SC Slams Delhi Police: सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और कोर्ट की अवमानना के मामले पर सुनवाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सीजेपी प्रदर्शन को रोकने के लिए की गई दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के लिए उसे फटकार लगाई है. कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो पर पूर्ण प्रतिबंध न लगाने के आदेश की अवमानना करने पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. कोर्ट ने मेट्रो को चालू रखने और इंटरनेट सेवा बहाल करने का आदेश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 19(2) का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को मेट्रो का कामकाज नियमित रूप से जारी रखने का आदेश दिया है. कोर्ट ने पुलिस से बैरिकेड्स हटाने का निर्देश दिया है. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट सेवाएं बहाल करने का भी आदेश दिया. यह कहा गया कि शांतिपूर्ण विरोध लोगों का मौलिक अधिकार है, वे बिना हथियार के और कानून का उल्लंघन किए बिना विरोध कर सकते हैं.
पुलिस को कारण बताओ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर के आदेश का उल्लंघन करने के आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ (show-cause notice) जारी किया है. कोर्ट ने पूछा कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति जताई. इसके जवाब में जस्टिस बागची ने कहा कि ‘कारण बताओ नोटिस’ और ‘अवमानना नोटिस’ के बीच अंतर होता है. कोर्ट ने अवमानना याचिकाओं और अवैध हिरासत के संबंध में सभी अधिकारियों से जवाब भी मांगा है.
अपने पिछले आदेश का हवाला देते हुए, कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों से 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा गया था. उन्हें संशोधित फैसले का व्यापक प्रचार-प्रसार करने, ट्रैफिक आवाजाही के संबंध में नई एडवाइजरी जारी करने और मंगलवार तक अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) सौंपने का निर्देश भी दिया गया था. अब अधिकारियों को एक हलफनामा दाखिल करना होगा जिसमें यह बताना होगा कि अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए.
कोर्ट ने धारा 163 के संबंध में जानकारी मांगी
सुप्रीम कोर्ट में वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि कोर्ट परिसर के बाहर धारा 163 लागू करने की घोषणा करने वाला एक बोर्ड लगाया गया है और वकीलों को अंदर जाने से रोका जा रहा है. एक वकील ने यह भी कहा कि किसी भी विरोध प्रदर्शन में भाग न लेने के बावजूद उन्हें प्रवेश से वंचित कर दिया गया. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट धारा 163 के तहत घोषित क्षेत्र में आता है और वह इस मामले पर जानकारी जुटाने के बाद जवाब देंगे. जस्टिस बागची ने कहा कि हालांकि कोर्ट चिंताओं को बढ़ाना नहीं चाहता है, लेकिन संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों के आसपास धारा 163 लागू करने और इसके वास्तविक कार्यान्वयन के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है. कोर्ट ने कहा हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि वे प्रतिबंध हटा लें, ताकि सुप्रीम कोर्ट में आने-जाने और न्याय तक पहुंचने को लेकर कोई आशंका न रहे.
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News Source: ANI
