Cyber Fraud: साइबर अपराधियों ने अब ठगी के लिए देश की सर्वोच्च कानूनी व्यवस्था का सहारा लेना शुरू कर दिया है. आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का नाम लेकर एक महिला से 1.43 करोड़ की भारी भरकम राशि ठग ली गई. मछलीपट्टनम के पारसपेट की रहने वाली पीड़िता वी. अलीवेलु मंगम्मा ने बताया कि दिल्ली पुलिस के फर्जी अधिकारी बनकर आए ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक झूठे मामले में फंसाया. डराने और धमकाने के लिए ठगों ने हदें पार करते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने खुद उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया है. देश के सर्वोच्च न्यायाधीश का नाम सामने आने के कारण पीड़िता बुरी तरह डर गईं और उन्होंने जालसाजों के खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए.
आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज, जांच शुरू
कृष्णा जिले के एसपी विद्या सागर नायडू ने पुष्टि की है कि यह एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम है. मुख्य न्यायाधीश के नाम पर डराकर की गई इस बड़ी ठगी के खिलाफ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने दावा किया कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गोयल नाम के एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है और जांच के दौरान उनके नाम पर एक बैंक अकाउंट का पता चला है. उन्होंने बताया कि उस अकाउंट से संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हुआ है और इस सिलसिले में उन्हें 24 घंटे के भीतर चीफ़ जस्टिस के सामने पेश किया जाएगा. राहुल गुप्ता और निशा पटेल के तौर पर अपनी पहचान बताने वाले दो लोगों ने जांच अधिकारी होने का दावा किया और उनसे अपनी सभी संपत्तियों व बैंक अकाउंट्स की जानकारी देने को कहा.
रुपये न देने पर संपत्तियां जब्त करने की धमकी
उन्होंने पीड़िता से फ़ोरेंसिक जांच के लिए अपने अकाउंट्स का पैसा ट्रांसफर करने को कहा और भरोसा दिलाया कि शक दूर होने के बाद तीन दिनों के भीतर पैसा वापस कर दिया जाएगा. उनकी बातों पर भरोसा करते हुए पीड़िता मंगम्मा ने मछलीपट्टनम के एक बैंक में अपनी फ़िक्स्ड डिपॉज़िट्स (FD) रद्द कर दीं और अकाउंट में RTGS के ज़रिए 1.05 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए. पीड़िता ने आरोप लगाया कि बाद में उन्होंने RTGS के ज़रिए लगभग 39 लाख रुपये और ट्रांसफर किए. पीड़िता के अनुसार, धोखाधड़ी करने वालों ने जुलाई भर उनसे संपर्क नहीं किया, लेकिन 29 जुलाई को फिर से कॉल करके दावा किया कि उन्होंने बताई गई पूरी रकम ट्रांसफर नहीं की है. उन्होंने धमकी दी कि अगर उन्होंने 95 लाख रुपये और ट्रांसफर नहीं किए तो उनकी सभी संपत्तियां ज़ब्त कर ली जाएंगी.
स्वयंसेवी संस्था ने की मदद
मंगम्मा ने आरोप लगाया कि पटेल ने उन्हें अपनी संपत्ति गिरवी रखने, सोना-चांदी गिरवी रखने या रिश्तेदारों और दोस्तों से पैसे उधार लेने की सलाह दी. उन्हें तुरंत 20 लाख रुपये, अगले दो दिनों में 22 लाख रुपये और महीने के आखिर तक बाकी बचे 53 लाख रुपये ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि जब उनसे पैसे उधार लेने के लिए कहा गया तो उन्हें शक हुआ, जबकि पहले उन्हें बताया गया था कि उनके बैंक अकाउंट्स में मौजूद पैसा कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है. उन्होंने तुरंत अमेरिका में रह रहे अपने बेटे को जानकारी दी और उसकी सलाह पर एक स्वयंसेवी संस्था के सदस्यों की मदद से पुलिस से संपर्क किया.
WhatsApp और IMO ऐप के जरिए की बातचीत
पीड़ित ने आरोप लगाया कि धोखाधड़ी करने वालों ने WhatsApp और IMO ऐप के ज़रिए बातचीत की, जिसमें स्क्रीन पर ED सर्विलांस रूम और राहुल गुप्ता नाम दिखाई दे रहा था, हालांकि बातचीत के दौरान कॉल करने वालों ने कभी अपना वीडियो चालू नहीं किया. पीड़िता ने बताया कि धोखाधड़ी करने वालों ने उन्हें किसी को भी न बताने की चेतावनी दी थी. कहा था कि अगर उन्होंने यह बात किसी को बताई, तो आरोपी के साथी उनके बेटे का पता लगाकर उसे मार डालेंगे.
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News Source: PTI
