Jamia Student Protest: जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) के पांच छात्रों की भूख हड़ताल शनिवार को 13वें दिन भी जारी है. छात्र अपनी स्टूडेंट यूनियन (JMISU) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर “सख्त कार्रवाई” करने के लिए यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर को हटाने की भी मांग की है. प्रदर्शन की शुरुआत से ही भूख हड़ताल पर बैठे जासिम अली खान ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर “सख्त कार्रवाई” करने का आरोप लगाया. उन्होंने मांग की कि छात्रों के निलंबन को रद्द किया जाए.
छात्रों की तीन मांगें
खान ने ANI को बताया, “यह हमारी भूख हड़ताल का 13वां दिन है. हमारी मांगें बिल्कुल साफ हैं – स्टूडेंट यूनियन को बहाल किया जाए. हालांकि, इस सख्त कार्रवाई के बाद, हमारी मांगों में निलंबन को रद्द करना भी शामिल हो गया है. तीसरी मांग चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की है, क्योंकि उन्हीं की देखरेख में यह सख्त कार्रवाई हुई है. ”
एक अन्य छात्र प्रदर्शनकारी, अनस ने मांग की कि प्रॉक्टर और अनुशासनात्मक समिति द्वारा छात्रों को जारी किए गए ‘शो-कॉज नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) को वापस लिया जाए. उन्होंने कहा कि जब तक स्टूडेंट यूनियन को बहाल करने की उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा. उन्होंने कहा, “चार लड़के और एक लड़की भूख हड़ताल पर बैठे हैं. जासिम पहले दिन से ही डटे हुए हैं और वह इस प्रदर्शन का मुख्य चेहरा हैं. बाकी लोग भी उनके साथ जुड़ गए. यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक हमारी स्टूडेंट यूनियन बहाल नहीं हो जाती. हमारी मांग है कि अनुशासनात्मक समिति और प्रॉक्टर द्वारा छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई, जिसमें ‘शो-कॉज नोटिस’ भी शामिल हैं, उन्हें रद्द किया जाए. चीफ प्रॉक्टर को इस्तीफा देना चाहिए.”
“प्रदर्शनकारियों ने नहीं लिखे नारे”
यूनिवर्सिटी कैंपस में “फ्री कश्मीर” और “फ्री शरजील” के नारे वाली ग्रैफिटी (दीवार पर लिखी गई बात) को लेकर चल रहे विवाद पर अनस ने कहा कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खराब करने के लिए एक खास नैरेटिव फैलाया जा रहा है. उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से इस मामले की जांच करने की अपील की और जोर देकर कहा कि इसमें प्रदर्शनकारियों का कोई हाथ नहीं है. उन्होंने कहा “विरोध-प्रदर्शन को बाधित करने के लिए एक नैरेटिव फैलाया जा रहा है. हमें नहीं पता कि विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसा कर रहा है या कोई और. यह जांच का विषय है, क्योंकि जामिया की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है. आप कैमरों की जांच करें कि कौन (ऐसे नारे) लिख रहा है और इस मामले को स्पष्ट करें.प्रदर्शनकारी और भूख हड़ताल करने वाले छात्र इसमें बिल्कुल भी शामिल नहीं हैं. विरोध-प्रदर्शन पहले दिन से ही शांतिपूर्ण रहा है और आगे भी ऐसा ही रहेगा.”
20 साल पहले भंग हुआ था छात्र संघ
जामिया के छात्रों ने 12 अक्टूबर को अपना विरोध-प्रदर्शन और भूख हड़ताल शुरू की. वे छात्र संघ को बहाल करने की अपनी मांग पर जोर दे रहे हैं. विरोध-प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को विश्वविद्यालय परिसर में तय की गई जगह से हटाने की कोशिश की, जिससे प्रदर्शन और तेज हो गया. जामिया में छात्र संघ को मार्च 2006 में भंग कर दिया गया था. शुक्रवार रात, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को दिल्ली पुलिस ने कुछ देर के लिए हिरासत में ले लिया, जब वे प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने जामिया परिसर पहुंचे थे. मसूद ने कहा, “वहां ‘आजाद कश्मीर’ के समर्थन में कोई नारा नहीं लगाया गया, एक भी नहीं. मैं सबके सामने खड़ा हुआ और ऐसे नारों की कड़ी निंदा की. मैंने साफ कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.”
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News Source: ANI
