Chief of Defence Staff: भारतीय सशस्त्र बलों के साथ देश को अपना नया सीडीएस लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि PVSM, AVSM, SM, VSM (रिटायर्ड) के रूप में मिल चुका है. बीते दिनों रक्षा मंत्रालय ने इनकी नियुक्ति को लेकर जानकारी दी थी. मंत्रालय ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर भी कहा था कि भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि PVSM, AVSM, SM, VSM (रिटायर्ड) को अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया है, वे सैन्य मामलों के विभाग में सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे. NS Raja Subramani 30 मई 2026 को जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल पूरा होने के बाद अपना पदभार ग्रहण करेंगे.
आज एक जून है. बीते 31 मई को जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने भारत के नए सीडीएस (Chief of Defence Staff) के रूप में अपना पदभार संभाल लिया है. भारत के सशस्त्र बलों यानी कि थल सेना, जल सेना और वायु सेना के बीच शानदार तालमेल को बनाए रखना और इसमें बढ़ोतरी करना, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में सरकार को सैन्य सलाह के बारे में बताना समेत अन्य महत्वपूर्ण कार्य देश के सीडीएस करते हैं.
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश में चीफ डिफेंस ऑफ स्टाफ के नए पद का ऐलान किया था. वहीं, जनवरी 2020 में इसकी आधिकारिक रूप से स्थापना कर दी गई थी. तब हमारे देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत नियुक्त हुए थे. नए नियुक्त हुए सीडीएस एनएस राजा सुब्रमणि हमारे देश के तीसरे सीडीएस हैं. आइए जानते हैं कि हमारे देश में सीडीएस की क्या भूमिका होती है. अब तक हमारे देश में कितने सीडीएस हुए हैं. इसके साथ ही जानेंगे कि हाल ही में नियुक्त हुए भारत के नए सीडीएस यानी लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि PVSM, AVSM, SM, VSM (रिटायर्ड) के बारे में.
73वें स्वतंत्रता दिवस पर सीडीएस का ऐलान
भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों सेनाओं और देश की रक्षा व सुरक्षा के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के नए पद की घोषणा की थी. वे लाल किले से छठी बार तिरंगा फहराने के बाद देश को संबोधित करते हुए बोले कि देश में चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉप (CDS) का नया पद बनेगा. इससे थलसेना, वायुसेना और नौसेना सभी को एक जैसा प्रभावी नेतृत्व मिलेगा. उन्होंने बताया था कि इससे देश की सैन्य सेवाओं में सुधार का सपना पूरा होगा.
जानकारी के अनुसार, सन् 1999 में करगिल युद्ध के बाद पहली बार सीडीएस की सिफारिश एक समिति ने की थी. तब तीनों सेनाओं के बीच एक शानदार तालमेल और कॉर्डिनेश की जरूरत महसूस हुई थी. इस समिति के अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी थे. हालांकि, राजनीतिक इच्छा शक्ति समेत अन्य कारणों से इस सिफारिश को पूरा नहीं किया जा सका और करीब 20 साल बाद साल 2019 में पीएम मोदी ने देश के लिए सीडीएस पद की घोषणा की.
प्रधानमंत्री ने लाल किले से सीडीएस पद का ऐलान करते हुए कहा था- समय रहते रिफॉर्म्स की बहुत आवश्यकता होती है. सैन्य संसाधनों के रिफॉर्म्स पर काफी चर्चा हुई है. अनेक रिपोर्ट्स आई हैं. सभी रिपोर्ट्स एक ही समस्या को उजागर करती रही हैं. हमारी सेनाओं का जल-थल-नभ, तीनों में ही कॉर्डिनेशन है. किसी भी भारतीय को इसमें गर्व है. लेकिन आज जैसे दुनिया बदल रही है. आज जिस तरह तकनीक व्यवस्थाएं बन रही हैं. भारत को इसमें नहीं रुकना चाहिए. हमारी सेनाओं को एक साथ आगे बढ़ना होगा. जल-थल-नभ में एक आगे चले, दूसरा दो कदम पीछे हो, ऐसा नहीं चल सकता. सबको साथ चलना होगा. आज मैं एक महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा करना चाहता हूं. आज हमने निर्णय किया है कि हम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की व्यवस्था करेंगे. इस पद के गठन के बाद तीनों सेनाओं को एक प्रभावी नेतृत्व मिलेगा. सामरिक दृष्टि से भारत के लिए सीडीएस अहम होगा.

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भारत में चीफ डिफेंस स्टाफ की भूमिका
भारत में चीफ ऑफ डिफेंस की भूमिका देश की सुरक्षा और सशस्त्र सेनाओं के लिए काफी अहम होती है. वैसे तो देश में तीनों सेनाओं का प्रमुख या सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति होते हैं लेकिन अगर तीनों सेनाओं के आपस में समन्वय और तालमेल को मजबूती के साथ बनाए रखने की बात करें तो इसकी जिम्मेदारी देश के सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस) की होती है. मतलब कि सीडीएस इंडियन आर्म्ड फोर्सेज (भारतीय सशस्त्र बलों- थलसेना, जलसेना और वायुसेना) में सबसे ऊंचा पद है, जो आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन के लिए जिम्मेदार है. सीडीएस सरकार के मुख्य मिलिट्री एडवाइजर के तौर पर काम करते हैं और डिफेंस सेक्टर में सुधार और थिएटर कमांड बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, किसी बहुत ही आपात और जरूरी स्थिति में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े निर्णय लेने में प्रधानमंत्री को सैन्य सलाह भी सीडीएस ही देते हैं. देश के सीडीएस समय-समय पर तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ मीटिंग भी करते हैं.

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बिपिन रावत का कार्यकाल
जनरल बिपिन रावत भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (CDS) थे. सीडीएस बनने से पहले वे भारतीय थल सेना के प्रमुख थे. 15 अगस्त 2019 को पीएम मोदी के द्वारा इस पद की घोषणा करने के बाद 1 जनवरी 2020 को इसकी आधिकारिक रूप से स्थापना की गई थी. इसी दिन जनरल बिपिन रावत को भारत का पहला सीडीएस नियुक्त किया गया. देश के सीडीएस रहते हुए जनरल रावत ने कई बड़े कदम उठाए और देश की सुरक्षा, संप्रभुता में सफलता पाई. उनको देश के पूर्वोत्तर में उग्रवाद को खत्म करने, जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए भी जाना जाता है.
जनरल बिपिन रावत का दुखद निधन
जनरल बिपिन रावत 1 जनवरी 2020 से अपने निधन तक देश के सीडीएस रहे थे. 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के नीलगिरि जिले के कुन्नूर इलाके में उनका हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हो गया था. इस हादसे में जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका का दुखद निधन हो गया था. हादसे में सीडीएस के साथ उनके निजी स्टॉफ और 4 चालक दल के सदस्यों के साथ कुल 13 लोगों की जानें गईं थी. इस हादसे ने पूरे देश को हैरान, स्तब्ध के साथ शोक में कर दिया था.

जनरल बिपिन रावत के साथ यह घटना तब हुई जब वे कोयंबटूर के सुलुरु वायुसेना एयरपोर्ट से वेलिंगटन के डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज जा रहे थे. घटना दोपहर करीब साढ़े 12 बजे के आसपास हुई थी. हादसे की हाई लेवल जांच हुई और जब रिपोर्ट आई तो मालूम हुआ कि यह दुखद घटना मौसम के अचानक खराब होने से हुई. मौसम खराब की वजह से विजिबिलिटी कम होने के कारण पायलट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था और फिर यह अनचाही दुर्घटना हो गई. बता दें कि बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले (पहले उत्तर प्रदेश राज्य का हिस्सा) में हुआ था.
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अनिल चौहान का कार्यकाल
अब बात करते हैं देश के दूसरे सीडीएस जनरल अनिल चौहान की. जनरल रावत के दुखद निधन के बाद सीडीएस पद पर नियुक्ति में कुछ महीनों का वक्त लगा था. उसके बाद भारत को जनरल अनिल चौहान के रूप में अपना दूसरा सीडीएस 30 सितंबर 2022 को मिला. जनरल चौहान ने अपना कार्यभार 30 सितंबर 2022 को संभाला था. साल 2025 में इनका कार्यकाल समाप्त होने वाला था लेकिन मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने जनरल अनिल चौहान के इस कार्यकाल को 30 मई 2026 तक बढ़ा दिया था.

हाल ही में जनरल अनिल का सीडीएस का कार्यकाल समाप्त हुआ है. उन्होंने अपने विदाई समारोह में अपने इस कार्यकाल को बहुत संतोषजनक और शानदार बताया. इनके ही कार्यकाल में भारत ने साल 2025 में आतंकियों और पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया और उसमें ऐतिहासिक विजय हासिल की. रिटायरमेंट होने के दौरान जनरल अनिल चौहान ने कहा,”तीनों सेनाओं के गार्ड ऑफ ऑनर के साथ रिटायर होना मेरे लिए बहुत ही गर्व की बात है. इसके लिए मैं तीनों सेनाओं और आईडीएस मुख्यालय का धन्यवाद करता हूं. “
कौन हैं जनरल एनएस राजा सुब्रमणि?
अब बात देश के नए और तीसरे सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि की करते हैं. इन्होंने 31 मई रविवार को भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में अपना कार्यभार संभाल ली है. इनके करियर की बात करें तो एनएस राजा सुब्रमणि ने अपने 40 वर्षों के शानदार करियर में कई बड़ी उपलब्धि हासिल की और कई तरह से देश की सेवा की. इन्होंने ऑपरेशन राइनों के जरिए असम में आतंकवाद विरोधी अभियान में 16 गढ़वाल राइफल्स, जम्मू-कश्मीर में 168 इंफ्रैंट्री ब्रिगेड और मध्य क्षेत्र में 17 माउंटेन डिवीजन की कमान संभाली है.

एन एस राजा सुब्रमणि को पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक कोर, द्वितीय कोर की कमान संभालने का भी अनुभव है. इन्हें पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर ऑपरेशन संबंधित गतिविधियों का काफी अनुभव और जानकारी है.
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इसके अलावा एन एस राजा सुब्रमणि के स्टॉफ और ट्रेनिंग संबंधी कार्यों में नेशनल डिफेंस अकादमी में संभागीय अधिकारी, पर्वतीय ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, कजाकिस्तान में डिफेंस अटैची, जम्मू-कश्मीर में नेशनल राइफल्स सेक्टर के उप कमांडर, रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय में सैन्य खुफिया के उप महानिदेशक, वेलिंगटन में रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज में मुख्य प्रशिक्षक (सेना) और उत्तरी कमान मुख्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ शामिल है.

एनएस राजा सुब्रमणि की एजुकेशन की बात करें तो ये भारतीय सैन्य अकादमी से ग्रेजुएट हैं. इन्हें 14 दिसंबर 1985 को गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था. ये ज्वॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज, यूके के ब्रैक्नेल और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं. एन एस राजा सुब्रमणि ने किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री ली है और मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल की उपाधि प्राप्त की है. जानकारी के अनुसार, एन एस राजा सुब्रमणि को देश की सेना में विशिष्ट सेवा देने के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित भी किया गया है.
