High Woman Population Countries: दुनिया के अधिकतर देशों में महिलाओं की आबादी पुरुषों से कम या उसके बराबर पाई जाती है, लेकिन कुछ ऐसे भी देश हैं, जहां आबादी के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है. वहां महिलाओं की आबादी पुरुषों से ज्यादा है. इसके पीछे कई कारण हैं. आबादी में अंतर होने के कारण यहां कई तरह की समस्याएं हैं. पुरुषों की संख्या कम होने की वजह से वहां की लड़कियों के लिए सही पार्टनर ढूंढना मुश्किल हो गया है. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि, यहां दूल्हों की ज्यादा डिमांड है. हालांकि अनबैलेंस्ड पॉपुलेशन का असर सिर्फ शादियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्तर पर भी इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिलता है. आइए जानते हैं दुनिया के उन टॉप-10 देशों के बारे में, जहां महिलाओं की आबादी पुरुषों से ज्यादा है, इसके पीछे क्या कारण हैं और इससे क्या समस्याएं पैदा हुई हैं.
हांगकांग
सबसे ज्यादा महिला आबादी वाले देशों की लिस्ट में सबसे पहला नाम हांगकांग का आता है. आधिकारिक डेटा के मुताबिक, हांगकांग की कुल आबादी 75 लाख है, जिसमें से महिलाओं की आबादी 41 लाख है, जो कुल आबादी का 54.95 प्रतिशत है. वहीं पुरुषों की आबादी 45 प्रतिशत है. हांगकांग में महिलाओं की आबादी ज्यादा होने का एक बड़ा कारण यह है कि यहां महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा जीती हैं. यहां महिलाओं की औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 88.4 साल है, जबकि पुरुषों की औसत आयु 82.8 वर्ष है. इसके अलावा हांगकांग में बड़ी संख्या में फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों से महिलाएं घरेलू सहायिकाओं के तौर पर काम करने आती है, जिस वजह से यहां महिलाओं और पुरुषों की आबादी में बड़ा अंतर है.

महिलाओं की ज्यादा जनसंख्या के कारण कॉर्पोरेट, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में महिलाओं की भागीदारी मजबूत हुई है. वहीं आबादी असंतुलन के बुरे प्रभाव की बात करें, तो महिलाओं को शादी के लिए जल्दी अच्छा लड़का नहीं मिलता. इसके अलावा, शादी न होने या देर से होने की वजह से, हांगकांग का फर्टिलिटी रेट गिरकर लगभग 0.84 बच्चे प्रति महिला हो गया है. इससे भविष्य में युवा आबादी की कमी का खतरा है. बुजुर्ग महिलाओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे हांगकांग के हेल्थकेयर और सोशल वेलफेयर सिस्टम पर पैसे का बोझ पड़ा है.
मोल्दोवा
मोल्दोवा इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर आता है. यहां की कुल आबादी 2.4 मिलियन है. इसमें महिलाएं 54 प्रतिशत हैं, जबकि पुरुष केवल 46 प्रतिशत है. इसका मुख्य कारण यह है कि महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से काफी ज्यादा होती है. दिल की बीमारी, शराब और स्मोकिंग से जुड़ी बीमारियों और एक्सीडेंट की वजह से पुरुषों की मौत की दर ज्यादा है. इसके अलावा, काम करने की उम्र वाले बहुत से पुरुष रोजगार के लिए विदेश चले जाते हैं, जिससे देश में महिलाओं का जेंडर रेश्यो और बढ़ जाता है.
ज्यादा महिला आबादी का असर देश की इकॉनमी और समाज दोनों पर पड़ता है. मोल्दोवा में एजुकेशन, हेल्थकेयर और सरकारी नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है. दूसरी ओर कई महिलाओं को सही पार्टनर ढूंढने में मुश्किल होती है. मोल्दोवा में फर्टिलिटी रेट 1.73 है, जिससे समय के साथ वहां बुजुर्ग आबादी बढ़ने और युवा आबादी घटने का खतरा है. इसलिए, सरकार परिवारों को बढ़ावा देने और देश के अंदर लोगों को रोजगार देने की दिशा में काम कर रही है.
मकाऊ
मकाऊ की कुल आबादी 7.23 लाख है, जिसमें महिलाओं की जनसंख्या कुल आबादी का लगभग 53 प्रतिशत है. वहीं पुरुषों की आबादी लगभग 47 प्रतिशत है. आबादी ज्यादा होने के कारण मकाऊ के सर्विस सेक्टर में, खासकर होटल, टूरिज्म, रिटेल, एजुकेशन और हेल्थकेयर में, काफी औरतें काम करती हैं. कई औरतें विदेश से भी नौकरी के लिए आती हैं, जिससे महिलाओं की आबादी और बढ़ जाती है.
महिलाओं की ज्यादा हिस्सेदारी ने मकाऊ की इकॉनमी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है. औरतें होटल, कसीनो, हॉस्पिटल और स्कूल जैसे सेक्टर में काफी काम कर रही हैं. दूसरी ओर, कम बर्थ रेट मकाऊ के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. बहुत से लोग देर से शादी कर रहे हैं या बिल्कुल शादी नहीं कर रहे हैं. इससे फर्टिलिटी रेट पर भी असर पड़ा है. मकाउ में फर्टिलिटी रेट 0.47 से 0.69 है, जो दुनिया में सबसे कम है. अगर यही हाल रहा, तो आने वाले सालों में जवान आबादी कम हो सकती है और बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ने से हेल्थ सर्विस और सोशल वेलफेयर स्कीम पर और पैसे का दबाव पड़ सकता है.

लातविया
यूरोपीय देश लातविया में भी महिलाओं की आबादी पुरुषों से ज्यादा है. यहां की कुल जनसंख्या 1.8 मिलियन हैं, जिसमें महिलाएं 53.7 प्रतिशत है और पुरुषों की आबादी 46.3 प्रतिशत है. यह बड़ा जेंडर इम्बैलेंस मुख्य रूप से पुरुषों की कम उम्र और खराब लाइफस्टाइल की वजह से है, जिससे उनकी मृत्यु दर काफी ज्यादा है. इसके अलावा, 2004 में लातविया के यूरोपियन यूनियन (EU) में शामिल होने के बाद, कई युवा काम करने की उम्र के पुरुष बेहतर नौकरियों और ज्यादा सैलरी के लिए वेस्टर्न यूरोप चले गए, जिससे पुरुषों की आबादी कम हो गई.
इसका सीधा असर इकॉनमी और सोशल स्ट्रक्चर दोनों पर पड़ा है. एजुकेशन, हेल्थ और सर्विस सेक्टर में महिलाओं का दबदबा है, लेकिन घरेलू और सोशल लेवल पर, कई महिलाओं को पार्टनर ढूंढने में काफी मुश्किल होती है. लातविया का फर्टिलिटी रेट सिर्फ 1.24 है, जिससे बुज़ुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है. इसके अलावा युवा वर्कफोर्स में लगातार कमी आ रही है. इसे ठीक करने के लिए, सरकार माइग्रेंट नागरिकों को वापस लाने और नए परिवारों को आर्थिक मदद देने पर काम कर रही है.
आर्मेनिया
आर्मेनिया इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर आता है. यहां की कुल आबादी 2.93 मिलियन है, जिसमें से महिलाओं की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों की संख्या लगभग 47 प्रतिशत है. बाकी देशों की तरह यहां भी महिलाओं की लाइफ एक्सपेक्टेंसी पुरुषों से ज्यादा है. इसके अलावा, बड़ी संख्या में पुरुष काम करने के लिए विदेश जाते हैं, जिससे महिलाओं की आबादी और बढ़ जाती है.
आर्मेनिया की शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं में महिलाओं की अहम भूमिका है. हायर एजुकेशन में भी महिलाओं की भागीदारी अच्छी मानी जाती है. हालांकि, महिलाओं की ज्यादा आबादी के बावजूद, देश को कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कम जन्म दर ने आबादी की बढ़ोतरी को धीमा कर दिया है. आर्मेनिया का फर्टिलिटी रेट 1.7 है. लगातार पलायन और कम प्रजनन दर से भविष्य में काम करने वाली आबादी में कमी का खतरा है.
रूस
क्षेत्रफल के हिसाब से रूस दुनिया का सबसे बड़ा देश है, लेकिन यह अनबैलेंस्ड पॉपुलेशन की समस्या से जूझ रहा है. रूस की कुल आबादी लगभग 143.3 मिलियन है. इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 53.6 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों की आबादी मात्र 46.4 प्रतिशत है रूस में पुरुषों की तुलना में करीब 1 करोड़ से अधिक महिलाएं हैं。इसका मुख्य कारण पुरुषों में अत्यधिक शराब (वोडका) के सेवन, धूम्रपान और दुर्घटनाओं की वजह से उच्च मृत्यु दर है, जिससे उनकी औसत उम्र महिलाओं से करीब 11 वर्ष कम है.

इसके अलावा, हालिया सैन्य संघर्षों के कारण पुरुषों की आबादी घट रही है. इस अंतर का असर देश की इकॉनमी और समाज दोनों पर साफ दिखता है, जहां फैक्ट्रियों से लेकर कॉर्पोरेट और सरकारी नौकरियों तक में महिलाओं की भारी भागीदारी है. दूसरी ओर, लाखों महिलाओं को शादी के लिए सही मैच ढूंढने में परेशानी होती है. रूस का फर्टिलिटी रेट 1.37 है, जिससे देश तेजी से बूढ़ा हो रहा है. रूस में सरकार ‘मदर कैपिटल’ जैसी योजनाओं के जरिए परिवारों को बढ़ावा दे रही है.
यूक्रेन
यह देश भी पूर्वी यूरोप के अन्य देशों की तरह गंभीर लैंगिक असंतुलन का सामना कर रहा है. यहां की कुल आबादी लगभग 37.8 मिलियन है. देश की आबादी में महिलाएं लगभग 53.5 प्रतिशत हैं, जबकि पुरुषों का अनुपात केवल 46.5 प्रतिशत है。इस बड़े अंतर का मुख्य कारण पुरुषों की कम जीवन प्रत्याशा रही है. पिछले कुछ सालों से जारी युद्ध भी इस अंतर को बड़ा करने में सहयोग कर रहा है. इस बदलाव का गहरा असर देश की इकॉनमी और समाज पर पड़ रहा है. फिलहाल देश में कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और सार्वजनिक सेवाओं जैसे कठिन क्षेत्रों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है. यूक्रेन का फर्टिलिटी रेट गिरकर 1.2 के करीब पहुंच चुका है, जिससे भविष्य में बुजुर्ग आबादी का बोझ बढ़ने और युवा कार्यबल के पूरी तरह टूटने का खतरा है.
बेलारूस
रूस का यह पड़ोसी देश भी इसी संकट का सामना कर रहा है. बेलारूस की कुल आबादी लगभग 9.05 मिलियन है. इस आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी 53.4 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों का अनुपात सिर्फ 46.6 प्रतिशत है इसका मुख्य कारण यह है कि यहाँ भी महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों की तुलना में लगभग 10 वर्ष अधिक होती है. पुरुषों में दिल की बीमारियां, काम का अत्यधिक तनाव और शराब से जुड़ी बीमारियों के कारण असमय मौत की दर काफी ज्यादा है. इसके अलावा, बेहतर आर्थिक अवसरों के लिए कामकाजी उम्र के पुरुषों का रूस या यूरोपीय देशों में रोजगार के लिए पलायन करना भी जेंडर रेशियो को बढ़ाता है. बेलारूस में फर्टिलिटी रेट घटकर 1.03 रह गया है, जिससे समाज में बुजुर्गों पर निर्भरता बढ़ रही है.
जॉर्जिया और प्यूर्टो रिको
जॉर्जिया नौवें नंबर पर आता है, जहां 53.4% महिला आबादी है. टॉप 10 लिस्ट में प्यूर्टो रिको नाम का आइलैंड आखिर में आता है, जहां 52.9% महिला आबादी रहती है. दोनों देशों में काम करने की उम्र के पुरुषों का विदेश में माइग्रेशन इस असंतुलन का एक बड़ा कारण है. पुरुषों के माइग्रेशन और महिलाओं के अपने देशों में बने रहने से यह डेमोग्राफी बदल गई है. यहां भी अन्य देशों की तरह युवाओं की कमी है और सामाजिक सरंचना बिगड़ रही है.
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