Unesco World Heritage Sites: जब भी लोग भारत घूमने की बात करते हैं, तो अक्सर समुद्र, पहाड़, हिल स्टेशन या बड़े शहरों के बारे में ही सोचते हैं. लेकिन अगर आप अपनी अगली ट्रिप में कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जहां खूबसूरत नजारों के साथ इतिहास, संस्कृति और हजारों साल पुरानी कहानियां भी मिलें, तो भारत की यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के बारे में जरूर सोचें. इनके बारे में जानकर आप भी इन्हें अपनी बकेट लिस्ट में शामिल करना चाहेंगे. वैसे भी, भारत की विरासत इतनी समृद्ध है कि यहां प्राचीन मंदिरों से लेकर मुगल स्मारक, पहाड़ी किले, बौद्ध गुफाएं और शानदार वाइल्डलाइफ प्लेस तक सब कुछ देखने को मिलता है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के सारनाथ को भारत का 45वां यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया है. इससे देश की विरासत को एक बार फिर वैश्विक पहचान मिली है. ऐसे में बैग पैक करने से पहले इस लिस्ट पर एक नजर डाल लीजिए. हो सकता है आपकी अगली ट्रैवल डेस्टिनेशन यहीं मिल जाए.

सारनाथ, वाराणसी
अगर आप भारत के आध्यात्मिक इतिहास को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो सारनाथ से बेहतर जगह मिल पाना मुश्किल है. वाराणसी से करीब 10 किलोमीटर दूर ये जगह बौद्ध धर्म के लिए बहुत ज्यादा खास मानी जाती है. उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर वैसे भी कई वजहों से खास है. हालांकि, मान्यता ये भी है कि यहीं गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था. करीब 2,500 साल से सारनाथ दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रेरणा का केंद्र रहा है. यहां मौजूद स्तूप, मंदिर और प्राचीन मठ हमारे उसी लंबे इतिहास की कहानी बताते हैं. इसी साल 25 जुलाई को सारनाथ को भारत का 45वां यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया है. यानी अब ये जगह सिर्फ धार्मिक यात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले टूरिस्टों के लिए भी और खास हो गई है.
ताजमहल, आगरा
भारत की विरासत की बात हो और ताजमहल का नाम न आए, ऐसा कैसे हो सकता है? उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे बना ये सफेद संगमरमर का स्मारक दुनिया की सबसे मशहूर इमारतों में शामिल है. मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था. इसका निर्माण 1631 में शुरू हुआ. सालों बाद भी ताजमहल की खूबसूरती आज भी दुनिया भर के टूरिस्टों को अपनी तरफ खींचती है. वैसे, ताजमहल की खासियत सिर्फ इसकी वास्तुकला नहीं है. दरअसल, दिन के अलग-अलग समय में बदलती रोशनी के साथ इसका रंग भी बदला हुआ सा नजर आता है. ताजमहल के आसपास का बड़ा सा बगीचा और पानी में पड़ती ताज की परछाई इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करती है. अगर आप पहली बार भारत की विरासत देखने निकल रहे हैं, तो ताजमहल आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए.
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कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा
ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर ऐसा लगता है जैसे पत्थरों से बना कोई बहुत बड़ा रथ जमीन पर खड़ा हो. 13वीं सदी में राजा नरसिंहदेव प्रथम ने इस मंदिर को सूर्य देव को समर्पित करते हुए बनवाया था. मंदिर की वास्तुकला बहुत ही शानदार और खूबसूरत है. हैरानी की बात है कि इस मंदिर को सदियों पहले एक ही बड़े पहाड़ को काटकर बनाया गया था. रथ के आकार में बने इस मंदिर में आपको बारीक नक्काशी और देवी-देवताओं की शानदार मूर्तियां देखने को मिलेंगी. साल 1984 में इसे भी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिला. इतिहास, वास्तुकला और फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए ये जगह किसी खजाने से कम नहीं है.

सुंदरबन नेशनल पार्क, पश्चिम बंगाल
अगर आप उन लोगों में से हैं जिन्हें लगता है कि, ट्रैवल का मतलब सिर्फ स्मारक और मंदिर नहीं, बल्कि जंगल और वाइल्डलाइफ भी हैं, तो सुंदरबन आपकी बकेट लिस्ट में होना ही चाहिए. सुंदरबन दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव जंगलों में से एक है. इसके अलावा ये जगह रॉयल बंगाल टाइगर के लिए खास तौर से मशहूर है. यहां नदियों और ज्वारीय जलमार्गों का बहुत बड़ा नेटवर्क है, जो इस जगह को बिल्कुल अलग रूप देता है. 1987 में सुंदरबन को प्राकृतिक यूनेस्को वैश्विक धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था. नाव से जंगल के बीच सफर करना और प्रकृति को उसके सबसे जंगली रूप में देखना अपने आप में बहुत ही खूबसूरत और यादगार अनुभव हो सकता है.
नंदा देवी और वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क
अगर आपको पहाड़ और फूल दोनों पसंद हैं, तो उत्तराखंड का नंदा देवी और वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए. हिमालय की ऊंचाइयों में नंदा देवी नेशनल पार्क बर्फ से ढकी चोटियों और बहुत खूबसूरत प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है. वहीं, वैली ऑफ फ्लावर्स गर्मियों के मौसम में रंग-बिरंगे अल्पाइन फूलों से सज जाती है. इस जगह का माहौल किसी पोस्टकार्ड जैसा लगता है. ट्रेकिंग, फोटोग्राफी और प्रकृति के करीब समय बिताने वालों के लिए इससे बेहतर जगह शायद ही कोई हो. यहां के मुश्किल पहाड़ी रास्ते ही आपकी जर्नी को थ्रिल से भर देते हैं.
पश्चिमी घाट
पश्चिमी घाट भारत की पश्चिमी तटरेखा के समानांतर फैली एक विशाल पर्वत श्रृंखला है. करीब 1,600 किलोमीटर तक फैली इस जगह में जंगल, पहाड़, झरने और अनोखी जैव विविधता देखने को मिलती है. साल 2012 में पश्चिमी घाट को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिला. खास बात ये है कि, यहां कई ऐसे पौधे और जीव पाए जाते हैं, जो दुनिया के दूसरे हिस्सों में आसानी से नहीं मिलते. अगर आपको नेचर ट्रैवल पसंद है और आप शहरों की भीड़ से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो पश्चिमी घाट आपके लिए एक शानदार ऑप्शन हो सकता है.
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काजीरंगा नेशनल पार्क, असम
असम का काजीरंगा नेशनल पार्क वाइल्डलाइफ लवर्स के लिए किसी ड्रीम डेस्टिनेशन से कम नहीं है. ये खास तौर पर एक सींग वाले भारतीय गैंडे के लिए दुनिया भर में मशहूर है. करीब 430 वर्ग किलोमीटर में फैले इस नेशनल पार्क में घास के मैदान, दलदली क्षेत्र और जंगल का बेहतरीन कॉम्बिनेशन देखने को मिलता है. यहां राइनो के अलावा कई और जंगली जानवर और पक्षी भी पाए जाते हैं. साल 1985 में काजीरंगा नेशनल पार्क को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया गया था. सफारी के दौरान खुले जंगल में जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक माहौल में देखना आपकी इस जर्नी का सबसे रोमांचक हिस्सा हो सकता है.
राजस्थान के हिल फोर्ट्स
राजस्थान के किले देखकर ऐसा लगता है जैसे इतिहास किसी फिल्म के सेट से निकलकर सामने आ गया हो. यही वजह है कि यूनेस्को की इस लिस्ट में राजस्थान के 6 शानदार किले भी शामिल हैं. इनमें चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ और आमेर जैसे मशहूर किले हैं. इन किलों को राजपूत शासकों ने 8वीं से 18वीं सदी के बीच बनवाया था. इनकी सबसे खास बात ये है कि इन्हें प्राकृतिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया था. किलों के अंदर सिर्फ महल ही नहीं, बल्कि मंदिर, जलाशय और कभी-कभी पूरी शाही बस्तियां तक मौजूद थीं. अगर आपको राजघरानों की कहानियां, वास्तुकला और इतिहास पसंद है, तो राजस्थान के ये किले आपको बिल्कुल निराश नहीं करेंगे.
खजुराहो, मध्य प्रदेश
खजुराहो का नाम सुनते ही इसकी खूबसूरत और बारीक पत्थर की नक्काशी याद आती है. मध्य प्रदेश में ये स्मारक ग्रुप हिंदू और जैन मंदिरों का शानदार संग्रह है. इन मंदिरों का निर्माण चंदेल राजवंश ने करीब 950 से 1050 ईस्वी के बीच कराया था. यहां की वास्तुकला नागर शैली से प्रभावित है और दीवारों पर बनी मूर्तियां उस दौर के लोगों की जिंदगी, कला और संस्कृति की झलक देती हैं. साल 1986 में खजुराहो को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिला. यहां घूमते हुए सिर्फ फेमस मूर्तियों पर ध्यान देने के बजाय मंदिरों की पूरी वास्तुकला और नक्काशी को देखना ज्यादा दिलचस्प होगा.

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अजंता और एलोरा की गुफाएं, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की अजंता और एलोरा गुफाएं भारत की प्राचीन कला और वास्तुकला का शानदार उदाहरण हैं. ये दोनों गुफाएं एक-दूसरे से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर हैं. अजंता में 29 चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं हैं, जिनमें बौद्ध मठ और कला की खूबसूरत दुनिया देखने को मिलती है. दूसरी तरफ एलोरा में 34 गुफाएं हैं, जिनमें बौद्ध, हिंदू और जैन परंपराओं से जुड़ी संरचनाएं मौजूद हैं. इन गुफाओं को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सदियों पहले कलाकारों और कारीगरों ने किस तरह पहाड़ों को काटकर इतनी शानदार संरचनाएं तैयार की होंगी. वैसे, साल 1983 में अजंता और एलोरा को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया गया था.
ट्रेवल बकेट लिस्ट बनाने की बारी
भारत की खूबसूरती सिर्फ उसकी प्राकृतिक विविधता में नहीं, बल्कि उसकी हजारों साल पुरानी विरासत में भी छिपी है. सारनाथ की आध्यात्मिक शांति से लेकर ताजमहल की मोहब्बत, कोणार्क की वास्तुकला, सुंदरबन की जंगली दुनिया और राजस्थान के शाही किलों तक, हर जगह की अपनी अलग कहानी है. इन जगहों की सबसे अच्छी बात ये है कि यहां घूमना सिर्फ एक ट्रिप नहीं रहती. आप एक जगह से दूसरी जगह जाते हुए भारत के अलग-अलग दौर, संस्कृतियों और परंपराओं से मिलते हैं. इसलिए अगली बार छुट्टियों की प्लानिंग करते हुए सिर्फ कहां घूमना है, मत सोचिए. ये भी सोचिए कि कौन सी कहानी आपका इंतजार कर रही है. वैसे, आपकी यूनेस्को ट्रेवल बकेट लिस्ट में सबसे पहले कौन-सी जगह होगी?
