में राज्य की लंबे समय से चली आ रही गिरावट को पलटने पर निर्भर करेगी.
News Source: PTI
