Home Top News ‘वंदे मातरम्’ पर घमासान! बंकिम चंद्र के वशंज ने की सोनिया गांधी से माफी की मांग; कही ये बात

‘वंदे मातरम्’ पर घमासान! बंकिम चंद्र के वशंज ने की सोनिया गांधी से माफी की मांग; कही ये बात

by Sachin Kumar 16 August 2026, 1:21 PM IST
16 August 2026, 1:21 PM IST
Vande Mataram Row Sonia Gandhi

Vande Mataram: वंदे मातरम् को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब बीजेपी विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी की मांग की. यह मांग ऐसे समय में की गई है, जब दावा किया जा रहा है कि AICC मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता जताई और इसे रोकने की कथित तौर पर बार-बार कोशिश की गई. वहीं, सोनिया गांधी को लिखे पत्र में चटर्जी ने कहा कि 15 अगस्त को हुई कथित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण थी, बल्कि यह एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराने जैसा है. उन्होंने कांग्रेस से इस मामले में बिना शर्त माफी मांगने की अपील की.

क्रांतिकारियों के गिनाए प्रसंग

नहाटी से बीजेपी विधायक सुमित्रो चटर्जी ने अपने पत्र में वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका का उल्लेख करते हुए अरविंद घोष, खुदीराम बोस, बिपिन चंद्र पाल, सरला देवी चौधरानी, बाल गंगाधर तिलक और रवींद्रनाथ टैगोर के योगदान का जिक्र किया.चटर्जी ने आगे कहा कि वह एक आम नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के तौर पर यह पत्र लिख रहे हैं, जिसमें 15 अगस्त को हुई कथित घटना पर दुख व्यक्त कर रहे हैं. बीजेपी विधायक ने यह भी कहा कि आजाद भारत की धरती पर वंदे मातरम् को पूरा गाने को लेकर दिखाई गई हिचकिचाहट खुदीराम बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का खुला अपमान है.

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जिन्ना की आपत्तियों के आगे घुटने टेके

चटर्जी ने आजादी की लड़ाई के दौरान इसकी भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी ने इसे गाया, 1909 में राजद्रोह के मुकदमे के दौरान बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने इसे गाया और 1938 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवादी छात्रों द्वारा निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे जोश भरने वाले नारे के तौर पर इस्तेमाल भी किया. इसके अलावा बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की दोहरी नीति कोई नई बात नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि साल 1937 में कांग्रेस ने मोहम्मदी अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे घुटने टेक दिए थे और उसी समय इस गाने को छोटा कर दिया गया था.

गाने को लेकर असहजता क्यों?

उन्होंने बताया कि कांग्रेस की पश्चिम बंगाल छात्र विंग ‘छात्र परिषद’ ‘मंत्र मोदेर संजीवनी-वंदे मातरम’ नारे का इस्तेमाल करती है. उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उसी गाने को लेकर असहज क्यों? यह जोर देते हुए कि वंदे मातरम किसी एक राजनीतिक पार्टी की संपत्ति नहीं है बल्कि यह देश की अमर विरासत है. चटर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत की आजादी की लड़ाई के इतिहास का सम्मान करने के बराबर है.

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News Source: PTI

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