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24 जुलाई की ‘डेडलाइन’: क्या अमेरिका के 10% टैरिफ बम को डिफ्यूज कर पाएगा भारत?

by Sanjay Kumar Srivastava 23 June 2026, 7:38 PM IST (Updated 23 June 2026, 7:40 PM IST)
23 June 2026, 7:38 PM IST (Updated 23 June 2026, 7:40 PM IST)
24 जुलाई की 'डेडलाइन': क्या अमेरिका के 10% टैरिफ बम को डिफ्यूज कर पाएगा भारत?

India-US Deal: भारत और अमेरिका ने मंगलवार को हाई-लेवल ट्रेड बातचीत शुरू की. इसका मकसद एक प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को बचाना और उसे नए सिरे से तैयार करना है, क्योंकि अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी में बदलाव के कारण इस साल की शुरुआत में तय हुआ ढांचा गड़बड़ा गया था. कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर से मुलाकात की. दोनों पक्ष 24 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उस तारीख को व्यापारिक साझेदारों से होने वाले इंपोर्ट पर अमेरिका का अस्थायी 10% टैरिफ खत्म होने वाला है.

सार्थक बातचीत की उम्मीद

कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि @USTradeRep एंबेसडर जेमिसन ग्रीर, @USAmbIndia एंबेसडर सर्जियो गोर और उनके डेलीगेशन का @DoC_GoI में हार्दिक स्वागत है. भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सार्थक बातचीत की उम्मीद है. ग्रीर का यह दो दिन का भारत दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 17 जून को फ्रांस में G7 समिट के दौरान हुई मुलाकात के कुछ दिनों बाद हो रहा है. एक साल से भी ज़्यादा समय में हुई इस पहली मुलाकात ने व्यापार बातचीत को नई गति दी है, जिसे दोनों पक्ष आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अहम मानते हैं. बातचीत का फोकस फरवरी में घोषित उस फ्रेमवर्क समझौते को फिर से तैयार करने पर है, जो टैरिफ से जुड़े वादों पर आधारित था. बाद में, ट्रंप के घोषित बड़े टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के कारण ये वादे अनिश्चित हो गए थे.

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रियायती टैरिफ हासिल करना भारत का मकसद

सूत्रों के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय के मुख्यालय ‘वाणिज्य भवन’ में हो रही इस बैठक में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन भी शामिल हो रहे हैं. यह बैठक इस महीने की शुरुआत (2-4 जून) में नई दिल्ली में मुख्य वार्ताकार स्तर पर हुई बातचीत के बाद हो रही है. अमेरिकी व्यापार नीति में बदलाव के कारण भारत को वियतनाम और अन्य आसियान (ASEAN) देशों जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पर जो बढ़त मिलने की उम्मीद थी, वह कम हो गई है. इसके बाद, रियायती टैरिफ सुविधा हासिल करना नई दिल्ली के लिए एक मुख्य मकसद बन गया है.

अंतिम चरण में व्यापार समझौता

फरवरी के फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था, जो कई प्रतिस्पर्धी निर्यातकों पर लगने वाले शुल्क से कम था. हालांकि, बाद में कोर्ट के फैसले और सभी देशों से होने वाले आयात पर अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने के वाशिंगटन के फैसले ने दोनों पक्षों को इस समझौते के मुख्य पहलुओं पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है. अग्रवाल ने 15 जून को कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत मुख्य रूप से फ्रेमवर्क डील को अंतिम रूप देने पर केंद्रित होगी. 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं.

ट्रंप ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 का किया उपयोग

इससे पहले 5 जून को गोयल ने कहा था कि भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के सभी अधूरे मुद्दों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, और दोनों पक्षों के अगले महीने के मध्य तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के बहुत ही जीवंत पहले चरण को लागू करने की संभावना है. दोनों पक्षों ने फरवरी में BTA के पहले चरण की रूपरेखा की घोषणा की थी. यह फ्रेमवर्क भारतीय सामानों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ पर आधारित था.

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हालांकि, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की. यह इस साल 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा.अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में हुए इन बदलावों के कारण दोनों पक्षों के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण है.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लटका मामला

भारत और अमेरिका ने 13 फरवरी, 2025 को BTA बातचीत औपचारिक रूप से शुरू की. 7 फरवरी, 2026 को दोनों पक्षों ने घोषणा की कि वे आपसी और दोनों के लिए फायदेमंद व्यापार से जुड़े एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर सहमत हो गए हैं. उस ढांचे के अनुसार, अमेरिका भारत पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था. उसने रूसी तेल खरीदने के कारण भारतीय सामानों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया था और समझौते के तहत बाकी 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने वाला था. लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ के खिलाफ फैसला सुनाया. सहमत ढांचे के तहत भारत ने अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और कई तरह के खाद्य व कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म करने या कम करने का प्रस्ताव दिया. इन उत्पादों में ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट, और अन्य उत्पाद शामिल थे.

500 अरब डॉलर का व्यापार करेगा भारत

नई दिल्ली ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने की इच्छा भी जताई है. चूंकि अमेरिका में टैरिफ की स्थिति बदल गई है, इसलिए दोनों पक्ष समझौते के ढांचे पर फिर से विचार कर रहे हैं. फ़्रेमवर्क पर फरवरी में जारी संयुक्त बयान में एक प्रावधान है कि अगर किसी भी देश के तय टैरिफ में कोई बदलाव होता है, तो अमेरिका और भारत इस बात पर सहमत हैं कि दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में बदलाव कर सकता है.

इस बीच, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 11 और 12 मार्च को लगभग 60 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल करते हुए ‘सेक्शन 301’ के तहत दो जांच शुरू कीं. एक जांच कथित तौर पर ज़रूरत से ज़्यादा औद्योगिक क्षमता पर केंद्रित थी, जबकि दूसरी में ग्लोबल सप्लाई चेन में जबरन मज़दूरी से जुड़ी चिंताओं की पड़ताल की गई. इन दोनों जांचों में भारत को भी शामिल किया गया था.

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जब समझौते के पहले चरण का फ़्रेमवर्क अंतिम रूप से तैयार हुआ, तो भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों – जैसे आसियान देशों (इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, कंबोडिया), श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुकाबले बढ़त हासिल थी.इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. उस समय, भारत के प्रतिस्पर्धी देशों पर टैरिफ 19 से 20 प्रतिशत के बीच था. लेकिन अब सभी देशों पर समान रूप से 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है.

अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार

पिछले वित्त वर्ष के दौरान अमेरिका को भारत का निर्यात मामूली रूप से 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया. व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) 2024-25 के 40.89 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर 2025-26 में 34.4 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया.

डील फाइनल नहीं होने पर नुकसान की आशंका

भारत अमेरिका के 10% अस्थाई टैरिफ को डिफ्यूज करने के लिए युद्धस्तर पर बातचीत कर रहा है, जिसकी समय सीमा 24 जुलाई 2026 को समाप्त हो रही है. यदि इस तिथि से पहले द्विपक्षीय व्यापार समझौता फाइनल नहीं होता है, तो भारतीय निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच वियतनाम और बांग्लादेश के मुकाबले बेहतर टैरिफ दरों के लिए वार्ता जारी है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने ट्रंप प्रशासन की नई 10% वैश्विक टैरिफ नीति और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को नया आकार देने के लिए नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक शुरू की है.

भारत तैयार कर रहा नया आर्थिक खाका

भारत का लक्ष्य 24 जुलाई 2026 की समय सीमा से पहले वियतनाम व बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अपने निर्यातकों के लिए बेहतर टैरिफ लाभ सुनिश्चित करना है. जेमिसन ग्रीर की अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के रूप में संभावित नियुक्ति के मद्देनजर, भारत अमेरिका के साथ मिलकर एक नया आर्थिक और रणनीतिक खाका तैयार कर रहा है. नई दिल्ली आक्रामक टैरिफ नीतियों के प्रभाव को कम करने और द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से अपने निर्यात हितों की रक्षा के लिए एक सक्रिय मास्टरप्लान पर काम कर रही है.

भारत और अमेरिका के बीच अब तक के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली में ‘आधी रात की कूटनीति’ (गहन वार्ता) का दौर जारी है. 24 जुलाई 2026 की समयसीमा से ठीक पहले दोनों देश पहले चरण के अंतरिम सौदे को बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर इस वक्त भारत दौरे पर हैं, जहां वे वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं.

क्या है दांव पर?

इस समझौते के तहत अगले 5 वर्षों में 500 बिलियन (करीब 41 लाख करोड़ रुपए) के व्यापार का लक्ष्य रखा गया है. भारत जहां अपने कपड़ा और चमड़ा उद्योग के लिए रियायतें चाहता है, वहीं अमेरिका भारत के डेयरी, कृषि बाजार और रक्षा-ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रहा है. हालांकि पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी दबाव में समझौता नहीं करेगा, लेकिन कूटनीतिक हलकों में मध्य-जुलाई तक पहले चरण की डील पूरी होने की मजबूत उम्मीद जताई जा रही है.

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