Home Top News यशवंत वर्मा : SIT- CBI जांच और FIR की मांग वाली याचिका पर HC सख्त, कहा- वाइल्ड विच हंट

यशवंत वर्मा : SIT- CBI जांच और FIR की मांग वाली याचिका पर HC सख्त, कहा- वाइल्ड विच हंट

by Sachin Kumar 21 September 2026, 3:09 PM IST (Updated 24 September 2026, 12:45 PM IST)
21 September 2026, 3:09 PM IST (Updated 24 September 2026, 12:45 PM IST)
Delhi HC refuses plea FIR against Justice Varma

Yashwant Verma Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को पूर्व जज यशवंत वर्मा के मामले में FIR दर्ज करने और CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद भारी मात्रा में नकदी मिलने की घटना की CBI से जांच कराने और FIR दर्ज करने की मांग की गई थी. कोर्ट ने याचिका को ‘बेबुनियाद और परेशान करने वाली कोशिश’ बताते हुए खारिज कर दिया. जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि याचिकाकर्ता घनश्याम उपाध्याय के पास कानून के तहत अन्य विकल्प भी मौजूद हैं.

ये है पूरा मामला

दूसरी ओर जब कोर्ट से याचिका खारिज करने का संकेत मिला तो याचिकाकर्ता ने कानून के तहत दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए याचिका वापस ले ली. इससे पहले याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसको अगस्त में खारिज कर दिया गया था. भारी मात्रा में कैश मिलने का मामला तब सामने आया जब 14 मार्च, 2025 को होली की रात करीब 11:35 बजे यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित घर में आग लग गई थी. यहां पर भारी मात्रा में कैश मिलने का मामला सामने आया था.

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मैं याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहा हूं

दिल्ली उच्च न्यायालय के जज ने कहा कि मैं इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहा हूं. यह बेबुनियाद और परेशान करने की कोशिश है. उन्होंने पूछा कि क्या आपके पास करने के लिए कोई बेहतर काम नहीं है? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिकार पर सवाल उठाया और पूछा कि उन्होंने FIR के लिए ट्रायल कोर्ट का रुख क्यों किया? इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि यह घटना असाधारण थी और निचली अदालत इस मामले में न्याय नहीं कर सकती. उन्होंने आगे कहा कि यह मामला पूर्व जज यशवंत वर्मा से जुड़ा है. कोई भी व्यक्ति आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई शुरू करवा सकता है. इस पर कोई रोक नहीं है.

इलाहाबाद HC कर दिया गया था ट्रांसफर

कैश मिलने के बाद ही विवाद शुरू हो गया. इसके बाद यशवंत वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया गया. वहीं, महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रहे यशवंत वर्मा ने इस साल 9 अप्रैल का इस्तीफा दे दिया. जज ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंप दिया था. दूसरी ओर जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा द्वारा शुरू की गई दुर्लभ हटाने की कार्यवाही उनके इस्तीफे के बाद बेअसर हो गई. बता दें कि जज साहब 5 जनवरी, 2031 को रिटायर होने वाले थे.

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