US Iran War: 28 फरवरी से ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध को लेकर जून में अंतरिम समझौता हुआ था. इसके बाद पश्चिम एशिया में इन दोनों देशों के बीच युद्ध को खत्म करने का ऐलान हो गया था. इसके साथ ही भारत समेत दुनिया के तमाम देशों के लिए अहम समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया था. इस रास्ते तेल, गैस, खाद्य आदि की आवाजाही होने लगी थी. लेकिन, अब एक बार फिर से ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू हो चुका है.
जी हां, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई मालवाहक जहाजों को ईरान के द्वारा निशाना बनाया गया और आगे भी ईरान की इस कार्रवाई के जारी रहने की आशंका है. इसकी जवाबी कार्रवाई में बीते दिनों अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड लगभग हर दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों और सुरक्षा संबंधित जगहों को निशाना बना रही है. वहीं, इसका पलटवार करते हुए ईरान खाड़ी के उन देशों को निशाना बना रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य बेस हैं. ईरान के इस हमले में अब तक 16 से अधिक अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबर है. वहीं, ईरान को भी काफी नुकसान हुआ है.
पश्चिम एशिया में एक बार फिर से तनाव बढ़ता हुआ दिख रहा है. कभी ईरान तो कभी अमेरिका, उस अंतरिम समझौते को मानने से इनकार कर दे रहे हैं, जो बीते दिनों पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुआ था. आइए अब जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया में तनाव को कम करने और शांति बहाली को लेकर हुए अंतरिम समझौते के बाद कितने बार हमले हुए हैं और अभी की क्या स्थिति है. शुरुआत हम दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के कुछ प्रमुख फैसलों से करेंगे.

ईरान-अमेरिका के बीच MoU पर साइन
बीते दिनों ईरान और अमेरिका ने समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर साइन किया था. जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद फ्रांस में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया था. बुधवार रात (17 जून) को डिनर के दौरान अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया. इस मौके पर फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे. इस ऐतिहासिक पल का वीडियो शेयर करते हुए व्हाइट हाउस ने कहा था, “राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय में ईरान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.”
वहीं, इस समझौते की जानकारी ईरान ने भी दी थी. भारत में ईरानी दूतावास के आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस डील की जानकारी दी गई थी. ईरानी एम्बेसी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) की तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा था, “राष्ट्रपति पेजेशकियान और उनके अमेरिकी समकक्ष ट्रंप ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच MoU पर डिजिटली और रिमोटली से हस्ताक्षर किए.”

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Iran US Peace Deal: शांति समझौते की 14 प्रमुख बातें
- युद्ध पर पूरी रोक: लेबनान सहित सभी सक्रिय मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करना.
- नाकाबंदी हटाना: हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना.
- अमेरिकी सेना की वापसी: ईरान के आस-पास के क्षेत्रों से अमेरिकी सैन्य बलों को पीछे हटाने की प्रतिबद्धता.
- आंतरिक मामलों में दखल नहीं: ईरान के संप्रभु आंतरिक मामलों में दखल न देने का अमेरिका का औपचारिक वादा.
- क्षेत्रीय सेना पर नियंत्रण: बातचीत के दौरान मध्य पूर्व (Middle East) क्षेत्र में अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को तैनात न करने की प्रतिबद्धता.
- होर्मुज जलडमरू: बीते कई दिनों से बाधित होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलना.
- शिपिंग फिर से शुरू करना: स्थानीय “ईरानी व्यवस्था” के तहत 30 दिनों के भीतर महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को फिर से शुरू करना.
- तेल प्रतिबंधों पर रोक: ईरान के रेवेन्यू फ्लो को बहाल करने के लिए तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित ऊर्जा निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाना.
- फ्रीज की गई संपत्ति की रिहाई: बातचीत की अवधि के दौरान कुल $24 बिलियन (24 अरब डॉलर) की ईरानी संपत्ति को अनफ्रीज (मुक्त) करना.
- बातचीत से पहले फंड की उपलब्धता: अंतिम बातचीत शुरू होने से पहले ही फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा ($12 बिलियन) ईरान को सौंपना.
- आर्थिक पुनर्निर्माण योजना: अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के लिए कम से कम $300 बिलियन (300 अरब डॉलर) के आर्थिक पुनर्निर्माण के प्रस्ताव पेश करना.
- परमाणु हथियार न बनाने की शर्तें: परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत ईरान का यह दोहराना कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा या हासिल नहीं करेगा.
- 60 दिनों की समय सीमा: अमेरिकी प्रतिबंधों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों और IAEA के प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों की सख्त समय सीमा तय करना.
- एजेंडे से बाहर की शर्तें: ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों के लिए उसके वित्तीय/सामग्री समर्थन को सभी बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर रखना.
अंतरिम समझौते के बाद यूएस-ईरान युद्ध
पश्चिम एशिया में संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हमले देखे जा रहे हैं. अमेरिका का आरोप है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले कर रहा है और इसकी जवाबी कार्रवाई में वह तेहरान को निशाने पर ले रहा है. वहीं, अमेरिकी हमले का पलटवार करते हुए ईरान खाड़ी के कई देशों पर हमला कर रहा है, जहां पर अमेरिकी सेना का बेस है. इन देशों में कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, कतर समेत अन्य देश शामिल हैं.
ताजा मामला ईरान के द्वारा जॉर्डन पर हमला करने का है, जिसमें अब तक दो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबर है. अमेरिकी सेना ने शनिवार को घोषणा की कि युद्ध के शुरुआती दिनों के बाद से ईरान की सीधी गोलीबारी में उसके पहले सैनिक हताहत हुए हैं. जॉर्डन में एक सैन्य अड्डे पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए और एक लापता हो गया. यह हमला कई दिनों से चल रही तेज गोलीबारी के बाद हुआ.

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लगातार आठवें दिन अमेरिका ने ईरान पर किया हमला
मिली जानकारी के अनुसार, जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की हत्या के बदले में अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) को निशाना बनाकर हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है क्योंकि उनके युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से किया गया अंतरिम समझौता विफल हो गया है. ये हमले एक सप्ताह तक चलने वाले अभियान का हिस्सा हैं, जिसकी शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर हुए संघर्ष से हुई थी और जिसके तहत ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले किए हैं.
अमेरिका ने ईरान में पुलों, बिजली सुविधाओं और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में कहा कि उसने “ईरान की मिलिट्री कोस्टल सर्विलांस (तटीय निगरानी) और एयर डिफेंस सुविधाओं, समुद्री क्षमताओं और मिसाइल व ड्रोन स्टोरेज साइटों” पर हमला किया. उसने यह भी कहा कि पहली बार उसने खास तौर पर ‘गार्ड’ को निशाना बनाया है; यह ईरान के धार्मिक शासन (थियोक्रेसी) का एक अहम पावर बेस है जो उसके बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे को कंट्रोल करता है.
अमेरिकी सेना द्वारा जारी फुटेज में फाइटर जेट और समुद्र से छोड़ी गई टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से किए गए हमले दिखाई दिए. एक टारगेट साइट पहाड़ी इलाके की घाटी में लग रही थी. ‘गार्ड’ अक्सर अपने मिसाइल बेस और दूसरे मिलिट्री इक्विपमेंट को पहाड़ी इलाकों में छिपाकर रखता है. अमेरिकी हमले में ईरान के कई सैन्य ठिकाने, ड्रोन साइटें, मिसाइल लॉन्च वाली जगह समेत अन्य नुकसान और तबाह हुए हैं.
वहीं, ईरान ने अमेरिकी ऑपरेशन में हुए अपने साजो-सामान के नुकसान के बारे में कोई कुल जानकारी नहीं दी है. यह अभियान अब आठवें दिन में है और दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर कंट्रोल के लिए आमने-सामने हैं. यह फारस की खाड़ी का संकरा मुहाना है, जिससे शांति के समय दुनिया भर में ट्रेड होने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है.

ईरान ने खाड़ी देशों को बनाया निशाना
अमेरिकी हमलों पर पलटवार करते हुए ईरान ने कुवैत में बिजली और विलवणीकरण संयंत्रों (power and desalination plants) पर हमला करके जवाबी कार्रवाई की है. इससे उस छोटे, तेल-समृद्ध रेगिस्तानी देश में जनजीवन खतरे में पड़ गया है. ईरान ने हमलों को और बढ़ाने की धमकियां भी तेज कर दी हैं, जिसके चलते संयुक्त अरब अमीरात ने कल रात चेतावनी जारी की है. कुवैत का कहना है कि वह ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में है. लगभग सभी खाड़ी अरब देशों को ईरान ने जवाबी हमलों के लिए निशाना बनाया है, शनिवार को सऊदी अरब में मिसाइल अलर्ट जारी किया गया. हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात को अभी तक निशाना नहीं बनाया गया है.
ईरान की अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फार्स, जिसे गार्ड के करीबी माना जाता है, ने शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ धमकी जारी की. एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से फार्स ने कहा कि ईरानी नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार हमले जारी रहने का मतलब होगा कि “दुबई और अबू धाबी के हवाई अड्डों के साथ-साथ फुजैराह और जेबेल अली के बंदरगाहों को तुरंत खाली करना होगा.”
इस खतरे का जवाब देते हुए, अमीरात के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर “खतरनाक परिणामों से बचने और क्षेत्र को हिंसा और अस्थिरता के नए स्तरों में धकेलने से रोकने के लिए अत्यधिक संयम बरतने” का आह्वान किया. बयान में आगे कहा गया है, “संयुक्त अरब अमीरात ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना … अंतरराष्ट्रीय कानून के स्थापित सिद्धांतों और प्रावधानों का घोर और गंभीर उल्लंघन है, और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार या उचित नहीं ठहराया जा सकता है.”
अधिकारियों का कहना है कि ईरान युद्ध के दौरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब दोनों ने अपने देशों को निशाना बनाने के लिए तेहरान के खिलाफ जवाबी हवाई हमले किए. छह देशों के खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं पर हमलों के लिए ईरान पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया.
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अमेरिका और ईरान को कितना हुआ नुकसान?
ईरान और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम समझौते का लगातार उल्लंघन जारी है. इस डील के बाद हुए हमले में ईरान और अमेरिका दोनों को काफी नुकसान हो रहा है. अमेरिकी सेना ने बताया कि जॉर्डन में एक सैन्य अड्डे पर हुए ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए, एक लापता है और चार को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 16 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 430 से अधिक घायल हुए हैं. हालांकि, अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की संख्या बढ़ने की आशंका है.
वहीं, ईरानी अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि अमेरिका द्वारा किए गए लेटेस्ट हमलों में कम से कम 50 लोग मारे गए हैं और 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

ईरान-यूएस में होर्मुज पर टकराव
ईरान और यूएस में दुनिया के एनर्जी सेक्टर के लिए काफी अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर टकराव दिख रहा है. एक ओर जहां ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले कुछ जहाजों को निशाना बना रहा है, वहीं अमेरिका होर्मुज के पास ईरान के समुद्री पोर्ट पर नाकेबंदी कर दे रहा है.
मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी पकड़ ढीली करने के लिए मजबूर करने के मकसद से ईरान के पावर स्टेशनों और पुलों को निशाना बनाने की धमकी दी है. हाल के हमलों से पता चलता है कि अमेरिकी सेना इस योजना पर अमल कर रही है और इसकी शुरुआत जलडमरूमध्य के पास ईरान के तटीय इलाकों से की गई है.
पिछले हफ्ते अमेरिका ने कच्चे तेल की शिपमेंट रोकने के लिए ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी भी फिर से लागू कर दी थी, और सेना ने शनिवार को कहा कि तब से उसने पांच जहाजों का रास्ता बदल दिया है और एक जहाज को बेकार कर दिया है.
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने शनिवार को एक बयान में चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इस्लामिक गणराज्य पर हमले जारी रखता है, तो उसे “कभी न भूलने वाले सबक” सिखाए जाएंगे. ईरान के एक वार्ताकार ने कहा कि तेहरान लगभग एक महीने पहले हुई उस अंतरिम डील के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को रोक रहा है, जिसका मकसद लड़ाई को स्थायी रूप से खत्म करना था. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा कि अमेरिका के “लालच, दादागिरी, तानाशाही या क्रूरता” का “करारा जवाब” दिया जाएगा.
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