Home Lifestyle इस गर्मी भीड़ से दूर चाहिए सुकून? ये छिपे हुए Hill Stations देंगे ठंडी हवा, शांति और यादगार छुट्टियां

इस गर्मी भीड़ से दूर चाहिए सुकून? ये छिपे हुए Hill Stations देंगे ठंडी हवा, शांति और यादगार छुट्टियां

by Preeti Pal 5 June 2026, 4:40 PM IST (Updated 5 June 2026, 4:47 PM IST)
5 June 2026, 4:40 PM IST (Updated 5 June 2026, 4:47 PM IST)
इस गर्मी भीड़ से दूर चाहिए सुकून? ये छिपे हुए Hill Stations देंगे ठंडी हवा, शांति और यादगार छुट्टियों का मजा

Hidden Hill Stations: गर्मियों की छुट्टियां आते ही ज्यादातर लोग अपने परिवार के साथ पहाड़ों की तरफ घूमने की तैयारी करने लगते हैं. वैसे भी, तेज धूप और बढ़ती गर्मी से राहत पाने के लिए हिल स्टेशन हमेशा से लोगों की पहली पसंद रहे हैं. लेकिन आज हालात पहले जैसे नहीं रहे. कभी शांति और सुकून के लिए फेमस रहे शिमला, मनाली और ऊटी जैसे पॉपुलर हिल स्टेशन अब भीड़भाड़, ट्रैफिक और खूब सारे टूरिस्ट्स की वजह से छोटे-छोटे शहरों की तरह लगने लगे हैं. ऐसे में अब यंग टूरिस्ट्स सिर्फ खूबसूरत नजारों की तलाश में नहीं रहते, बल्कि वो ऐसी जगहें ढूंढ़ते हैं जहां उन्हें मेंटल पीस, नेचर का साथ और कुछ पल खुद के लिए मिल सकें. यही वजह है कि अब लोगों का ध्यान उन हिडन और कम फेमस हिल स्टेशनों की तरफ बढ़ रहा है, जहां अब भी नेचर अपने नेचुरल फॉर्म में है. वैसे भी, पहाड़ों पर घूमना सिर्फ मौसम बदलने का जरिया नहीं होता, बल्कि ये स्ट्रेस और भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ी दूरी बनाने का मौका भी है. वहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे खूबसूरत हिल स्टेशन हैं, जो अभी भी टूरिस्ट्स की भीड़ से काफी हद तक बचे हुए हैं. यहां सुबह की शुरुआत ट्रैफिक के शोर से नहीं, बल्कि पक्षियों की आवाज़ के साथ होती है. देवदार और चीड़ के घने जंगलों के बीच टहलना, दूर-दूर तक फैले बादलों को देखते रहना और पहाड़ी नदियों की आवाज सुनना एक ऐसा एक्सपीरियंस है, जो शहरों की भागदौड़ में कभी नहीं मिल पाता. ऐसे में अगर आप भी इस गर्मी अपनी छुट्टियों में सुकून, ताजगी और नेचर का असली आनंद चाहते हैं, तो भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशनों की बजाय इन शांत ठिकानों की तरफ रुख कर सकते हैं. आज आपके लिए ढूंढ़-ढूंढ़कर ऐसी ही सुकून वाली जगहों की लिस्ट लेकर आए हैं.

तीर्थन घाटी

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बसी तीर्थन घाटी उन खूबसूरत जगहों में से एक है, जो अभी भी भीड़भाड़ से काफी हद तक दूर है. अगर आप इस गर्मी शांति, नेचर की खूबसूरती और ताजी पहाड़ी हवा का मज़ा लेना चाहते हैं, तो तीर्थन वैली आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन हो सकती है. यह घाटी अपने हरे-भरे जंगलों, क्रिस्टल जैसी क्लियर तीर्थन नदी, झरनों और शानदार ट्रेकिंग ट्रेल्स के लिए फेमस है. यहां का ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क यूनेस्को की वर्ल्ज हेरिटेज साइट है. यहां नेचर लवर्स और एडवेंचर के शौकीन घंटों बिता सकते हैं. सुबह-सुबह नदी किनारे बैठकर चाय पीना और पक्षियों की आवाज सुनना यहां का सबसे बेस्ट एक्सपीरियंस है.

कैसे पहुंचे?

तीर्थन वैली पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भुंतर एयरपोर्ट है, जो इस जगह से लगभग 50 किलोमीटर दूर है. इसके अलावा अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं कि सबसे नजदीकी चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन है. आप दिल्ली या चंडीगढ़ से अपनी कार से भी आसानी से यहां पहुंच सकते हैं. कुल्लू से टैक्सी या लोकल बस भी आराम से मिल जाती हैं.

खाना

खाने की बात करें तो तीर्थन वैली में आपको हिमाचली स्वाद का असली मजा मिलेगा. यहां का ट्रेडिशनल सिड्डू, मद्रा, राजमा-चावल और देसी घी से बनीं लोकल डिश टूरिस्ट्स को खूब पसंद आती हैं. नदी किनारे बने छोटे कैफे में ट्राउट फिश भी काफी पॉपुलर डिश है.

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मेचुका

मेचुका, अरुणाचल प्रदेश की सबसे खूबसूरत और नॉन फेमस घाटियों में से एक है. ये जगह समुद्र तल से करीब 6,000 फीट की ऊंचाई पर है. हिमालय की गोद में बसी ये जगह अपनी शांत वादियों, बर्फीली नदियों, लकड़ी के झूलते पुलों और हरे-भरे पहाड़ों के लिए फेमस है. यहां बादल अक्सर पहाड़ों के बीच तैरते नजर आते हैं. मेचुका की सबसे बड़ी खासियत इसका पीसफुल एनवायरमेंट और ट्राइबल कल्चर है. यहां पर 400 साल पुराना समतेन योंगचा मठ बौद्ध कल्चर और इतिहास की झलक दिखाता है. नेचर लवर्स के लिए ट्रेकिंग, नदी किनारे सैर और फोटोग्राफी के लिए ये जगह परफेक्ट है.

कैसे पहुंचे?

मेचुका पहुंचने के लिए सबसे पहले ईटानगर या पासीघाट पहुंचना होगा. यहां से डोनी पोलो एयरपोर्ट सबसे पास है. इसके बाद लगभग 2 दिन की खूबसूरत रोड ट्रिप के बाद आप मेचुका पहुंच सकते हैं. कभी-कभी यहां हेलीकॉप्टर सर्विसेस भी मिल जाती हैं.

खाना

खाने की बात करें तो यहां आपको लोकल डिशेस का बेहतरीन स्वाद मिलेगा. मोमो, थुकपा, स्मोक्ड मीट, बांस की कोपलों से बनी डिश और लोकल हर्ब्स से तैयार ट्रेडिशनल फूड यहां आने वालों लोगों को खूब पसंद आता है. ठंडे मौसम में गर्मागर्म थुकपा का स्वाद लेना एक यादगार एक्सपीरियंस बन जाता है.

अगुम्बे

अगुम्बे, कर्नाटक के पश्चिमी घाट में बसा एक छोटा, मगर बहुत खूबसूरत पहाड़ी कस्बा है. इसे दक्षिण भारत का ‘चेरापूंजी’ भी कहा जाता है. ये जगह अपनी हैवी रेन, घने जंगल और अमेजिंग बायोडायवर्सिटी के लिए फेमस है. मानसून के टाइम यहां का नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता. धुंध से ढकी सड़कें, पहाड़ियों से गिरते झरने और चारों तरफ फैली हरियाली इस जगह को नेचर लवर्स के लिए स्वर्ग बना देती है. अगुम्बे खास तौर पर किंग कोबरा के घर के लिए फेमस है. यहां का अगुम्बे रेनफॉरेस्ट रिसर्च स्टेशन इस रेयर सांप के प्रोटेक्शन के लिए पॉपुलर है. इसके अलावा यहां के सनसेट व्यू पॉइन्ट से दिखाई देने वाला सीन आपको जिंदगी भर याद रह जाता है.

कैसे पहुंचे?

अगुम्बे पहुंचने के लिए उडुपी रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ता है. ये अगुम्बे से लगभग 55 किलोमीटर दूर है. वहीं, अगर आप प्लेन से आ रहे हैं तो, सबसे नजदीकी एयरपोर्ट मैंगलोर इंटरनेशनल हवाई अड्डा है. यहां से टैक्सी या बस के जरिए आसानी से अगुम्बे पहुंचा जा सकता है.

खाना

खाने की बात करें तो अगुम्बे में आपको ट्रेडिशन कर्नाटक और मलनाड खाना मिलेगा. यहां का मसाला डोसा, अक्की रोटी, कडुबू, नारियल बेस्ड करी और फिल्टर कॉफी टूरिस्ट्स के बीच काफी पॉपुलर हैं. बारिश के मौसम में गरमागरम लोकल स्नैक्स और कॉफी का मज़ा लेना इस जगह को और भी खास बना देता है.

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अराकू वैली

अराकू वैली, आंध्र प्रदेश की सबसे खूबसूरत पहाड़ी घाटियों में से एक है. ये जगह अपनी नेचुरल खूबसूरती, कॉफी के बागानों और आदिवासी कल्चर के लिए जानी जाती है. पूर्वी घाट की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बसी इस जगह का मौसम सालभर सुहाना रहता है. सुबह के टाइम पहाड़ों पर छाई हल्की धुंध और दूर-दूर तक फैले कॉफी के बागान इस जगह को किसी पोस्टकार्ड जैसा सुंदर बना देते हैं. अराकू वैली की सबसे खास बात यहां की फेमस ट्रेन जर्नी है. इसमें कई सुरंगों और पुलों से गुजरते हुए शानदार नजारों का आनंद मिलता है. इसके अलावा ट्राइबल म्यूज़ियम वहां के आदिवासी कल्चर को करीब से जानने का मौका देता है. यहां की बोरा केव्स भी टूरिस्ट्स के बीच पॉपुलर हैं.

कैसे पहुंचे?

अराकू वैली पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी बड़ा शहर विशाखापत्तनम है. यहां का विशाखापत्तनम एयरपोर्ट देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है. विशाखापत्तनम से सड़क और रेल, दोनों तरीकों से अराकू पहुंचा जा सकता है.

खाना

खाने की बात करें, तो यहां की ताजा ऑर्गेनिक कॉफी आपको जरूर ट्राई करनी चाहिए. इसके अलावा बांस में पकाया गया चिकन, लोकल आदिवासी खाना, मसालेदार आंध्रा थाली और ट्रेडिशनल स्नैक्स टूरिस्ट्स को खूब पसंद आते हैं.

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चोपता

चोपता, उत्तराखंड की उन खूबसूरत जगहों में शामिल है, जहां प्रकृति आज भी अपने सबसे शांत और प्योर फॉर्म में दिखाई देती है. समुद्र तल से लगभग 8,700 फीट की ऊंचाई पर बसा चोपता हरे-भरे घास के मैदानों, घने जंगलों और बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों के शानदार नजारों के लिए फेमस है. यहां का पीसफुल एनवायरमेंट और ठंडी हवाएं शहरों की भागदौड़ से दूर एक अलग ही दुनिया का एहसास कराती हैं. चोपता खास तौर पर तुंगनाथ मंदिर और चंद्रशिला शिखर ट्रेक के लिए मशहूर है. जंगलों से गुजरते पतले-पतले रास्तों पर चलते हुए पक्षियों की आवाज सुनना और रास्ते भर हिमालय के शानदार सीन देखना यहां का सबसे प्लस प्वॉइनट है. सन राइज के टाइम चंद्रशिला से दिखाई देने वाला नजारा टूरिस्ट्स को दीवाना बना देता है.

कैसे पहुंचे?

चोपता पहुंचने के लिए सबसे नजदीक ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पड़ता है. वहीं, सबसे करीबी एयरपोर्ट है, जॉली ग्रांट एयरपोर्ट. यहां से आप सड़क के रास्ते आसानी से टैक्सी या बस से चोपता पहुंच सकते हैं. ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून से यहां के लिए रेगुलर बस और टैक्सी सर्विसेस मौजूद रहती हैं.

खाना

खाने की बात करें, तो चोपता में आपको उत्तराखंड के ट्रेडिशनल पहाड़ी स्वाद का आनंद मिलेगा. यहां का काफुली, गढ़वाली दाल, मंडुवे की रोटी, आलू के गुटके और गर्मागर्म चाय टूरिस्ट्स को खूब पसंद आती है. लोकल ढाबों में मिलने वाला सादा लेकिन मजेदार पहाड़ी खाना ठंडे मौसम में और भी लाजवाब लगता है.

सबसे बड़ी खासियत

इन जगहों की सबसे खास बात ये है कि यहां पहुंचने वाले लोग सिर्फ घूमने की यादें लेकर वापस नहीं आते, बल्कि अपने साथ सुकून और पॉजिटिव एनर्जी भी लेकर लौटते हैं. यही वजह है कि ऐसे शांत हिल स्टेशन आज के टाइम में तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं. अगर आप भी इस गर्मी किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहां न ट्रैफिक का तनाव हो, न भीड़ का शोर और न ही लंबी लाइनों की परेशानी, तो ट्रेडिशनल हिल स्टेशनों से हटकर कुछ नए ऑप्शन्स पर फोकस करें. ये 5 जगहें आपको नेचर के करीब ले जाएंगी और आपकी छुट्टियों को वाकई में यादगार बना देंगी.

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