Home Top News कहां से शुरू हुआ राम मंदिर निर्माण का आंदोलन? सबसे ज्यादा सक्रिय दिखा VHP; जानें पूरा इतिहास

कहां से शुरू हुआ राम मंदिर निर्माण का आंदोलन? सबसे ज्यादा सक्रिय दिखा VHP; जानें पूरा इतिहास

by Sachin Kumar 29 June 2026, 9:51 PM IST
29 June 2026, 9:51 PM IST
Where movement construction Ram Mandir

Ram Mandir : राम मंदिर को भव्य तरीके से 22 जनवरी 2024 को उद्घाटन किया गया था. इस दौरान भारत की तमाम विभूतियों को न्यौता दिया गया और जाने-माने कलाकार भी अयोध्या पहुंचे थे. जब मंदिर में राम लला की पूजा की जा रही थी उस वक्त मंदिर बनवाने में जिन लोगों ने किया संघर्ष किया, उनकी आंखों में आंसू आ गए थे. उन्होंने उस वक्त कहा था कि 500 सालों बाद राम लला टैंट से निकलकर अपने भव्य महल में विराजमान हो गए हैं और इसके लिए बहुत से लोगों ने कुर्बानी दी. साथ ही मंदिर आंदोलन के दौरान कई हिंदू संगठनों के लोगों ने इसके लिए आंदोलन भी किया था और यात्राएं भी की. इसी बीच आज हम ऐसे ही एक संगठन विश्व हिंदू परिषद की भूमिका के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं, जिनकी मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका थी. वीएचपी ने ही पहली बार इस आंदोलन को आस्था के साथ-साथ सामाजिक और प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाकर देश भर से लाखों लोगों को जोड़ दिया था.

हिंदू पक्ष का संघर्ष हुआ सफल

5 अगस्त, 2020 को राम मंदिर की आधारशिला रखी गई. इसके साथ ही कई सालों से चला आ रहा आंदोलन भी अपने परिणाम तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 को दिए फैसले में विवादित जमीन को भगवान राम का जन्मस्थान घोषित कर दिया और हिंदू पक्ष का संघर्ष सफल हो गया. वहीं, अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास समारोह में विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर सबका ध्यान खींचा है. VHP रामजन्मभूमि आंदोलन के शुरुआती समर्थकों में से एक रहा है और इसने जनमत तैयार करने के साथ इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई का नेतृत्व करने में अहम भूमिका निभाई थी. अतीत में 76 संघर्ष हुए. इस दौरान चार लाख से अधिक लोगों का बलिदान हुआ. 22 दिसम्बर 1949 को राम जन्मस्थान पर मध्य के गुम्बद में श्रीराम लला-मूर्ति का प्राकट्य हो गया. तब से वहां पर रामलला का दर्शन पूजन निरन्तर होता रहा.

Where movement construction Ram Mandir

1949 से आंदोलन का आगाज

1885 में पहली बार फैजाबाद की एक अदालत में महंत रघुबीर दास की तरफ से मस्जिद के खिलाफ मुकादम दर्ज कर दिया और इसके साथ ही कानूनी लड़ाई का भी आगाज शुरू हो गया. हालांकि, राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत हकीकत में 1949 से हुई थी. आजादी के समय विवादित एरिया के गेट पर ताला लगाया गया था. फिर 1949 में यहां से भगवान राम की मूर्तियां मिली और इसके बाद ही आंदोलन की मांग तेज होना शुरू हो गई. वहीं, केंद्र सरकार ने सख्त पहरा देते हुए मजबूत ताला लगा दिया और सभी के प्रवेश पर पूर्णतया रोक लगा दी. इसके बाद हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने मामला कोर्ट में दर्ज करा दिया. फिर, इसका फाइनल फैसला 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष में सुनाकर पूरे विवाद को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया.

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1984 बना निर्णायक साल

साल 1984 में विश्व हिन्दू परिषद ने दिल्ली में प्रथम धर्म संसद का आयोजन किया. इसी धर्म संसद में भारत के सन्तों ने श्रीराम जन्मस्थान को मुक्त कराकर वहां भव्य राम मन्दिर बनाने का आह्वान किया. इसके बाद इस साल ‘श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति’ का गठन किया और इसकी बैठक होती है और गोरक्ष पीठ के महंत अवैद्यनाथ को श्री राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का अध्यक्ष बना दिया गया. इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने राजनीतिक स्तर पर और विश्व हिंदू परिषद ने सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दा बनाकर इस आंदोलन की जिम्मेदारी उठाई. साथ ही 1984 में देश भर में राम जानकी रथ यात्राओं का आयोजन किया गया. हिंदू समाज के बढ़ते दबाव की वजह से 1 फरवरी, 1986 को मंदिर का ताला खोल दिया गया. इसके बाद वीएचपी ने इसके पास ही राम मंदिर की आधारशिला रख डाली.

Where movement construction Ram Mandir

1990-92 में चरम पर पहुंचा आंदोलन

राम मंदिर के आंदोलन के इतिहास में दो सबसे बड़ी घटनाओं में से एक 1990 और 1992 में घटी थीं. साल 1990 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने के लिए एक भव्य रथ यात्रा निकाली. इस यात्रा को 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचना था और इसके लिए देश भर से लाखों की संख्या में राम भक्तों को जुटाया गया. हालांकि, आडवाणी का रथ बिहार में रोक दिया गया था, लेकिन इस दौरान भारी संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंचने लगे थे. हालांकि, मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में वाली यूपी सरकार ने अयोध्या में घुसने से रोक दिया गया. शहर में कर्फ्यू था और भारी संख्या में पीएसी की तैनाती की गई थी. इसके बाद भी अशोक सिंघल, विनय कटियार और उमा भारती जैसे कद्दावर नेताओं के नेतृत्व देश के विभिन्न इलाकों से आए कारसेवक न केवल अयोध्या के पास जुटे बल्कि वह अंदर भी घुस गए और विवादित ढांचे की तरफ पहुंच गए.

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भगवा झंडा फहरा दिया

बताया जाता है कि इस दौरान कारसेवकों ने विवादित ढांचे पर कार सेवकों ने भगवा झंडा फहरा दिया और इसके बाद वहां अव्यवस्था फैल गई. वहीं, पीएसी ने सुरक्षा व्यवस्था को बनाने के लिए सेवकों को खदेड़ने शुरू कर दिया और इस दौरान गोलीबारी भी की गई, जिसमें कई कारसेवकों की मौत हो गई. इसके दो साल बाद 6 दिसंबर, 1992 को मंदिर निर्माण के लिए एक बार कार सेवा का आह्वान किया गया. इसके बाद हजारों की संख्या में बीजेपी, वीएचपी और बजरंग दल के नेतृत्व में कार सेवक फिर से विवादित एरिया वाली जगह पर इकट्ठा हो गई और खास बात यह थी कि राज्य में इस दौरान बीजेपी की सरकार थी. इसी बीच जब भारी संख्या में लोग इकट्ठा होने लगे तो कार सेवकों ने देखते ही देखते बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया.

Where movement construction Ram Mandir

अशोक सिंघल ने दिलाई VHP को पहचान

विश्व हिंदू परिषद (VHP) को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अशोक सिंघल की अहम भूमिका रही थी. देश और विदेश में मंदिर निर्माण के पक्ष में माहौल बनाने और आंदोलन को खड़ा करने में उनकी अहम भूमिका रही थी. साल 1981 में वीएचपी से जुड़ने वाले अशोक सिंघल के नेतृत्व में ही साल 1984 में दिल्ली में एक धर्म संसद आयोजित की गई थी और यही से वीएचपी ने राम मंदिर आंदोलन को तेज करने की तैयारी का ऐलान किया था. इसके अलावा साल 1989 में में विवादित स्थल के आसपास राम मंदिर निर्माण की आधारशिला भी सिंघल के नेतृत्व में कार्य किया गया. अपनी फायरब्रांड छवि की वजह से भक्तों और हिंदुओ वह काफी लोकप्रिय नेता थे. हालांकि, साल 2015 में उनका निधन हो गया और जिस राम मंदिर के लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया था. वह उसे पूरा होते हुए देख नहीं पाए. लेकिन उनका सपना जरूर साकार हो गया और इसी बीच वीएचपी ने उन्हें दिल से याद किया.

क्या रही वीएचपी की मुख्य भूमिका

आंदोलन की शुरुआत में वीएचपी ने पहली बार 1984 में पहली धर्म संसद का आयोजन किया. इसके बाद देश भर आए संतों ने इसी संसद में ऐलान किया कि वह राम मंदिर के आंदोलन के लिए संघर्ष तेज करेंगे. साथ ही ‘श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति’ का भी गठन किया गया. इसके अलावा 1989 में वीएचपी ने पूरे देश से करीब ढाई लाख गांवों से ‘पूजित शिलाएं’ और ईंटें अयोध्या में पहुंचाने का काम किया. करीब सवा छह करोड़ लोगों ने इस अभियान में हिस्सा लिया और यह देखते ही देखते एक विशाल जन-अभियान बन गया.

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वीएचपी ने जमीनी स्तर पर आंदोलन के साथ कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई के लिए भी तैयारी करना शुरू कर दिया. वीएचपी ने कोर्ट में केस लड़ने के लिए साक्ष्य जुटाने से लेकर देश के विभिन्न प्रधानमंत्रियों (वीपी सिंह, चंद्रशेखर और पीवी नरसिम्हा राव) के साथ बातचीत भी करना शुरू कर दिया. वीएचपी ने इस आंदोलन को केवल एक धार्मिक मुद्दा न रखकर राष्ट्रीय और सामाजिक अस्मिता का केंद्र बना दिया. इसके साथ ही उन्होंने आंदोलन में कई लाख लोगों को जोड़ दिया. इस आंदोलन को लगातार वीएचपी ने विस्तार देने का काम किया और वह कार सेवकों के साथ आक्रामक तरीके से इस मामले को आगे भी ले जाता रहा.

राम मंदिर ट्रस्ट से कैसे जुड़ी है वीएचपी?

राम मंदिर पर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ही भारत सरकार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट का गठन करने का आदेश दिया था. यह एक स्वायत्त ट्रस्ट है, जिसको राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन का अधिकार दिया गया है. हालांकि, वीएचपी को सीधे तौर पर नियंत्रित नहीं करती है. ट्रस्ट कानूनी रूप से स्वतंत्र संस्था है और इसके फैसले ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा लिए जाते हैं. हालांकि, वीएचपी से जुड़े व्यक्ति इस ट्रस्ट के सदस्य हैं. उदाहरण के लिए चंपत राय लंबे समय से वीएचपी से जुड़े रहे हैं और वह इस ट्रस्ट के महासचिव बनाए गए थे. इससे पता चलता है कि इस ट्रस्ट में वीएचपी का प्रतिनिधित्व हैं. लेकिन इसके बाद भी राम मंदिर ट्रस्ट वीएचपी का इकाई नहीं बन जाता है. वह एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम करता है. इसमें किसी भी संगठन के सदस्य को मेंबर बना दिया जाता है.

स्वप्न-संकल्प की सिद्धि

5 अगस्त 2020 को सदियों की स्वप्न-संकल्प की सिद्धि का वह अलौकिक क्षण आ गया था. जब पूज्य महन्त नृत्यगोपाल दास समेत देश भर की 36 विभिन्न आध्यात्मिक धाराओं के प्रतिनिधि पूज्य सन्तों के पावन सानिध्य में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन्दिर निर्माण का भूमि पूजन किया. इस दौरान देश की 3000 से अधिक पवित्र नदियों के जल तथा विभिन्न तीर्थों, जाति-जनजातियों के श्रद्धा-केन्द्रों, ऐतिहासिक-धार्मिक स्थलों तथा बलिदानी कारसेवकों के गृह-स्थानों से लाई गई पवित्र मिट्टी ने मानो संपूर्ण भारतवर्ष को ‘भूमि पूजन’ में उपस्थित कर दिया. भूमि पूजन समारोह में पूज्य संतों ने यह आह्वान किया कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने के साथ साथ ही जन-जन के हृदयों में भी राम मंदिर विकसित होना चाहिए.

राम मंदिर ट्रस्ट

कब हुई वीएचपी की स्थापना

विश्व हिंदू परिषद (VHP) की स्थापना 1964 में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई के पवई में स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम में हुई थी. इस संगठन को दुनिया भर के हिंदुओं को जाति, पंथ, संप्रदाय, भाषा और भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुट करने के नेक मकसद से बनाया गया था. VHP का लक्ष्य एक ऐसी मजबूत और समर्पित हिंदू शक्ति बनाना है जो मानवता के कल्याण के लिए काम करें. साथ ही संगठन के लोग अपनी प्राचीन परंपराओं, मूल्यों और आदर्शों पर गर्व करें और अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को बहाल करने के लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार रहे. बता दें कि 1966 में प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान, VHP ने पहला विश्व हिंदू सम्मेलन आयोजित किया था.

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