Home Latest News & Updates दिल्ली कांग्रेस के प्रभावशाली चेहरा रहे सज्जन कुमार का निधन, 1984 सिख दंगा मामले में काट रहे थे उम्रकैद

दिल्ली कांग्रेस के प्रभावशाली चेहरा रहे सज्जन कुमार का निधन, 1984 सिख दंगा मामले में काट रहे थे उम्रकैद

by Sanjay Kumar Srivastava 20 August 2026, 3:07 PM IST (Updated 20 August 2026, 3:31 PM IST)
20 August 2026, 3:07 PM IST (Updated 20 August 2026, 3:31 PM IST)
दिल्ली कांग्रेस के प्रभावशाली चेहरा रहे सज्जन कुमार का निधन, 1984 सिख दंगा मामले में तिहाड़ में काट रहे थे उम्रकैद

Sajjan Kumar Death: कांग्रेस के चर्चित पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया. वे दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे थे. सफदरजंग अस्पताल ने अभी तक उनकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को कुमार को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी. यह सज़ा 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दौरान पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने से जुड़े मामले में सुनाई गई थी.

2018 में पार्टी से दे दिया था इस्तीफा

कुमार तिहाड़ जेल में बंद थे. उन्हें फरवरी 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने दंगों के दौरान दो सिख पुरुषों की हत्या से जुड़े एक अन्य मामले में भी उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी. तीन बार लोकसभा सदस्य रहे कुमार ने आउटर दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था और वे कांग्रेस के एक प्रमुख नेता थे. 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था. सज्जन कुमार कांग्रेस के पूर्व सांसद, कद्दावर राजनेता और 1984 के सिख-विरोधी दंगों के मुख्य दोषियों में से एक थे. वह अपनी मृत्यु (20 अगस्त 2026) तक तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे.

राजनीतिक सफर और प्रतिनिधित्व

सज्जन कुमार तीन बार कांग्रेस के लोकसभा सांसद रहे हैं. उन्होंने मुख्य रूप से बाहरी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. उनका संसदीय सफर इस प्रकार रहा.

1980: पहली बार बाहरी दिल्ली से 7वीं लोकसभा के लिए चुने गए.
1991: इसी सीट से दोबारा निर्वाचित हुए.
2004: रिकॉर्ड 8.5 लाख से अधिक वोट पाकर तीसरी बार संसद पहुंचे.

शीर्ष नेतृत्व से नजदीकी और कद्दावर कद

सज्जन कुमार दिल्ली कांग्रेस के बेहद कद्दावर और प्रभावशाली नेता माने जाते थे. स्थानीय राजनीति और झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के मतदाताओं पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी. राजनीतिक गलियारों में उन्हें एक ‘पावर ब्रोकर’ के रूप में देखा जाता था. वह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से संजय गांधी और गांधी परिवार के बेहद वफादार व करीबी थे.

सिख-विरोधी दंगों में भूमिका

1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख-विरोधी दंगों में उनकी भूमिका बेहद दागदार रही. उन पर भीड़ को उकसाने, साजिश रचने और सिखों के नरसंहार का नेतृत्व करने के गंभीर आरोप लगे. अदालत ने टिप्पणी की थी कि राजनीतिक संरक्षण के कारण वह लंबे समय तक कानून से बचते रहे. आखिरकार, दिसंबर 2018 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें दिल्ली कैंट (पालम कॉलोनी) इलाके में पांच सिखों की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. फरवरी 2025 में, अदालत ने उन्हें पिता-पुत्र की हत्या के एक अन्य मामले में भी दूसरी बार उम्रकैद की सजा दी थी.

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News Source: PTI

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