Imran Khan : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान करीब तीन साल से जेल में बंद हैं. अभी तक उन्हें अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है. हालांकि, समय-समय पर उनकी तबीयत खराब होने की खबरें सामने आती रहती हैं. उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) लंबे समय से उनके बेहतर इलाज की मांग करती रही है. इसके अलावा वह इमरान खान को अस्पताल में भर्ती कराकर उचित उपचार उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आवाज उठाते रहे हैं. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहबाज शरीफ सरकार ने इमरान खान को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल जरूर पहुंचाया, लेकिन कुछ चिकित्सकीय परीक्षणों के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच वापस जेल भेज दिया गया. अब इसको लेकर PTI ने सरकार की कड़ी आलोचना की है. PTI का आरोप है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री को अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराने का निर्देश दिया गया था. साथ ही पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर इमरान खान को जेल से रिहा नहीं किया गया तो वह देशभर में विरोध प्रदर्शन करेगी.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को आदेश दिया था कि 73 वर्षीय PTI संस्थापक इमरान खान को मेडिकल देखभाल के लिए रावलपिंडी की अदियाला जेल से निजी अस्पताल शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में स्थानांतरित किया जाए. उन्हें 16 सितंबर तक वहां भर्ती रखा जाए. इसके बजाय गुरुवार रात इमरान खान को इस्लामाबाद के सरकारी अस्पताल पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया. वहां शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल के डॉक्टर भी मौजूद थे. मेडिकल जांच और आवश्यक परीक्षणों के बाद उन्हें दोबारा कड़ी सुरक्षा के बीच अदियाला जेल वापस ले जाया गया. इस घटनाक्रम के बाद PTI और सरकार के बीच टकराव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है.

सेहत को लेकर गुमराह किया जा रहा
PIMS में मेडिकल जांच के बाद इमरान खान को वापस अदियाला जेल भेज दिया गया. पार्टी ने धमकी दी है कि अगर इमरान जेल में ही रहते हैं, तो वे 26 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर ‘लॉन्ग मार्च’ करेंगे. वे कोर्ट के आदेशानुसार मेडिकल इलाज और उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं. शुक्रवार को इस्लामाबाद में मीडिया से बात करते हुए खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने कहा कि पार्टी अपने आंदोलन को और तेज करेगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए, अफरीदी ने कहा कि पार्टी की कानूनी टीम कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी. उन्होंने चेतावनी दी कि इस स्थिति से न्यायपालिका और कानून के शासन में जनता का भरोसा कम हो सकता है. उन्होंने कहा कि इमरान खान ने उन्हें पार्टी के आंदोलन को तेज करने का निर्देश दिया था और यह अभियान अब तेजी से आगे बढ़ेगा. अफरीदी ने दावा किया कि सरकार और सत्ता प्रतिष्ठान ऐसा दिखा रहे हैं जैसे वे संविधान और कानून से ऊपर हैं और उन्हें अदालती आदेशों का कोई डर नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं कल हंगू और उसके अगले दिन बुनेर जाऊंगा. इसके बाद पूरे पाकिस्तान का दौरा करूंगा. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री की सेहत को लेकर न्यायपालिका और जनता को गुमराह किया जा रहा है.

जेल में बंद इमरान खान की सेहत बिगड़ी, बेटे की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बचाने की मार्मिक अपील
इमरान के साथ की गई क्रूरता
इसी बीच इमरान खान की बहन उजमा खान ने भी इस्लामाबाद में उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान के साथ एक अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने गुरुवार रात जेल में अपनी मुलाकात और PIMS में हुई घटनाओं के बारे में जानकारी दी. अडियाला जेल पहुंचने के बाद उजमा ने बताया कि उन्हें PIMS ले जाया गया और एक ऑफिस में बैठने के लिए कहा गया. इसके बाद उन्हें अपने भाई से मिलने के लिए दूसरे कमरे में ले जाया गया. उनके भाई ने पूछा कि उन्हें शिफा के बजाय PIMS क्यों लाया गया. उजमा ने कहा कि इमरान ने मुझसे पूछा कि क्या हो रहा है और मैंने उन्हें बताया कि उनकी जांच करवाने के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया जाएगा. उन्होंने बताया कि खान ने उनसे PIMS में उनके साथ रहने के लिए कहा. साथ ही वह उनसे बस एक ही बात कहते रहे कि उनके साथ क्रूरता की गई है. उन्होंने कहा कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि उनसे मिलने आए एक डॉक्टर ने निष्कर्ष निकाला था कि किसी भी इंसान से संपर्क न होने के कारण उनकी सेहत बिगड़ गई है. इमरान कहा कि पिछले 10 महीनों से उन्हें पढ़ने के लिए कोई सामग्री या टेलीविजन नहीं दिया जा रहा है. खान की बात का हवाला देते हुए उजमा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने जेल के डॉक्टरों से अपनी सेहत के बारे में शिकायत की, तो जेल में किसी ने उनकी बात नहीं सुनी.

मानसिक प्रताड़ना से गंभीर एंग्जायटी हुई
उजमा ने आगे बताया कि 10 अगस्त को एक डॉक्टर ने उनकी जांच की और पाया कि अकेले कैद में रखे जाने के कारण मानसिक प्रताड़ना से उन्हें गंभीर एंग्जायटी हो गई है. इसी वजह से उनका ब्लड प्रेशर बढ़ रहा था. उन्होंने यह भी बताया कि बुशरा बीबी (खान की पत्नी) को भी अकेले कैद में रखा जा रहा था. वे बार-बार कह रहे थे कि उनके साथ क्रूरता की जा रही है. उजमा ने बताया कि खान ने हिरासत में अपने साथ हो रहे बर्ताव की तुलना मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी के साथ हुए बर्ताव से की, जिनकी 2019 में अचानक मौत हो गई थी. कहा जाता है कि उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई थी. उन्होंने कहा कि इमरान ने कहा कि मोर्सी को भी इसी तरह मारा गया था. अकेले कैद में रखकर उन्हें प्रताड़ित किया गया था. खान ने अपनी बहन को यह भी बताया कि उन्हें दो दिनों के लिए अखबार और टेलीविजन की सुविधा दी गई थी, लेकिन बाद में ये सुविधाएं वापस ले ली गईं. उन्होंने आगे बताया कि खान ने उनसे कहा था कि डॉक्टर ने समझाया है कि लोगों से बातचीत न हो पाने के कारण ही उन्हें हाइपरटेंशन की समस्या हुई है.
इमरान की हो रही है सोचने की क्षमता कम
उजमा ने यह भी बताया कि जांच के बाद उन्हें शिफा अस्पताल ले जाने के बजाय वापस अदियाला जेल ले जाया गया. डॉ फैसल सुल्तान ने बताया कि उन्हें शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया, जबकि उजमा खान को PIMS ले जाया गया. उन्होंने कहा कि जब फज्र का समय हो रहा था, तो मुझे बताया गया कि शायद इमरान खान नहीं आ रहे हैं और मुझे चले जाना चाहिए. वहीं, सरकार ने बताया कि शुक्रवार की सुबह पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) में मेडिकल जांच के बाद रावलपिंडी की अदियाला जेल वापस भेज दिया गया. इससे पहले दिन में खान के अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रवक्ता ज़ुल्फी बुखारी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक को निजी शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को आदेश दिया था कि 73 वर्षीय खान को दो दिनों के भीतर अस्पताल ले जाया जाए. यह आदेश उनके बारे में सौंपी गई एक मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि वे ‘लेवल थ्री प्लस’ एंग्जायटी से पीड़ित हैं. लेवल थ्री प्लस एंग्जायटी का मतलब है बहुत ज़्यादा या गंभीर चिंता, जिसमें चिंता के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं. साथ ही साफ-साफ सोचने की क्षमता बाधित होती है.

इमरान खान की सेहत पर सियासी घमासान: इलाज पर गहराया सस्पेंस, कोर्ट के फैसले पर टिकीं नजरें
PTI कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया
वहीं, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने खान को शिफा अस्पताल न ले जा पाने के लिए PTI कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मंत्री ने कहा कि अल-शिफा अस्पताल के रास्ते में और अस्पताल के बाहर PTI कार्यकर्ताओं द्वारा पैदा की गई सुरक्षा स्थिति को देखते हुए खान को PIMS ले जाया गया और वह मेडिकल जांच में स्वस्थ पाए गए. उन्होंने कहा कि PIMS अस्पताल में मेडिकल जांच की गई, जहां अल-शिफ़ा अस्पताल के डॉक्टर भी मौजूद थे. तरार ने कहा कि सरकार खान को मेडिकल मदद देती रहेगी. मंत्री ने कहा कि खान को पहले भी मेडिकल सुविधाएं दी गई हैं और आगे भी जब उन्हें जरूरत होगी तो सुविधाएं दे दी जाएंगी. इससे पहले एक पोस्ट में तरार ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कैदी को 20 और 21 अगस्त की रात को कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल ले जाया गया. हालांकि, उन्होंने उस पोस्ट में न तो खान का नाम लिया और न ही शिफा इंटरनेशनल अस्पताल का. तरार ने कहा था कि योग्य डॉक्टरों की एक टीम ने विस्तृत जांच की और उन्हें मेडिकल रूप से फिट घोषित किया.
बता दें कि मंत्री ने पद से हटाए गए प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना कहा कि पूरी मेडिकल प्रक्रिया के बाद उन्हें सुबह लगभग 5 बजे वापस अदियाला जेल भेज दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा था कि 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक शिफा अस्पताल में ही रहना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने खान को अस्पताल में रहने के दौरान अपने परिवार से हफ्ते में एक बार मिलने की इजाज़त भी दी. सरकार ने बुधवार को कोर्ट में एक याचिका दायर करके अपने आदेश की समीक्षा और उसे वापस लेने की मांग की. हालांकि, गुरुवार को कोर्ट के रजिस्ट्रार ऑफिस ने कागज़ात अधूरे होने का हवाला देते हुए याचिका वापस कर दी. सरकार ने बुधवार को कोर्ट में एक याचिका दायर करके अपने आदेश की समीक्षा और उसे वापस लेने की मांग की.
‘गंभीर चिंता और तनाव में हैं इमरान खान’, अस्पताल में घंटों चला इलाज, फिर भेजा गया जेल
