Ram Mandir : विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मंगलवार को फैजाबाद बार एसोसिएशन पर जमकर निशाना साधा. एसोसिएशन ने राम जन्मभूमि मंदिर में दान की कथित चोरी के आरोपियों की तरफ से कोर्ट में पेश होने से वकीलों को मना कर दिया था. अब वीएचपी ने कहा कि बार एसोसिएशन का यह कदम संवैधानिक सिद्धांतों और पेशेवर नैतिकता का उल्लंघन है. परिषद का यह बयान बार एसोसिएशन द्वारा प्रस्ताव पारित करने के एक दिन बाद आया है. इस प्रस्ताव में कहा गया था कि कोई भी वकील जन्मभूमि मंदिर से दान की रकम की कथित चोरी के आरोपियों की ओर से पेश नहीं होगा और जो भी वकील उनका पक्ष रखने के लिए कोर्ट में पेश होगा. उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.
आरोपियों के लिए कोई सहानुभूति नहीं
वीएचपी के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट आलोक कुमार ने कहा कि उन्हें इस मामले में आरोपी लोगों के लिए कोई सहानुभूमति नहीं है. लेकिन वे किसी ऐसे रुख का समर्थन कतई नहीं कर सकते जो अनैतिक और गैर-कानूनी हो. राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी जैसे गंभीर अपराध के आरोपी किसी भी व्यक्ति के प्रति मेरी कोई सहानुभूति नहीं है. हम यह मांग करते हैं कि जल्द से जल्द जांच पूरी की जाए और इस मामले में सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो. इसके अलावा उन्होंने बार एसोसिएशन से अपने फैसले पर फिर से विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि अयोध्या बार का प्रस्ताव संवैधानिक सिद्धांतों और पेशेवर नैतिकता का उल्लंघन करता है.
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बार परंपराओं के खिलाफ प्रस्ताव
आलोक कुमार ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि अयोध्या बार एसोसिएशन इस फैसले पर विचार करेगा. इस दौरान कुमार ने एएस मोहम्मद रफी मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2011 के फैसले का जिक्र करते कहा कि शीर्ष अदालत ने माना है कि बार एसोसिएशनों द्वारा किसी खास आरोपी का बचाव करने से इनकार करने वाले प्रस्ताव पूरी तरह गैर-कानूनी हैं और बार की परंपराओं के खिलाफ भी है. उन्होंने कहा कि ऐसे प्रस्ताव पूरी तरह से गैर-कानूनी हैं. बार की सभी परंपराओं और पेशेवर नैतिकता के खिलाफ हैं.
कोर्ट बचाव करने का अधिकार देता है
साथ ही समाज किसी व्यक्ति को कितना भी भ्रष्ट और निंदनीय माने. इसके बाद भी उसे कोर्ट में अपना बचाव करवाने का अधिकार है. इसी के अनुसार वकील का यह फर्ज है कि वह उसका बचाव करें. आलोक कुमार ने यह भी कहा कि संविधान हर गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने और अपना बचाव करवाने का अधिकार देता है. उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का भी जिक्र किया, जिनके तहत वकीलों को उन अदालतों में केस स्वीकार करने होते हैं.
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News Source: PTI
