Balan The Boy Review: कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करतीं, बल्कि दिल को छू जाती हैं. ‘बालनः द बॉय’ ऐसी ही एक मूवी है. मलयालम सिनेमा के फेमस निर्देशक चिदंबरम, जिन्होंने मंजुम्मेल बॉयज जैसी शानदार फिल्म बनाई है, इस बार एक इमोशनल मिस्ट्री ड्रामा लेकर आए हैं. 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद ये फिल्म अब जी5 पर मलयालम के साथ हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषा में भी स्ट्रीम हो रही है. फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी इमोशनल कहानी है, जो एक मां और उसके बेटे के रिश्ते पर बनी है.
कैसी है कहानी?
कहानी की शुरुआत जेल से होती है, जहां एक महिला कैदी अपने बेटे बालन को जन्म देती है. जेल में जन्म लेने की वजह से बालन का बचपन भी उन्हीं दीवारों के बीच गुजरता है. सजा पूरी होने के बाद उसकी मां सिर्फ एक ही सपना देखती है कि उसका बेटा नॉर्मल जिंदगी जी सके. लेकिन बाहर की दुनिया उसके लिए आसान नहीं होती. जेल में रहने वाली शमनम नाम की महिला, जो रिहा हुई महिलाओं को गलत धंधे में धकेलती है, लगातार उसका पीछा करती रहती है. अपने बेटे को इस अंधेरी दुनिया से दूर रखने के लिए बालन की मां बार-बार अपना नाम, पहचान और रहने की जगह बदलती रहती है.
अतीत से भागती मां
बालन की मां को जंगल के पास एक सुनसान घर में काम मिल जाता है. वहां रहने वाली एक बुजुर्ग महिला उसका सहारा बनती है. लेकिन किस्मत उसे यहां भी चैन से नहीं रहने देती. पुराने दुश्मन फिर से उसकी जिंदगी में लौट आते हैं और कहानी कई मोड़ लेती है. आखिर बालन की मां अपने अतीत से क्यों भाग रही है? क्या वो अपने बेटे को सुरक्षित रख पाएगी? फिर जब दोनों अलग हो जाते हैं, तो बालन अपनी मां को कैसे ढूंढ़ता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.
कहानी की खासियत
‘बालनः द बॉय’ कोई तेज रफ्तार थ्रिलर नहीं है. ये एक ऐसी फिल्म है जो धीरे-धीरे अपनी कहानी बुनती है. निर्देशक चिदंबरम ने कहानी में सस्पेंस जरूर रखा है, लेकिन असली फोकस मां-बेटे के रिश्ते और समाज की उस सोच पर है, जो किसी इंसान के अतीत को कभी भूलने नहीं देती. फिल्म ये सवाल भी उठाती है कि क्या कोई इंसान अपनी पुरानी गलतियों को पीछे छोड़कर नई शुरुआत कर सकता है? वैसे, फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शक पूरी तरह इससे जुड़ जाते हैं. खासकर प्री क्लाइमैक्स और क्लाइमैक्स काफी दमदार है.
एक्टिंग ने जीता दिल
फिल्म में फरजाना पलाथिंगल ने बालन की मां का किरदार बड़े शानदार तरीके से निभाया है. उनके किरदार में डायलॉग कम हैं, लेकिन उन्होंने अपनी आंखों और चेहरे से हर भावना को अच्छी तरह दिखाया है. वहीं अधिशेषन के.आर. ने छोटे बालन के रोल में बेहतरीन काम किया है. उनकी मासूमियत और मां के लिए प्यार दर्शकों को भावुक कर देता है. इसके अलावा बीना एंटनी ने नेगेटिव रोल में अच्छा असर छोड़ा है. वहीं, टोविनो थॉमस का एक्सटेंडेड कैमियो कहानी में अलग मोड़ लेकर आता है.
देखें या नहीं?
अगर आप मसाला एंटरटेनर की उम्मीद कर रहे हैं, तो शायद ये फिल्म आपकी पसंद न बने. लेकिन अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जो रिश्तों, भावनाओं और जिंदगी की सच्चाइयों को खूबसूरती से दिखाती हैं, तो ‘बालनः द बॉय’ आपको जरूर पसंद आएगी. मजबूत एक्टिंग, दिल छू लेने वाली कहानी और भावनात्मक क्लाइमैक्स के दम पर ये फिल्म हाल के समय में OTT पर आई बेहतरीन मलयालम फिल्मों में अपनी जगह बना चुकी है. ऐसे में वीकेंड पर परिवार के साथ एक अच्छी फिल्म देखने का मन है, तो इस फिल्म को आप अपनी वॉचलिस्ट में शामिल कर सकते हैं.
