Gujarat News : शहर के निकोल इलाके स्थित चाणक्य स्कूल में एक शिक्षक द्वारा छात्र को थप्पड़ मारने का मामला गंभीर विवाद का कारण बन गया है. आरोप है कि कक्षा 10 के एक छात्र को अंग्रेजी माध्यम के शिक्षक ने अनुशासन के नाम पर थप्पड़ मारा, जिससे उसके कान का पर्दा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया. छात्र को जब लगातार कान में दर्द की शिकायत हुई तो परिजन उसे ENT विशेषज्ञ के पास लेकर पहुंचे. जांच में कान का पर्दा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई. डॉक्टरों ने फिलहाल छात्र को ऑब्जर्वेशन में रखा है और यदि अगले 10 दिनों में सुधार नहीं हुआ तो ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है. घटना के बाद छात्र के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन से मुलाकात की और बाद में निकोल पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत भी दी. वहीं, मामले के तूल पकड़ने के बाद स्कूल प्रशासन ने आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की घोषणा की है.
छात्रों की मास ड्रिल आयोजित की गई थी
27 जून को चाणक्य स्कूल में कक्षा 9 और 10वीं के गुजराती तथा अंग्रेजी माध्यम के छात्रों की मास ड्रिल आयोजित की गई थी. इसी दौरान कुछ छात्र आपस में बातचीत कर रहे थे. स्कूल प्रबंधन के अनुसार, ड्यूटी पर मौजूद शिक्षक ने पहले कई बार छात्रों को शांत रहने के लिए कहा, लेकिन जब वे नहीं माने तो एक छात्र को अलग खड़ा कर दिया. आरोप है कि इसके बाद भी बातचीत जारी रहने पर शिक्षक ने छात्र को थप्पड़ मार दिया. जिस छात्र को थप्पड़ मारा गया, उसकी पहचान ‘निज’ के रूप में हुई है. थप्पड़ लगने के कुछ ही समय बाद छात्र ने कान में तेज दर्द की शिकायत की. इसके बाद परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां जांच में कान के पर्दे को गंभीर नुकसान पहुंचने की बात सामने आई. प
रिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने फिलहाल छात्र को ऑब्जर्वेशन में रखा है. यदि निर्धारित समय के भीतर कान की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो ऑपरेशन करना पड़ सकता है. इस आशंका ने परिवार की चिंता और बढ़ा दी है.
छात्र ने की दूसरे शिक्षकों से शिकायत
चाणक्य स्कूल के प्रिंसिपल कमलेश पटेल ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मास ड्रिल के दौरान कुछ छात्र लगातार बातचीत कर रहे थे. शिक्षक ने उन्हें कई बार समझाया, लेकिन जब छात्र नहीं माने तो उन्होंने थप्पड़ मार दिया. प्रिंसिपल के अनुसार, घटना के कुछ समय बाद छात्र ने दूसरे शिक्षक से कान में दर्द होने की शिकायत की, जिसके बाद तुरंत उसके अभिभावकों को स्कूल बुलाया गया. सोमवार को बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और अपनी नाराजगी जताई. इसके बाद स्कूल ट्रस्ट और प्रबंधन ने बैठक की तथा आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया. प्रबंधन का कहना है कि छात्र के भविष्य और स्वास्थ्य को लेकर परिवार को लिखित आश्वासन भी दिया गया है कि यदि भविष्य में इस घटना के कारण कोई चिकित्सकीय समस्या सामने आती है तो स्कूल आवश्यक सहयोग करेगा.
छात्र संगठन एबीवीपी भी हुआ सक्रिय
घटना के बाद छात्र संगठन एबीवीपी भी सक्रिय हो गया. संगठन के पदाधिकारियों ने छात्र के साथ हुई घटना की निंदा करते हुए दोषी शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. संगठन का कहना है कि विद्यालयों में अनुशासन आवश्यक है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में छात्रों के साथ शारीरिक हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती. परिजनों ने स्कूल प्रबंधन से बातचीत के बाद निकोल पुलिस स्टेशन में आवेदन देकर मामले की जांच की मांग की है. अब पुलिस मेडिकल रिपोर्ट और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी. यदि मेडिकल जांच में चोट गंभीर पाई जाती है तो शिक्षक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
संवाद और सकारात्मक तरीकों का इस्तेमाल होना चाहिए
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने के नाम पर शारीरिक दंड उचित है? शिक्षा व्यवस्था में शारीरिक सजा पर स्पष्ट रोक होने के बावजूद समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए संवाद और सकारात्मक तरीकों का इस्तेमाल होना चाहिए, न कि हिंसा का।फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है. छात्र की स्वास्थ्य स्थिति, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. वहीं, यह घटना अभिभावकों के बीच भी चिंता का विषय बन गई है कि स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा और सम्मान हर हाल में सुनिश्चित होना चाहिए.
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