Home Top News अब दोषियों की खैर नहीं! राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद देश में लागू हुआ एंटी पेपर लीक कानून

अब दोषियों की खैर नहीं! राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद देश में लागू हुआ एंटी पेपर लीक कानून

by Amit Dubey 1 August 2026, 7:52 AM IST
1 August 2026, 7:52 AM IST
Anti Paper Leak Act 2026

Anti Paper Leak Act 2026: नीट, रेलवे समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को देने वाले अभ्यर्थियों के लिए खास और राहत वाली खबर है. अब उनके पेपर लीक करने वालों को इसके बारे में सोचने पर भी डर लगेगा. जी हां, हाल के नीट पेपर लीक समेत बीते वर्षों में कई बार पेपर लीक ने छात्रों व अभ्यर्थियों को काफी परेशान किया है. उन्हें पेपर लीक की वजह से एक ही परीक्षा को दूसरी बार देनी पड़ी है. इससे आर्थिक, मानसिक और अन्य प्रकार की दिक्कतें होती हैं.

अब केंद्र की मोदी सरकार ने देश में पेपर लीक को लेकर सख्त कानून (पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2026) बना दिया है. इसमें दोषियों को सख्त से सख्त सजा का प्रावधान है और उनपर 10 करोड़ रुपये तक का भरी-भरकम जुर्माना भी लगेगा. आइए जानते हैं पूरी खबर.

एंटी पेपर लीक बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी

आज शनिवार से देश में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लागू हो गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिलने के बाद अब एंटी पेपर लीक बिल कानून बन चुका है. पूरे देश में एंटी पेपर लीक कानून लागू हो गया है. पहले लोकसभा और उसके बाद राज्यसभा में इस बिल को सफलतापूर्वक पारित करने के बाद इसको कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत थी. मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एंटी पेपर लीक बिल को मंजूरी दे दी है. इसके बाद अब यह कानून बन चुका है.

बता दें कि एंटी पेपर लीक बिल का आधिकारिक नाम ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) संशोधन बिल, 2026’ है. यह बिल मूल कानून ‘पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024’ का संशोधन बिल है. नए बिल में पेपर लीक करने वाले लोगों के लिए पहले से भी ज्यादा सख्त सजा और जल्दी सुनवाई का प्रावधान है. अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया है.

एंटी पेपर लीक कानून की बड़ी बातें

  • इस कानून के तहत परीक्षा में पेपर लीक या गलत तरीकों का इस्तेमाल करने वालों को 5 से 10 साल की जेल होगी और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा. वहीं, संगठित अपराध के लिए, कानून में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
  • इस नए संशोधित कानून के तहत, पेपर लीक मामलों की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी. इसकी घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी.
  • इस कानून के तहत 2 महीने के अंदर जांच को पूरी करना जरूरी है.
  • पेपर लीक मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी.
  • जांच के अलावा फैसले की बात करें तो पेपर लीक मामलों में 3 महीने के अंदर फैसला सुनाने का प्रावधान है.

कानून का उद्देश्य

कानून का उद्देश्य बहुत ही स्पष्ट है. हाल के सालों में, पब्लिक एग्जामिनेशन अथॉरिटीज द्वारा आयोजित परीक्षाओं में प्रश्न पत्र लीक और गड़बड़ी की कुछ घटनाएं हुई हैं, जिससे सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर असर पड़ा है. यह कानून सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अधिकार देता है कि वे इसके तहत अपराधों की सुनवाई के लिए किसी भी सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के तौर पर नामित कर सकें. इसमें यह भी प्रोविजन है कि ऐसी कोर्ट में प्रोसिडिंग्स डे-टू-डे बेसिस पर जारी रहेंगी और चार्जशीट फाइल होने की तारीख से तीन महीने के अंदर ट्रायल पूरा हो जाएगा.

यह कानून केंद्र सरकार को यह भी अधिकार देता है कि अगर जरूरी हो तो किसी भी अपराध की जांच के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स बना सके. कानून में पब्लिक एग्जामिनेशन अथॉरिटी द्वारा दूसरी सरकारी एजेंसियों की सेवाएं लेने, मानदंड, मानक और दिशानिर्देश तैयार करने और गलत तरीकों या अपराधों की घटनाओं की रिपोर्टिंग जैसे प्नावधान हैं.

हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक बिल पास, छात्रों पर पुलिस एक्शन को लेकर भिड़े राहुल और रिजिजू

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?