CBSE News: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सख्त रुख अपनाया है. CIC ने निर्देश दिया है कि RTI एक्ट के तहत मांगी गई आंसर कॉपी की फोटोकॉपी निर्धारित फीस लेकर उपलब्ध कराई जाए. आयोग ने CBSE को अपने 19 मई 2025 के सर्कुलर में आवश्यक बदलाव करने की सलाह भी दी. कमीशन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि RTI एक्ट के तहत आंसर शीट प्राप्त करने के बाद उम्मीदवारों को री-इवैल्यूएशन से रोकने वाला नियम कानून की भावना के अनुरूप नहीं है. बता दें कि यह पूरा विवाद CBSE बोर्ड परीक्षा के 10वीं कक्षा के एक छात्र की RTI एप्लीकेशन से शुरू हुआ. छात्र ने नियमित री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया की अधिक फीस का हवाला देते हुए RTI एक्ट के तहत अपनी आंसर शीट की फोटोकॉपी मांगी थी.
छात्र की RTI का CPIO ने दिया था जवाब
10वीं क्लास के स्टूडेंट ने मैथमेटिक्स स्टैंडर्ड सेट-3 पेपर के मुश्किल होने, मॉडरेशन पॉलिसी लागू करने और मार्क्स काटने को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी. एप्लीकेशन के मुताबिक, री-इवैल्यूएशन प्रोसेस में पांच विषयों की फोटोकॉपी के लिए 2500, री-वेरिफिकेशन के लिए 2500 और हर सवाल के लिए 100 रुपये का खर्च शामिल था. इन सभी प्रोसेस का कुल खर्च 10 हजार के आसपास पहुंच सकता था. वहीं, उम्मीदवार ने RTI के माध्यम से आग्रह किया कि मैं गुजारिश करता हूं कि वह RTI एक्ट, 2005 के तहत मेरी आंसर शीट की फोटोकॉपी उपलब्ध कराएं. दूसरी ओर बोर्ड के सेंट्रल पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (CPIO) ने 2 जुलाई, 2025 को उम्मीदवार को बताया कि जरूरी फीस मिलने के बाद आंसर सीट की एक कॉपी उन्हें ईमेल से भेज दी गई थी.
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RTI एक्ट और नियमों की भावना के खिलाफ
कॉपी मिलने के बाद उम्मीदवार ने अपनी पहली अपनी दायर की. इसमें उसने आंसर बुक में खाली पन्नों, गणित में मॉडरेशन पॉलिसी और अपनी आंसर शीट के मूल्यांकन से जुड़े कई सवाल उठाए. इस पर CPIO ने कहा कि ये सवाल आरटीआई सवालों से अलग थे और इनके लिए स्पष्टीकरण और विश्लेषणात्मक जवाब मांगे. वहीं, CIC की सुनवाई के दौरान CPIO ने बताया कि RTI नियम, 2012 के तहत आंसर बुक की कॉपी तो मिल सकती है, लेकिन इस एक्ट के तहत वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए अनुरोध नहीं किया जा सकता है. अथॉरिटी की तरफ से जवाब आने के बाद CIC ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि किसी उम्मीदवार को री-इवैल्यूएशन कराने से रोकना RTI एक्ट और नियमों की भावना के खिलाफ है.
आयोग ने धारा 22 का दिया हवाला
कमीशन ने स्पष्ट रूप से कहा कि CBSE, RTI एक्ट के खिलाफ ली जाने वाली फीस के लिए दूसरे नियमों का सहारा नहीं ले सकता है. आयोग ने धारा 22 का हवाला दिया, जिसके तहत दूसरे कानूनों में मौजूद विरोधाभासी प्रावधानों पर RTI एक्ट को प्राथमिकता दी जाती है. CIC ने ICSI बनाम पारस जैन मामले में सुप्रीम कोर्ट के 11 अप्रैल, 2019 के फैसले का भी जिक्र किया. कोर्ट के इस फैसले में कहा गया था कि किसी संस्थान के दिशा-निर्देशों और RTI फ्रेमवर्क के तहत उपलब्ध रास्ते एक-दूसरे से स्वतंत्र नहीं हैं. यही वजह है कि आयोग ने निर्देश दिया कि RTI के तहत मांगी गई उत्तर-पुस्तिकाएं RTI नियम, 2012 के अनुसार ही फोटोकॉपी फीस लेकर ही उपलब्ध कराई जाए. साथ ही आयोग ने CPIO को भविष्य में सावधानी बरतने की भी कड़ी चेतावनी दी और सुझाव दिया कि CBSE धारा 25(5) के तहत अपने 19 मई के सर्कुलर संशोधन करें ताकि वह RTI एक्ट के अनुरूप हो सके.
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News S ource: PTI
