Fire Safety Act: देश में एक के बाद आग लगने की भयानक घटनाएं हो रही है, जिसमें मासूम लोग मारे जा रहे हैं और कई परिवार उजड़ रहे हैं. ताजा दुर्घटना सोमवार को लखनऊ में हुई. अलीगंज में एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 स्टूडेंट्स की जान चली गई. वे बच्चे जो अपने जीवन में कुछ बनने का सपना लेकर पढ़ाई करने के लिए कोचिंग गए थे, दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए. लखनऊ के 15 परिवारों ने अपने जवान बच्चों को खो दिया. प्रशासन केवल मुआवजे का ऐलान कर सकता है और जांच के लिए एसआईटी गठित कर सकता है, लेकिन भविष्य में ऐसी दुर्घटना न होने की जिम्मेदारी नहीं ले सकता. अगर लेता तो, शायद यह दुर्घटनाएं भी नहीं होती. इससे पहले मालवीय नगर अग्निकांड ने पूर देश को झकझोर दिया था.

मालवीय नगर अग्निकांड में 21 की मौत
राष्ट्रीय राजधानी के मालवीय नगर में 3 जून को एक रेस्टोरेंट में भीषण आग लग गई. जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई है. इनमें से ज्यादातर विदेशी नागरिक थे. पूरी बिल्डिंग जलकर राख हो गई. इस हादसे ने इलाके में दहशत पैदा कर दी है. 21 लोगों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. इस हादसे की तस्वीरें बहुत ही भयानक थी, जिसमें लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़की से कूद रहे थे. एक वीडियो में देखा गया कि एक महिला अपने बच्चे को गोद में लेकर तीन मंजिल से नीचे कूद रही है. मालवीय नगर के लोग बताते हैं कि उनके कान में उन लोगों की चीखें आज भी सुनाई देती हैं. एक बार जब आग विक्राल रूप ले लेती है, तो उससे बचकर निकलना बहुत मुश्किल होता है. धुएं और आग की लपटों के बीच लोग फंस कर रह जाते हैं और उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है.
हर साल होती है इतने लोगों की मौत
आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के सालाना आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल आग लगने की घटनाओं में औसतन 7,000 से 15,000 लोग दुखद रूप से मर जाते हैं. कई मेडिकल और इंडिपेंडेंट रिसर्च रिपोर्ट्स का दावा है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है.
कभी एसी ब्लास्ट तो कभी सिलेंडर ब्लास्ट के कारण अक्सर घरों में आग लग जाती है, जो किसी न किसी लापरवाही का नतीजा है. गर्मियों में ऐसी घटनाएं ज्यादा होती हैं. दिल्ली हो या लखनऊ, इस तरह के हादसे हर बार लोगों की लालच और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हैं. कमर्शियल बिल्डिंग्स जैसे होटल, कोचिंग सेंटर और रेस्टोरेंट जैसे जगहों के लिए फायर सेफ्टी एक्ट बनाया गया है, ताकि आग लगने को रोका जा सके.
क्या है फायर सेफ्टी एक्ट
फायर सेफ्टी एक्ट एक ऐसा कानूनी ढांचा है, जिसका मकसद इमारतों और सार्वजनिक स्थानों पर आग लगने के खतरों को रोकना, लोगों की जान बचाना और संपत्ति के नुकसान को कम करना है. यह अलग-अलग राज्यों में अलग- अलग जरूरतों के आधार पर लागू किया गया है. फायर सेफ्टी नियमों को हर नागरिक के लिए जानना जरूरी है, ताकि वे अपने आस-पास की व्यवस्था पर ध्यान दे सकें और भविष्य में होने वाली घटनाओं को रोक सकें. यह नियम कोचिंग सेंटर, अस्पताल, स्कूल, मॉल, होटल और बहुमंजिला आवासीय इमारतों पर लागू होता है.

मुख्य दिशा निर्देश
फायर एनओसी (NOC) : किसी भी व्यवसायिक संस्था, चाहे वह ऑफिस हो, कोचिंग सेंटर या होटल, के लिए स्थानीय फायर डिपार्टमेंट से फायर सेफ्टी नो- ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य है. इसे हर साल रिन्यू कराना पड़ता है. फायर डिपार्टमेंट आपकी बिल्डिंग का इंस्पेक्शन करने के बाद ही एनओसी देते हैं, जिसमें देखा जाता है कि बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के सारे इंतजाम किए गए हैं या नहीं.
अग्निशमन उपकरण: इमारतों में स्मोक अलार्म, फायर एक्सटिंग्विशर, पानी के स्प्रिंकलर और होज रील जैसी कुछ चीजें उचित मात्रा में होनी चाहिए. ताकि आग लगने पर समय रहते स्थिति पर काबू कर लिया जाए और जान- माल का नुकसान न हो. स्मोक अलार्म धुआं उठते ही लोगों को अलर्ट कर देता है, ताकि सभी लोग जल्दी बाहर निकल सकें. वहीं फायर एक्सटिंग्विशर आग बुझाने के काम आता है. समय समय पर इनकी जांच करनी चाहिए.
सुरक्षित निकास: कमर्शियल बिल्डिंग में आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए सीढ़ियां और दरवाजे होने चाहिए, जो साफ और चालू हो. बाहर जाने के लिए दरवाजे पर ‘Emergency Exit’ का साइन बोर्ड लगा होना चाहिए.
स्टाफ ट्रेनिंग और मॉक ड्रिल: ऑफिस में पूरे स्टाफ को आग लगने की स्थिति से निकलने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए. हर तीन से छह महीने में एक बार मॉक ड्रिल होना चाहिए, जिसमें स्टाफ को आग लगने के खतरों की पहचान करना, अग्निशामक यंत्रों का उपयोग करना, आग लगने की सूचना पर प्रतिक्रिया देना, आपातकालीन स्थितियों के दौरान फायर डिपार्टमेंट और पुलिस को सूचित करने की ट्रेनिंग देनी चाहिए.
नेशनल बिल्डिंग कोड: इसके तहत किसी भी इमारत के डिजाइन, निर्माण, सुरक्षा और रखरखाव के लिए दिशा-निर्देशों और तकनीकी मानक बताए गए हैं. इमारत भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को झेलने में सक्षम होना चाहिए. इमारत में सही वेंटिलेशन, नेचुरल लाइट की सही व्यवस्था होना चाहिए. इसके अलावा बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए रैंप और लिफ्ट जरूर होने चाहिए.
क्यों जरूरी हैं नियम
अक्सर देखा गया है कि नियमों की अनदेखी की वजह से कोचिंग सेंटर या होटलों में बड़ी आग लग जाती है, जिससे लोगों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचता. यह नियम पक्का करते हैं कि सभी पब्लिक और कमर्शियल जगहों पर दुर्घटना की स्थिति में जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए सुरक्षा के पूरे इंतजाम हों. इन नियमों को तोड़ने पर भारी जुर्माना, बिल्डिंग सील और जेल भी हो सकती है.
इन बातों का भी रखें ध्यान
बिजली उपकरण हैं बड़ा खतरा: ऑफिस और कमर्शियल बिल्डिंग्स में आग लगने का मुख्य कारण बिजली से जुड़ी खराबी होती है. इसलिए, कर्मचारियों और मैनेजमेंट दोनों को बिजली से जुड़ी सुरक्षा के नियमों पर ध्यान देना चाहिए. अक्सर लोग एक ही पावर सॉकेट में कई डिवाइस लगा देते हैं, जिससे ओवरलोडिंग होती है और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, खराब, घिसी-पिटी या पुरानी वायरिंग के इस्तेमाल से भी आग लगने का खतरा बढ़ जाता है. कंस्ट्रक्शन के समय सभी बिजली के उपकरण अच्छी क्वालिटी के लगाए. सभी बिजली के उपकरणों जैसे कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर और एयर कंडीशनर की समय-समय पर जांच और सर्विसिंग होनी चाहिए. इसका भी ध्यान रखें कि इस्तेमाल न होने पर इन डिवाइस को बंद कर दें, जिससे न सिर्फ बिजली की बचत होती है, बल्कि हादसों का खतरा भी कम होता है.
रेगुलर चेकिंग करें: फायर सेफ्टी पक्की करने के लिए रेगुलर जांच भी बहुत जरूरी है. अक्सर छोटी-मोटी कमियां शुरू में ध्यान में नहीं आतीं, लेकिन बाद में बड़े हादसों का कारण बन जाती हैं. इसलिए हर कमर्शियल बिल्डिंग में एक फायर वार्डन या सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त किया जाना चाहिए जो सुरक्षा मानकों की निगरानी करे. यह ऑफिसर हर महीने फायर सेफ्टी और अन्य खतरों की जांच कर सकता है, संभावित खतरों की पहचान कर सकता है और उन्हें समय रहते ठीक करवा सकता है.

जल्दी आग पकड़ने चीजें हैं बड़ा खतरा: कमर्शियल बिल्डिंग्स में ज्यादातर चीजें आग पकड़ने वाली होती हैं, जिस कारण आग तेजी से फैल जाती है. आग पकड़ने वाली चीजों का इस्तेमाल भी कम से कम होना चाहिए. कागज, दीवार का पेंट, केमिकल, कुछ सफाई वाले एजेंट और आग पकड़ने वाले अन्य पदार्थों आग तेजी से फैल सकती है. इसलिए जितना कम हो सके, उतना ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. साथ ही जगह को साफ-सुथरा रखने और फालतू सामान हटाने से भी आग लगने का खतरा कम होता है.
एडवांस्ड फायर सिस्टम: आजकल की बिल्डिंग्स में एडवांस्ड फायर अलार्म और सेंसर सिस्टम का इस्तेमाल जरूरी हो गया है. ऊंची बिल्डिंग्स और बड़े ऑफिस कॉम्प्लेक्स में एक ही समय में सैकड़ों या हजारों लोग हो सकते हैं. ऐसे माहौल में आग का जल्दी पता चलना जान बचाने और नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाता है. नए फायर सेंसर धुआं, गर्मी और गैस लीक जैसी स्थितियों का तुरंत पता लगाकर अलार्म बजा सकते हैं. इससे लोगों को बिल्डिंग से बाहर निकलने का समय मिल जाता है और राहत व बचाव कार्य जल्दी शुरू हो पाते हैं.
स्मार्ट स्मोक डिटेक्टर ऐसे डिवाइस हैं जो धुआं या आग के संकेत मिलने पर सीधे स्मार्टफोन पर अलर्ट भेज सकते हैं. इसके अलावा, फायर अलार्म सिस्टम को बिल्डिंग ऑटोमेशन सिस्टम के साथ जोड़ा जा सकता है. इससे इमरजेंसी के समय दरवाजे अपने आप खुल सकते हैं, स्प्रिंकलर चालू हो सकते हैं और लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता आसानी से मिल सकता है. कोचिंग सेंटर और मालवीय नगर अग्निकांड में वे दरवाजे लॉक हो गए थे, जिसके कारण लोग बाहर नहीं निकल पाए. इसलिए, डिजिटल लॉक वाले दरवाजों का मैकेनिज्म ऐसा होना चाहिए, कि पावर कट या आग लगने की स्थिति में अपने आप खुल जाएं और लोग बाहर निकल सके.
आग लगने की स्थिति में क्या करें
आग लगने की स्थिति में लोग घबरा जाते हैं और मौके पर जरूरी कदम नहीं उठा पाते. किसी भी आपातकाल की स्थिति में आपको पहले खुद को शांत करना है और इन बातों का ध्यान रखना है.
- तुरंत अलार्म बजाएं.
- इमरजेंसी रास्तों से भागें
- लिफ्ट का इस्तेमाल न करें.
- जरूरतमंदों की मदद करें.
- आग को फैलने से रोकने के लिए अपने पीछे दरवाजे बंद कर लें.
- पहले से तय जगह पर इकट्ठा हों.
- फायर फाइटर्स या इमरजेंसी रिस्पॉन्स को सूचित करें.
