Reservation Hatao Andolan: जंतर मंतर पर शुक्रवार से ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ शुरू हो गया है, जिसका आज दूसरा दिन है. हालांकि पुलिस ने इस प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं है, इसके बावजूद लोग वहां इकट्ठा हो रहे हैं. कल पूरे दिन के प्रदर्शन के बाद रात को हंगामा होने लगा, जब पुलिस ने एक्शन लेना शुरू किया. रात को पुलिस ने इकट्ठा हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि भारी भीड़ को देखते हुए प्रदर्शन स्थल के अंदर और आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
अलग जगह प्रदर्शन की अनुमति मिली
तस्वीरों में दिख रहा है कि पुलिसवाले प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रहे हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लेकर साइट पर जमा हुए थे और जाति-आधारित रिजर्वेशन के खिलाफ नारे लगा रहे थे. पुलिस ने प्रदर्शन से पहले पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की और जंतर-मंतर की ओर लोगों की आवाजाही को रेगुलेट करने के लिए बैरिकेड लगा दिए. दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर किसी भी विरोध, जुलूस, प्रदर्शन या सभा के लिए कोई इजाजत नहीं दी गई थी. हालांकि, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट DCP के ऑफिस से मिली ऑफिशियल जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को एक अलग जगह- रामलीला ग्राउंड पर “रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन” के बैनर तले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया गया था.
सोशल मीडिया से चल रहा आंदोलन
NOC ने शाम 4 बजे तक रामलीला ग्राउंड में ज़्यादा से ज़्यादा 500 लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत दी, पुलिस ने कहा कि लॉ एंड ऑर्डर के नजरिए से उसे रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन पर “कोई आपत्ति” नहीं है. विरोध अभियान को “रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन” नाम के एक इंस्टाग्राम पेज ने लीड किया, जिसने बाद में लोगों से 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की. इस पेज के इंस्टाग्राम पर 5.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं. प्रदर्शन के लिए प्रदर्शनकारियों को सोशल मीडिया के जरिए इकट्ठा किया गया था, जिसमें मांग की गई थी कि सरकारी मदद और रिजर्वेशन के लिए पात्रता तय करने में जाति के बजाय आर्थिक आधार को प्राथमिकता दी जाए.
प्रदर्शनकारियों की मांग
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमारी मांग है कि यह तय करते समय कि किसे सरकारी मदद की जरूरत है, उसकी आर्थिक हालत पर ध्यान दिया जाना चाहिए. एक गरीब व्यक्ति, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो, उसे पढ़ाई, कोचिंग और दूसरी जरूरतों के लिए मदद दी जानी चाहिए.” एक अन्य प्रदर्शनकारी ने मौजूदा रिजर्वेशन सिस्टम का रिव्यू करने की मांग करते हुए कहा कि इसका फायदा हमेशा सबसे पिछड़े तबके तक नहीं पहुंचता. उन्होंने कहा, “हम कई सालों से यह मुद्दा उठा रहे हैं. हमारा कहना है कि सरकार को यह देखना चाहिए कि क्या मौजूदा सिस्टम अपना मकसद पूरा कर रहा है और क्या इसका फायदा जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच रहा है.”
कुछ प्रदर्शनकारियों ने रिजर्वेशन में क्रीमी-लेयर मानदंड लाने की भी मांग की और शेड्यूल्ड कास्ट, शेड्यूल्ड ट्राइब्स और अन्य पिछड़े वर्गों से जुड़ी पॉलिसी में बदलाव की मांग की. एक अन्य ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बिना मदद के छोड़ दिया जाना चाहिए. हम यह कह रहे हैं कि मदद उन लोगों को टारगेट कर की जानी चाहिए जिन्हें इसकी जरूरत है, जिसमें स्कॉलरशिप, फीस सपोर्ट और कोचिंग शामिल हैं.”
News Source: PTI
