E-20 Petrol: भारत में एथेनाल मिश्रित पेट्रोल (E-20) विवाद के बीच रायपुर (छत्तीसगढ़) के जिला उपभोक्त फोरम ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. यह फैसला जहां एथेनाल पेट्रोल से परेशान वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत ला सकता है, वहीं वाहन निर्माता कंपनियों के लिए बड़ी मुसीबत भी पैदा कर सकता है. विवाद के बीच ग्राहक अधिकारों की रक्षा करने वाला यह ऐतिहासिक फैसला ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बड़ी नजीर बनेगा.
अदालत ने कहा कि कंपनी उपभोक्ता को नई कार दे या उसका 21.60 लाख रुपए लौटाए. छत्तीसगढ़ के एक ज़िला उपभोक्ता आयोग ने मारुति सुज़ुकी के एक डीलर को आदेश दिया है कि वह एक डॉक्टर द्वारा खरीदी गई कार को नए E20 पेट्रोल-कम्पैटिबल मॉडल से बदले. आयोग ने पाया कि डीलर ने 16 महीने पहले कार बेची थी. बार-बार मरम्मत के बावजूद इंजन में लगातार आ रही दिक्कतों को ठीक करने में नाकाम रहा.
आयोग ने दिया 45 दिन का समय
आयोग ने 14 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादियों (मारुति सुज़ुकी और डीलर) ने उपभोक्ता की खराब गाड़ी वापस लेने तथा E20-कम्पैटिबल इंजन वाली उसी मॉडल की नई गाड़ी देने से इनकार किया. रायपुर में ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अतिरिक्त बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि अगर 45 दिनों के भीतर नई गाड़ी नहीं दी जाती है, तो डीलर और निर्माता को शिकायतकर्ता द्वारा गाड़ी, रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस के लिए चुकाए गए 20.50 लाख रुपए वापस करने होंगे. इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख और कानूनी खर्च के रूप में 10 हजार रुपए अतिरिक्त देने होंगे यानी कार कंपनी को कुल 21.60 लाख रुपए देने होंगे.
बार-बार बंद हो जा रहा था कार का इंजन
शिकायतकर्ता डॉक्टर ने ग्रैंड विटारा कार खरीदी थी, जिसका इंजन देश में मिल रहे E20 पेट्रोल के अनुकूल न होने के कारण बार-बार बंद हो जा रहा था. यह आदेश आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीज़ ने रायपुर के डॉक्टर प्रेमराज डेबटा की शिकायत पर दिया. डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने 3 जून 2024 को कंपनी के अधिकृत डीलर नेक्सा मैग्नेटो (स्काया ऑटोमोबाइल्स) से 18.29 लाख रुपये में मारुति ग्रैंड विटारा इंटेलिजेंट इलेक्ट्रिक (स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड) ज़ेटा प्लस 1.5 CVT खरीदी थी. कहा कि इंश्योरेंस और RTO चार्ज मिलाकर उन्होंने मारुति सुजुकी डीलर को कुल 20,50,494 रुपये का भुगतान किया था. सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता डॉक्टर के वकील ने बताया कि गाड़ी के लगभग 21,913 किलोमीटर चलने के बाद उसके इंजन का वॉर्निंग लाइट जलने लगा और 11 नवंबर 2024 को कार खराब हो गई.
मिलावटी ईंधन से पेट्रोल पंप संचालक ने किया इनकार
डीलर के सर्विस सेंटर ने शुरू में इस समस्या का कारण मिलावटी ईंधन बताया और नया पेट्रोल भरने से पहले फ्यूल टैंक को खाली कर दिया. हालांकि लगभग 60 किलोमीटर चलने के बाद गाड़ी फिर से बंद हो गई. वकील ने कहा कि फ्यूल टैंक की बार-बार सफाई और डीलर के यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि समस्या हल हो गई है, इंजन में खराबी बनी रही, जिससे शिकायतकर्ता को बार-बार गाड़ी वर्कशॉप ले जानी पड़ी. वकील के अनुसार, डॉक्टर उस पेट्रोल पंप पर भी गए जहां उन्होंने कार में ईंधन भरवाया था, लेकिन आउटलेट ने उन्हें बताया कि ईंधन की गुणवत्ता तय मानकों के अनुसार थी.
मरम्मत के बाद भी ठीक नहीं हुआ वाहन
शिकायतकर्ता ने बताया कि बाद में मारुति सुजुकी ने उन्हें ईमेल से सूचित किया कि ईंधन में मिलावट के कारण कार के इंजन और कुछ पुर्जों को बदलने की ज़रूरत है, जिसका अनुमानित खर्च लगभग 5.3 लाख रुपए होगा. बार-बार मरम्मत के बाद भी कार के इंजन और हाइब्रिड सिस्टम में खराबी आती रही. सभी संबंधित पक्षों की बात सुनने के बाद आयोग ने पाया कि गाड़ी जनवरी 2023 में बनी थी, लेकिन शिकायतकर्ता को जून 2024 में बेची गई थी. पैनल ने माना कि शिकायतकर्ता को लगभग एक साल और चार महीने पहले बनी गाड़ी बेची गई थी, जिसमें E20-कम्पैटिबल इंजन नहीं लगा था. पीड़ित डॉक्टर को भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाना है. साथ ही, आयोग ने यह भी आदेश दिया कि अगर तय समय के भीतर इन राशियों का भुगतान नहीं किया जाता है, तो भुगतान होने तक इन पर सालाना सात प्रतिशत की दर से ब्याज लगेगा.
News Source: PTI
