Home Latest News & Updates जिस किताब पर लिखा है ‘सरकार की नि:शुल्क योजना’, वही Amazon पर 235 रुपये में बिकती मिली

जिस किताब पर लिखा है ‘सरकार की नि:शुल्क योजना’, वही Amazon पर 235 रुपये में बिकती मिली

by Nikul Patel 23 September 2026, 4:30 PM IST
23 September 2026, 4:30 PM IST
Gujarat controversy online sale textbooks provided students

Gujarat News: गुजरात में विद्यार्थियों को सरकार की नि:शुल्क योजना के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली पाठ्यपुस्तकों की ऑनलाइन बिक्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता और मीडिया कोऑर्डिनेटर हेमांग रावल ने आरोप लगाया है कि गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को मुफ्त मिलने वाली किताबें Amazon जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसे लेकर बेची जा रही हैं. वहीं, गुजरात राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के निदेशक विनयगिरी गोसाई ने कांग्रेस के आरोपों को आधारहीन बताया है. हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया है कि किताबें दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं और मामले में कार्रवाई की बात कही है.

एक पाठ्यपुस्तक को लेकर सवाल खड़े हुए

इस पूरे मामले में सामने आई एक पाठ्यपुस्तक को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. कक्षा 9वीं की कंप्यूटर अध्ययन विषय की किताब के कवर पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि ‘राज्य सरकार की नि:शुल्क योजना के तहत पुस्तक”।यानी जिस किताब को सरकार की योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाना है. वही किताब ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध होने का दावा सामने आया है. रियलिटी चेक के दौरान इसी किताब की Amazon पर ऑनलाइन लिस्टिंग दिखाई दी. इसमें किताब को ‘बाजार क्रेजीट’ नाम के सेलर की ओर से बिक्री के लिए उपलब्ध बताया गया. ऑनलाइन लिस्टिंग में इसकी कीमत 235 रुपये दिखाई गई. साथ ही 74 प्रतिशत डिस्काउंट का दावा भी किया गया. ऑनलाइन बिक्री की इस लिस्टिंग के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार की नि:शुल्क योजना के तहत विद्यार्थियों को दी जाने वाली किताब ऑनलाइन सेलर तक कैसे पहुंची?

किताब वास्तव में नि:शुल्क योजना का हिस्सा

कांग्रेस प्रवक्ता हेमांग रावल ने सवाल उठाया है कि अगर यह किताब वास्तव में नि:शुल्क योजना का हिस्सा है, तो इसे Amazon पर बेचने की अनुमति किसने दी? किताबों का स्टॉक किसने उपलब्ध कराया? सप्लायर कौन है और बिक्री से मिलने वाली राशि किसके पास जा रही है?कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. इस मामले में गुजरात राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल और Amazon के बीच हुए करार का मुद्दा भी सामने आया है. पाठ्यपुस्तक मंडल के मुताबिक, Amazon के साथ किताबों को प्राइस-टू-प्राइस बेचने का करार हुआ है. इसके तहत किताब की निर्धारित कीमत के अलावा डिलीवरी या कन्वीनियंस चार्ज नहीं लिया जाना चाहिए. हालांकि, कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि ऑनलाइन ऑर्डर के दौरान MRP से अतिरिक्त राशि ‘Marketplace Fee’ के नाम पर ली जा रही है.

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फीस किस आधार पर ली जा रही

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब अतिरिक्त चार्ज नहीं लेने की बात कही गई है, तो फिर इस प्रकार की फीस किस आधार पर ली जा रही है. मामला केवल Amazon तक सीमित नहीं होने की बात भी सामने आई है. पाठ्यपुस्तक मंडल के निदेशक विनयगिरी गोसाई ने माना है कि किताबें दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं. कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं की कुछ पाठ्यपुस्तकें, जो विद्यार्थियों को नि:शुल्क मिलनी चाहिए, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसे लेकर बेची जा रही हैं. कुछ ऑनलाइन लिस्टिंग में इन किताबों पर भारी डिस्काउंट दिखाए जाने की बात भी कांग्रेस ने कही है.

कांग्रेस के आरोपों को बताया आधारहीन

गुजरात राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के निदेशक विनयगिरी गोसाई ने कांग्रेस के आरोपों को आधारहीन बताया है. हालांकि, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किताबों की उपलब्धता को लेकर उन्होंने कार्रवाई की बात कही है. मंडल के सामने अब यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि नि:शुल्क योजना के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली किताबें ऑनलाइन बिक्री के लिए कैसे पहुंचीं और संबंधित किताबों की सप्लाई चेन क्या रही. फिलहाल इस मामले में कांग्रेस के आरोप और पाठ्यपुस्तक मंडल का जवाब दोनों सामने हैं. Amazon पर दिखाई गई किताब की ऑनलाइन लिस्टिंग और उसके कवर पर दर्ज ‘राज्य सरकार की नि:शुल्क योजना के तहत पुस्तक’ के उल्लेख ने इस पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है. अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि किताब का ऑनलाइन स्टॉक कहां से आया, संबंधित सेलर को यह किताब किस माध्यम से मिली और क्या सरकारी नि:शुल्क योजना के तहत दी जाने वाली किताब की बिक्री नियमों के अनुरूप हुई या नहीं. यदि जांच में अनधिकृत बिक्री की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी.

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