Home Top News 15 अगस्त से ईंधन निर्यात सस्ता: पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर घटा शुल्क

15 अगस्त से ईंधन निर्यात सस्ता: पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य, डीजल और ATF पर घटा शुल्क

by Sanjay Kumar Srivastava 15 August 2026, 4:14 PM IST (Updated 15 August 2026, 4:15 PM IST)
15 August 2026, 4:14 PM IST (Updated 15 August 2026, 4:15 PM IST)
15 अगस्त से सस्ता हुआ ईंधन निर्यात: पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी अब हुई शून्य, डीजल और विमान ईंधन पर घटा शुल्क

Windfall Tax: केंद्र सरकार ने 15 अगस्त से पेट्रोल, डीजल और ATF (विमानों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफ़ॉल टैक्स में कटौती की है. डीजल के एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज़ ड्यूटी (SAED) की दर अब 25.5 रुपये प्रति लीटर से घटकर 24 रुपये प्रति लीटर हो गई है. जबकि ATF के एक्सपोर्ट पर SAED को पहले के 22 रुपये प्रति लीटर के मुकाबले 19.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है. इसके अलावा पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी को शून्य (Nil) कर दिया गया है. इससे पहले 3 अगस्त को यह 3.5 रुपये प्रति लीटर थी. वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि ड्यूटी में ये बदलाव 15 अगस्त से लागू होंगे.

27 मार्च को डीजल और ATF पर लगाई थी ड्यूटी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीज़ल और ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी लगाई थी. 16 मई से पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर भी यह लेवी (शुल्क) लगाई गई थी. मंत्रालय ने यह भी कहा कि घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल और डीज़ल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए विंडफॉल टैक्स लगाया गया था. इसका मकसद एक्सपोर्टर्स को कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना भी था, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गई थीं. सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक अतिरिक्त टैक्स है. यह अक्सर तब होता है जब भू-राजनीतिक तनाव या माल की कीमत में वृद्धि जैसी वैश्विक घटनाओं से कुछ क्षेत्रों के लिए बहुत अधिक मुनाफा होता है.इसे अक्सर तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों पर लगाया जाता है.

आम जनता के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं होंगे कम

वित्त मंत्रालय का यह फैसला केवल ईंधन के एक्सपोर्ट (विदेशों में निर्यात करने) पर लगने वाले टैक्स (विंडफॉल टैक्स) से संबंधित है. इसका घरेलू बाजार की रिटेल कीमतों से कोई सीधा संबंध नहीं है.

घरेलू ड्यूटी में बदलाव नहीं: सरकार ने अधिसूचना में स्पष्ट रूप से कहा है कि घरेलू खपत के लिए देश के भीतर बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

केवल रिफाइनर्स को राहत: टैक्स की दरों में कटौती (जैसे पेट्रोल पर शून्य करना) केवल उन तेल कंपनियों (जैसे रिलायंस, न्यारा एनर्जी या IOCL) के लिए फायदेमंद है जो रिफाइंड ईंधन को विदेशों में बेचती हैं. अब उन्हें निर्यात करने पर कम टैक्स देना होगा, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन में सुधार होगा.

विंडफॉल टैक्स (SAED) लगाने का मूल मकसद

घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना: जब पश्चिम एशिया संकट (जैसे ईरान-अमेरिका युद्ध) की वजह से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं, तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार में तेल बेचने के बजाय विदेशी बाजारों में भारी मुनाफे पर एक्सपोर्ट करने लगी थीं.

एक्सपोर्ट पर लगाम: देश के भीतर ईंधन की किल्लत न हो, इसलिए सरकार ने निर्यात पर भारी टैक्स (विंडफॉल टैक्स) लगा दिया था, ताकि कंपनियां घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखें।

अब कटौती क्यों? वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में उतार-चढ़ाव (या आंशिक स्थिरता) के आकलन के बाद पाक्षिक समीक्षा के तहत सरकार ने इस टैक्स को कुछ कम या खत्म किया है.

आम जनता पर इसका क्या असर होगा?

दामों पर असर: देश के पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन के दाम वैसे ही तय होते रहेंगे जैसे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम और देश की सरकारी तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन तय करते हैं.

आपूर्ति में राहत: इस फैसले का एकमात्र परोक्ष फायदा यह हो सकता है कि घरेलू बाजार में ईंधन की कोई कमी नहीं होगी, क्योंकि सरकार इस टैक्स को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से नियंत्रित रखती है.

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News Source: PTI

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