Road Accident: 26 साल के एक सिक्योरिटी गार्ड को 56.87 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा. 2022 में गार्ड दिनेश कुमार की मोटरसाइकिल एक बस के दरवाजे से टकरा गई थी, जिससे वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया. बस ड्राइवर ने लापरवाही से दरवाजा खोला था. दिल्ली के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने एक सिक्योरिटी गार्ड को 56.87 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि किसी व्यक्ति को पूरी ज़िंदगी न जी पाने की अक्षमता के लिए मुआवज़ा दिया जाना चाहिए.
27 अक्टूबर 2022 की रात हुई थी घटना
पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने गार्ड दिनेश कुमार की क्लेम याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. गार्ड कुमार ने बताया कि 27 अक्टूबर 2022 की रात को वह आरके पुरम में सड़क पर टू व्हीलर चला रहे थे, तभी एक खड़ी बस के ड्राइवर ने बिना ट्रैफिक को देखे अचानक बस का दरवाज़ा खोल दिया. जिससे वह उस दरवाज़े से टकरा गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं. हादसे में उनके बाएं हाथ में 75 प्रतिशत स्थायी शारीरिक दिव्यांगता हो गई. 4 अगस्त के 58 पन्नों के आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह दुर्घटना बस ड्राइवर की लापरवाही और जल्दबाज़ी के कारण हुई थी.
बस ड्राइवर की तय हुई लापरवाही
ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह साफ़ है कि बस ड्राइवर की यह ज़िम्मेदारी थी कि वह दरवाज़ा खोलने से पहले आने-जाने वाले ट्रैफिक को देखे. ड्राइवर ने इस मामले में कोई सावधानी नहीं बरती और चलते ट्रैफिक के बीच दरवाज़े के अचानक खुलने की उम्मीद मोटरसाइकिल चलाने वाले से नहीं की जा सकती. ट्रिब्यूनल ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि कुमार की भी लापरवाही थी. ट्रिब्यूनल ने कहा कि बस गलत तरीके से पार्क की गई थी और ड्राइवर ने पीछे से आ रहे ट्रैफिक को देखने की जहमत नहीं उठाई. ट्रिब्यूनल ने कुमार की दलीलों पर ध्यान दिया कि चोटों के कारण वह रोज़मर्रा के काम जैसे कपड़े पहनना, भारी सामान उठाना, गाड़ी चलाना या सवारी करना नहीं कर सकते थे. चूंकि वह बाएं हाथ से काम करते हैं, इसलिए बाएं हाथ में स्थायी दिव्यांगता के कारण वह कोई काम नहीं कर पाएंगे.
ट्रिब्यूनल ने मुआवजे को ठहराया उचित
ट्रिब्यूनल ने कहा कि किसी व्यक्ति को न केवल शारीरिक चोट के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए, बल्कि उस चोट के परिणामस्वरूप हुए नुकसान के लिए भी मुआवजा दिया जाना चाहिए. इसका मतलब है कि उसे पूरी ज़िंदगी न जी पाने, उन सामान्य सुविधाओं का आनंद न ले पाने (जिनका वह चोट न लगने पर आनंद ले सकता था) और उतनी कमाई न कर पाने (जितनी वह पहले करता था या कर सकता था) के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए. इसके बाद ट्रिब्यूनल ने M/s गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस कंपनी को 56.87 लाख रुपये की मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया. यह राशि ब्याज, भविष्य की आय के नुकसान, चिकित्सा खर्च, फिजियोथेरेपी, दर्द और शादी की संभावनाओं के नुकसान जैसे विभिन्न मदों के तहत दी जाएगी.
News Source: PTI
