Student Protest: झारखंड में पेपर लीक को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता की तबीयत रविवार को बिगड़ गई. झारखंड सरकार ने रविवार को उन उम्मीदवारों के साथ फिर से बातचीत शुरू की है जो भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर 16 दिनों से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, छात्रों के एक प्रमुख गुट ने हेमंत सोरेन सरकार के इस कदम को राजनीतिक चाल बताया है. बातचीत का एक और दौर करने का फ़ैसला तब लिया गया जब शुक्रवार रात और पूरे शनिवार को सरकार और छात्र समूहों के बीच हुई कई बैठकों के बाद भी गतिरोध खत्म नहीं हो सका.
एक और छात्र ICU में
इस बीच, रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में लगभग एक हफ़्ते से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की हालत अचानक सुबह करीब 3 बजे बिगड़ गई. डॉक्टरों ने उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल 53 दर्ज किया. भूख हड़ताल पर बैठे एक और छात्र राहुल क्रांतिम सदर अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में डॉक्टरों की देखरेख में हैं. कुल मिलाकर छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. डुमरी के विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के प्रमुख जयराम महतो ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए पुरानी विधानसभा परिसर में एक दिन का उपवास रखा.
‘तिरंगा मैन’ का भी मिला समर्थन
‘तिरंगा मैन’ के नाम से मशहूर एक्टिविस्ट राजेश हिंदुस्तानी भी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे आंदोलन के समय से ही वे पिछले 15 सालों से तिरंगा लेकर चल रहे हैं. एक्टिविस्ट ने कहा कि मैं लोगों को संविधान में लिखी बातों की याद दिलाने के लिए हर दिन तिरंगा साथ रखता हूं. वे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा का पेपर लीक होने के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि जब मुझे पता चला कि झारखंड के छात्र परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, तो मैं उनके साथ जुड़ गया.
छात्रों से मिले झारखंड बीजेपी प्रमुख
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड बीजेपी प्रमुख और सांसद आदित्य साहू और पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने भी रविवार सुबह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की. मुख्यमंत्री को विरोध प्रदर्शन के पहले दिन ही छात्रों से मिलना चाहिए था. लेकिन वे चुप रहे हैं. सरकार ने अलग-अलग संगठनों को बातचीत के लिए बुलाकर और उनकी मांगों का चार्टर मांगकर अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ वाली नीति अपनाई है. सेठ ने कहा कि अब बातचीत की कोई ज़रूरत नहीं है. छात्रों की मांगें साफ़ है. परीक्षा रद्द की जाए और गड़बड़ियों की CBI से जांच कराई जाए. राज्य सरकार ने शुक्रवार रात JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के साथ बातचीत की, जो इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है. JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में अब तक 19 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, जबकि पैनल के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगटे से 28 जुलाई के बाद से चार बार पूछताछ की जा चुकी है.
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News Source: PTI
