Home राष्ट्रीय सम्‍मेलन में बोले पीएम मोदी- कृषि में मजबूत हो रहा देश, अब किसानों का जीवन संवारने पर होगा जोर

सम्‍मेलन में बोले पीएम मोदी- कृषि में मजबूत हो रहा देश, अब किसानों का जीवन संवारने पर होगा जोर

by Arsla Khan 3 August 2024, 12:58 PM IST (Updated 21 August 2025, 11:12 AM IST)
3 August 2024, 12:58 PM IST (Updated 21 August 2025, 11:12 AM IST)
सम्‍मेलन में बोले पीएम मोदी बोले- कृषि में मजबूत हो रहा देश, अब किसानों का जीवन संवारने पर होगा जोर

PM Narendra Modi on ICAE : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत एक खाद्य अधिशेष देश बन गया है और वैश्विक खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए समाधान प्रदान करने के लिए काम कर रहा है.

03 August, 2024

PM Narendra Modi : कृषि अर्थशास्त्रियों के 32वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ICAE) का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2024-25 टिकाऊ कृषि पर केंद्रित है. उन्होंने कहा कि पिछली बार जब सम्मेलन यहां आयोजित किया गया था, उस वक्त भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त की थी. यह देश की कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय था. उन्होंने कहा कि भारत एक खाद्य पर आधारित देश है, साथ ही उन्होंने कहा कि देश दुनिया में दूध, दालों और मसालों का नंबर एक उत्पादक है. उन्होंने कहा कि देश खाद्यान्न, फल, सब्जियां, कपास, चीनी और चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है.

2 से 7 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा सम्मेलन

यहां पर बता दें कि इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिस्ट्स (International Association of Agricultural Economists) द्वारा आयोजित त्रिवार्षिक सम्मेलन 7 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है. इस साल के सम्मेलन का विषय ‘सतत कृषि-खाद्य प्रणालियों की ओर परिवर्तन’ है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने पिछले 10 सालों में फसलों की 1,900 नई जलवायु-लचीली किस्में प्रदान की हैं.

कृषि चुनौतियों के प्रति भारत को उजागर करेगा यह सम्मेलन

सम्मेलन वैश्विक कृषि चुनौतियों के प्रति भारत के सक्रिय दृष्टिकोण को उजागर करेगा और कृषि अनुसंधान और नीति में देश की प्रगति को प्रदर्शित करेगा. यह आयोजन युवा शोधकर्ताओं और अग्रणी पेशेवरों को वैश्विक साथियों के साथ अपने काम और नेटवर्क को प्रस्तुत करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा. इसका उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी को मजबूत करना, राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर नीति निर्माण को प्रभावित करना और डिजिटल कृषि और टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों में प्रगति सहित भारत की कृषि प्रगति को प्रदर्शित करना है.

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