Women Quota: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महिला आरक्षण पर की गई अपील को ‘ड्रामा’ करार दिया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का एकमात्र एजेंडा महिलाओं को आरक्षण देना नहीं, बल्कि खुद को बचाए रखना है. स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम मोदी ने विपक्षी दलों से महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़े बिल का समर्थन करने की अपील की थी. इस पर पलटवार करते हुए रमेश ने कहा कि उपदेश देने के बजाय सरकार को 2029 के चुनावों में लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर ही कोटा लागू करना चाहिए. उन्होंने 1993 के 73वें और 74वें संविधान संशोधन का हवाला दिया, जिसने स्थानीय निकायों में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया था. कांग्रेस ने मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिसीमन की शर्त रखकर आरक्षण में जानबूझकर देरी की जा रही है.
तुरंत लागू हो पहले से पारित महिला आरक्षण
रमेश ने PTI को बताया कि इसके लिए ज़मीनी काम राजीव गांधी ने किया था और संविधान में यह प्रावधान लाने में उनकी अहम भूमिका थी. उन्होंने कहा कि सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ सर्वसम्मति से पास हुआ था. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ही ज़ोर देकर कहा था कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए. रमेश ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने बार-बार मांग की है कि लोकसभा की 543 सीटों की सदस्य संख्या के आधार पर महिला आरक्षण लागू किया जाए, जिसका मतलब है कि महिलाओं के लिए 182 सीटें आरक्षित होनी चाहिए. अचानक 16 अप्रैल 2026 को रात 11 बजे, जब संसद में परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को अधिसूचित किया गया.
‘एजेंडा मोदी को बचाना है, महिलाओं को आरक्षण देना नहीं’
उन्होंने कहा कि सरकार की दिलचस्पी सिर्फ़ महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने में है. उन्होंने कहा कि सरकार दागदार दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश करती रही है, लेकिन सफल नहीं हो पाई है और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक मॉनसून सत्र में भी नहीं लाया जा सका. रमेश ने कहा कि उनके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है और उन्हें यह कभी नहीं मिलेगा. लाल किले से बार-बार उपदेश देने और यह ड्रामा करने के बजाय प्रधानमंत्री को 2029 के आम चुनावों से लोकसभा की मौजूदा संख्या के आधार पर महिला आरक्षण लागू करना चाहिए. रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का एकमात्र एजेंडा ‘मोदी को बचाना है, न कि महिलाओं को आरक्षण देना’.
40 वर्षों से फंसा है मुद्दाः PM
मोदी ने कहा था कि यह मुद्दा पिछले 40 वर्षों से राजनीतिक खींचतान में फंसा हुआ है. बजट सत्र के विस्तारित चरण के दौरान लाए गए संविधान संशोधन विधेयक में 2029 में विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था. निचले सदन में प्रस्तावित कानून को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी. 17 अप्रैल को बजट सत्र के दौरान मोदी सरकार को उस समय झटका लगा जब लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिर गया. लोकसभा में मतदान करने वाले 528 सांसदों में से 298 ने इसके समर्थन में वोट दिया, जबकि 230 ने इसका विरोध किया. विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी.
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News Source: PTI
