Haryana News : हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराध, फर्जी वेबसाइट, फिशिंग लिंक और ऑनलाइन दुष्प्रचार के खिलाफ अपनी डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है. जनवरी से जुलाई 2026 तक सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और URL ब्लॉकिंग टीम ने कार्रवाई करते हुए 16,308 अवैध ऑनलाइन कंटेंट/आइटम हटवाए.
फिशिंग लिंक और फेक प्रोफाइल पर कार्रवाई
पुलिस की टीमें सोशल मीडिया और इंटरनेट पर लगातार निगरानी रखकर फर्जी वेबसाइट, फिशिंग लिंक, धोखाधड़ी वाली एप्लीकेशन, भ्रामक विज्ञापनों और फर्जी प्रोफाइल की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं. पुलिस की निगरानी फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी, उकसाने वाली भाषा और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले कंटेंट तक भी पहुंच गई है.
आपत्तिजनक कंटेंट पर विशेष नजर
महिला एवं बाल सुरक्षा यूनिट द्वारा महिलाओं और बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक एवं गैर-कानूनी ऑनलाइन कंटेंट की विशेष निगरानी की जा रही है. ऐसे कंटेंट की पहचान होते ही संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को रिपोर्ट कर उसे हटाने की कार्रवाई की जाती है. गलत या भड़काऊ सामग्री मिलने पर आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत प्लेटफॉर्म को नोटिस भी जारी किया जाता है.
तकनीक से अपराधियों से एक कदम आगे पुलिस
डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि साइबर अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं, इसलिए पुलिस भी तकनीक के जरिए उनसे एक कदम आगे रहने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, URL ब्लॉकिंग और ऑनलाइन कंटेंट टेकडाउन के माध्यम से साइबर अपराध और गैर-कानूनी डिजिटल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा रहा है. एसपी मयंक गुप्ता ने लोगों से संदिग्ध और भ्रामक सामग्री शेयर नहीं करने की अपील की.
ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
डीजीपी ने नागरिकों को फर्जी निवेश और ट्रेडिंग ऐप्स से सावधान रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि साइबर ठग कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच देकर लोगों की जमा-पूंजी हड़प रहे हैं. किसी भी ऐप या वेबसाइट पर निवेश से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें. साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, ताकि रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई की जा सके.
एक कॉल…पलभर में खत्म हो गई जीवनभर की कमाई, देशभर में बढ़ते जा रहे साइबर ठगी के मामले
