Home Latest News & Updates क्या है कच्चातिवु द्वीप का विवाद? BJP ने फिर साधा कांग्रेस पर निशाना; इंदिरा गांधी का भी हुआ जिक्र

क्या है कच्चातिवु द्वीप का विवाद? BJP ने फिर साधा कांग्रेस पर निशाना; इंदिरा गांधी का भी हुआ जिक्र

by Sachin Kumar 26 June 2026, 3:18 PM IST
26 June 2026, 3:18 PM IST
Katchatheevu Sri Lanka historic dark chapter Congress BJP

Katchatheevu Island : कच्चाथीवू द्वीप का मुद्दा तमिलनाडु से होते हुए अब राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है. 1974 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने कच्चाथीवू द्वीप को लेकर श्रीलंका से समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत भारत सरकार ने इस द्वीप को श्रीलंका का हिस्सा मान लिया था. इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आलोचना की. बीजेपी ने इसको कांग्रेस के शासनकाल का एक और ऐतिहासिक काला अध्याय बताया. साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया कि इससे भारत के राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया. बता दें कि कच्चाथीवू पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) में स्थित एक निर्जन द्वीप है. भारत ने साल 1974 में पहली बार इस द्वीप पर श्रीलंका की संप्रभुता को मान्यता दी थी.

ऐतिहासिक काला अध्याय

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कच्चाथीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपना कांग्रेस पार्टी के समर्पण के कैलेंडर में एक और दिन जोड़ने जैसा है. उन्होंने आगे कहा कि कल हमने इमरजेंसी के दुखद अध्याय को याद किया था और आज कांग्रेस पार्टी के समर्पण के कैलेंडर में एक और ऐतिहासिक काला अध्याय जुड़ गया है. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि 1974 में इसी दिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तमिलनाडु के पास स्थित कच्चाथीवू द्वीप को भारत से श्रीलंका को सौंप दिया गया था. इसके बाद तमिलनाडु के मछुआरों को कई तरह की पेरशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

कांग्रेस का रहा समर्पण होने का इतिहास

सुधांशु ने द्वीप पर स्थित सेंट एंथनी श्राइन का भी जिक्र किया और फिर 1962 में अक्साई चिन, चीन को दे दिया गया. साथ ही दावा किया कि भले ही लोग अपनी नावों पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराए, उन्हें वहां जाने की अनुमति नहीं है. त्रिवेदी ने यह भी आरोप लगा दिया कि भारत के हितों से समझौता करना कांग्रेस का एक लंबा इतिहास रहा है. इसका सिलसिला 1947 से शुरू होता है, जब भारत के बंटवारे और मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए थे. इसके बाद 1948 में PoK को पाकिस्तान को सौंप दिया गया और फिर साल 1963 अक्साई चिन को चीन को दे दिया गया. इस दौरान मानसरोवर के साथ-साथ असम को करीब सौंप दिया गया था.

कच्चाथीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपने का जिक्र करते हुए सुधांशु ने कहा कि 26 जून, 1974 को कच्चाथीवू द्वीप को सौंप दिया गया. इसके बाद 28 जून को यह श्रीलंका के नियंत्रण में आ गया. उन्होंने कहा कि यह एक दुखद अध्याय है जिसे आज की पीढ़ी को याद रखना चाहिए. आज वह दिन है जो हमें याद दिलाता है कि भारत के राष्ट्रीय हितों के साथ कांग्रेस ने समझौता किया था.

उत्तराखंड में खत्म हुआ निहंगों और पुलिस के बीच गतिरोध, वापस लौटे हिमाचल; जानें क्या था पूरा मामला

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?