Gujarat News : गुजरात सरकार ने मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सूरत वन विभाग ने सासण गिर से लाए गए 50 चीतलों को मंडवी के जंगलों में छोड़ा है. इस पहल का उद्देश्य तेंदुओं जैसे मांसाहारी वन्यजीवों को जंगल में ही प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराना है, ताकि वे भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर न आएं और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि विकास और वन्यजीव संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए गुजरात सरकार वैज्ञानिक आधार पर वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है.
पहले चरण में छोड़े गए 21 चीतल
वन विभाग के अनुसार, मई और जून 2026 के दौरान तीन चरणों में चीतलों को सासण गिर से मंडवी के जंगलों में स्थानांतरित किया गया. पहले चरण में 23 मई को 21 चीतल छोड़े गए. इसके बाद 18 जून को 16 और 24 जून को 13 चीतलों को जंगल में मुक्त किया गया. इस तरह कुल 50 चीतलों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया.
जंगलों में तेंदुओं को मिलेगी प्राकृतिक शिकार
गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि राज्य सरकार वैज्ञानिक तरीके से वन्यजीव संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि जंगलों में तेंदुओं जैसे शिकारी वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराना इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत किया गया यह स्थानांतरण पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने और घास खाने वाले वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है. वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि यदि शिकारी जानवरों को जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिलेगा तो वे गांवों और मानव बस्तियों की ओर कम आएंगे. ऐसे प्रयास भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में प्रभावी साबित हो सकते हैं.
“सॉरी पापा, प्लीज मुझे माफ कर देना”, नही मिली सरकारी नौकरी तो 23 साल के इंजीनियर ने की आत्महत्या
क्विक रिस्पॉन्स टीम भी तैनात की
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन जयपाल सिंह ने बताया कि मंडवी वन क्षेत्र में पहले से ही चीतल प्रजनन केंद्र विकसित किया गया है. यह नई पहल उसी संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने का हिस्सा है, जिससे स्थानीय स्तर पर तृणभक्षी वन्यजीवों की संख्या बढ़ाई जा सके. सूरत सर्कल के वन संरक्षक पुनीत नैय्यर ने बताया कि वन विभाग ने किसी भी वन्यजीव आपात स्थिति से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस क्विक रिस्पॉन्स टीम भी तैनात की है. यह टीम वन्यजीवों के रेस्क्यू के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम करेगी. उन्होंने बताया कि चीतलों को जंगल में छोड़ने से पहले पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे किया गया था.
दुओं का जंगल में टिकाव बढ़ेगा
यह सुनिश्चित किया गया कि वहां पर्याप्त घास, सुरक्षित आवास और पूरे वर्ष पानी की उपलब्धता बनी रहे. इसके लिए जंगल में 10 स्थायी वाटर पॉइंट विकसित किए गए हैं. वन विभाग ने चीतलों की निगरानी के लिए विशेष पोस्ट-रिलीज मॉनिटरिंग कार्यक्रम भी शुरू किया है. प्रशिक्षित वन रक्षक और ट्रैकर्स लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं. वहीं, जंगल के विभिन्न हिस्सों में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से चीतलों की आवाजाही, स्वास्थ्य और जंगल में उनके अनुकूलन का अध्ययन किया जा रहा है. वन विभाग का मानना है कि प्राकृतिक शिकार आधार को मजबूत करने से न केवल तेंदुओं का जंगल में टिकाव बढ़ेगा, बल्कि दक्षिण गुजरात में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आएगी. यह पहल जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने की दिशा में गुजरात सरकार का एक महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक प्रयास मानी जा रही है.
