Home Latest News & Updates गुजरात के जल जीवन मिशन पर CAG का खुलासा: करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान, पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल

गुजरात के जल जीवन मिशन पर CAG का खुलासा: करोड़ों का अतिरिक्त भुगतान, पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल

by Nikul Patel 11 September 2026, 3:49 PM IST (Updated 11 September 2026, 4:50 PM IST)
11 September 2026, 3:49 PM IST (Updated 11 September 2026, 4:50 PM IST)
Gujarat Jal Jeevan Mission

Gujarat Jal Jeevan Mission: गुजरात में ग्रामीण घरों तक नल से पानी पहुंचाने के लिए चलाए गए जल जीवन मिशन (JJM) को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण कमियां सामने आई हैं, जो हैरान करने वाली हैं CAG ने गुजरात में जल जीवन मिशन के 2019-20 से 2023-24 तक के कामकाज का ऑडिट किया और अब कई सवाल खड़े हो गए हैं. रिपोर्ट में योजना की कार्यप्रणाली, परियोजनाओं की प्रगति, पानी की गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं की दीर्घकालीन स्थिरता की जांच की गई. रिपोर्ट-No. 03 of 2026- के रूप में सामने आई है.

यह मामला सिर्फ सरकारी पैसे के इस्तेमाल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ता है जिनके घरों में साफ और सुरक्षित पीने का पानी पहुंचाने का वादा किया गया था. CAG के खुलासे से सवाल उठते हैं कि स्कीम के लिए दिए गए बड़े बजट का इस्तेमाल कितना पारदर्शी और असरदार था. क्या सरकार ने जिन फायदों का वादा किया था, वे असल में लोगों तक पहुंचे.

मिशन का उद्देश्य और शुरुआती स्थिति

जल जीवन मिशन की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य देश के हर ग्रामीण परिवार तक पाइप के जरिए पानी पहुंचाना था. गुजरात में उस समय करीब 91.18 लाख ग्रामीण परिवार थे. मिशन के तहत केंद्र और गुजरात सरकार के बीच खर्च का अनुपात 50:50 रखा गया था. CAG रिपोर्ट के अनुसार किसी घरेलू नल कनेक्शन को ‘Functional Household Tap Connection’ यानी कार्यशील नल कनेक्शन तभी माना जाता है, जब कम से कम 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी, BIS:10500 के अनुरूप पानी की गुणवत्ता और लंबे समय तक निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो.

Gujarat Jal Jeevan Mission

CAG के अनुसार जल जीवन मिशन शुरू होने के समय यानी 15 अगस्त 2019 को गुजरात के 65.16 लाख ग्रामीण परिवारों, यानी कुल ग्रामीण परिवारों के 71.46 प्रतिशत, के पास पहले से ही कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन था. इसका मतलब था कि मिशन के सामने बाकी ग्रामीण परिवारों को भी कार्यशील नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती थी.

54.32 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान

रिपोर्ट के अनुसार GWIL और GWSSB द्वारा Wholesale Price Index यानी WPI के गलत इस्तेमाल के कारण ठेकेदारों को 54.32 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ. इसके अलावा गलत GST दर अपनाने के कारण भी ठेकेदारों को 18.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किए जाने की बात ऑडिट में सामने आई है. इस तरह दोनों मामलों को मिलाकर 73 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त भुगतान का मुद्दा सामने आया. CAG ने छह टेस्ट-चेक किए गए जिलों की जांच में पाया कि नवंबर 2024 तक चार जिलों में 71,842 परिवार, यानी 14.84 प्रतिशत, Functional Household Tap Connections से वंचित थे. यानी सरकारी आंकड़ों में कवरेज का दावा होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ परिवारों तक कार्यशील नल कनेक्शन नहीं पहुंच पाया था.

कुल 18,024 गांवों को 100 प्रतिशत हर घर जल compliant के रूप में Reported किया गया था. लेकिन अगस्त 2025 तक इनमें से 16,920 गांव, यानी 93.87 प्रतिशत, ही Certification हासिल कर पाए थे. CAG ने रिपोर्ट में इस तरह के आंकड़ों की विश्वसनीयता और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को भी जांच के दायरे में रखा.

26 प्रतिशत पानी के सैंपल टेस्ट में फेल, पद खाली

जल जीवन मिशन के तहत सिर्फ नल लगाना ही पर्याप्त नहीं है. लोगों को सुरक्षित और पर्याप्त पानी मिलना भी जरूरी है. CAG की जांच में टेस्ट किए गए District Level Laboratories और Taluka Level Laboratories में 2019-24 के दौरान प्री-मानसून में 38,073 पानी के नमूनों की जांच की गई. इनमें 9,886 नमूने यानी 26 प्रतिशत निर्धारित मानकों के आधार पर अनुपयुक्त पाए गए. इसी तरह पोस्ट-मानसून में 86,483 नमूनों की जांच हुई, जिनमें 20,557 यानी 24 प्रतिशत नमूने अनुपयुक्त पाए गए. CAG ने राज्य की जल गुणवत्ता जांच व्यवस्था में भी कमियां दर्ज कीं.

15 टेस्ट-चेक किए गए लैब में जरूरी उपकरणों में से केवल 61.70 प्रतिशत उपकरण जनवरी 2025 तक उपलब्ध पाए गए. गांधीनगर स्थित State Level Laboratory में सितंबर 2024 तक तकनीकी पदों पर 64.29 प्रतिशत रिक्तियां थीं. CAG के अनुसार पर्याप्त तकनीकी मानव संसाधन नहीं होने के कारण पानी के नमूनों की जांच प्रभावित हुई. गांधीनगर डिवीजन में जल जीवन मिशन के तहत छह augmentation works की स्थिति भी रिपोर्ट में दर्ज की गई.

दिसंबर 2024 तक- M-1 Regional Part-2 DPR stage पर था, G-1 Regional और Hamlet Connectivity परियोजनाएं dropped थीं, G-2 Regional Part-2, Labhor Group और Mota Jalundara परियोजनाएं progress में थीं और 1,434 इन-विलेज योजनाओं में 679 अभी प्रगति पर थीं. इसके अलावा छह टेस्ट-चेक किए गए जिलों में WASMO द्वारा 1,434 In-Village Water Supply Schemes पर काम किया गया. इनमें 752 योजनाएं पूरी हुईं, 679 योजनाएं प्रगति पर थीं और 3 स्वीकृत योजनाएं दिसंबर 2024 तक शुरू नहीं हुई थीं.

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वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी CAG ने कई बिंदु उठाए

2019-24 के दौरान जल जीवन मिशन के तहत कुल 19,465.10 करोड़ रुपये की ग्रांट प्राप्त हुई. ब्याज समेत कुल उपलब्ध फंड 19,471.61 करोड़ रुपये था. इसमें से 19,128.18 करोड़ रुपये, यानी 98.23 प्रतिशत, खर्च किए गए. लेकिन CAG ने यह भी पाया कि राज्य का हिस्सा जारी करने में देरी के कारण योजना को 3,179.31 करोड़ रुपये की राशि से वंचित रहना पड़ा. इसके अलावा 3,306.22 करोड़ रुपये WASMO को advance किए गए और 28.79 करोड़ रुपये का inadmissible expenditure staff quarters और office buildings पर होने की बात रिपोर्ट में कही गई है. CAG के अनुसार 2019-20 की शुरुआत में ग्राम पंचायतों से बकाया water charges 139.11 करोड़ रुपये थे.

यह राशि बढ़ते-बढ़ते 2023-24 के अंत तक 236.55 करोड़ रुपये हो गई. यानी पांच साल में बकाया राशि में 97.44 करोड़ रुपये यानी 70.05 प्रतिशत की वृद्धि हुई. राज्य में उपलब्ध 39,468 water sources में से सितंबर 2024 तक केवल 10,817 यानी 27.40 प्रतिशत स्रोतों की geo-tagging हुई थी. CAG ने राज्य सरकार से सभी जल स्रोतों की 100 प्रतिशत geo-tagging सुनिश्चित करने की सिफारिश की है. छह टेस्ट-चेक किए गए जिलों के water audit reports के अनुसार 2020-21 में कुल 10,555.52 million litres पानी का loss हुआ, जो 10.47 प्रतिशत था.

रिपोर्ट के अनुसार GWSSB ने Regional Water Supply Schemes का water audit 2020-21 में किया था, लेकिन जनवरी 2025 तक इसके बाद कोई दूसरा water audit नहीं किया गया था. JJM Guidelines के तहत सफलतापूर्वक योजना चलाने के बाद Village Water and Sanitation Committee यानी Paani Samiti को capital expenditure के 10 प्रतिशत तक incentive देने का प्रावधान है. छह टेस्ट-चेक जिलों में 31 मार्च 2023 से पहले पूरी हुई 514 योजनाओं की capital cost 157.77 करोड़ रुपये थी. इसके आधार पर 15.78 करोड़ रुपये incentive के रूप में देय था. ऑडिट के समय जनवरी 2025 तक टेस्ट-चेक किए गए जिलों की Paani Samitis को यह incentive जारी नहीं किया गया था.

CAG ने गुजरात सरकार के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें कीि

पहली सिफारिश: GWIL और GWSSB की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए.

दूसरी सिफारिश: WPI और GST दरों के इस्तेमाल में एकरूपता सुनिश्चित की जाए.

तीसरी सिफारिश: सभी ग्रामीण परिवारों को नियमित रूप से कम से कम 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन सुरक्षित और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराया जाए.

चौथी सिफारिश: सभी तालुकाओं में Taluka Level Laboratories स्थापित की जाएं.

पांचवीं सिफारिश: पानी के नमूनों को Permissible Limits के आधार पर घोषित करने की प्रक्रिया में वैकल्पिक सुरक्षित जल स्रोतों की उपलब्धता को भी ध्यान में रखा जाए.

छठी सिफारिश: इसके अलावा barefoot mechanics की training बढ़ाने और राज्य के सभी water sources की 100 प्रतिशत geo-tagging करने की सिफारिश की गई है.

लगातार निगरानी की जरूरत

नेशनल डेटा के मुकाबले गुजरात में जल जीवन मिशन की स्थिति की जांच करना भी जरूरी है. जब अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन लॉन्च हुआ था, तो देश में सिर्फ लगभग 32.3 मिलियन (16.8 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में नल का पानी आता था. मिशन के तहत यह कवरेज लगातार बढ़ा और दावा किया गया कि 2024 तक देश के ज़्यादातर ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन होंगे. मिशन लॉन्च होने से पहले ही, गुजरात में 71.46 प्रतिशत ग्रामीण घरों में चालू घरेलू नल कनेक्शन थे, जो नेशनल लेवल से काफी ज्यादा है. इसलिए, गुजरात के सामने चुनौती सिर्फ नए कनेक्शन देना ही नहीं थी, बल्कि बाकी घरों में रेगुलर और अच्छी क्वालिटी का पानी सप्लाई पक्का करना था. साथ ही यह पक्का करना भी था कि मौजूदा कनेक्शन चालू रहें. CAG रिपोर्ट में सामने आई पानी की क्वालिटी, पेंडिंग प्रोजेक्ट और कनेक्शन की कमियां इसी चुनौती की ओर इशारा करती हैं.

CAG की रिपोर्ट यह बताती है कि गुजरात में जल जीवन मिशन के तहत बड़े पैमाने पर काम और खर्च हुआ है, लेकिन परियोजनाओं की समय पर पूर्णता, वास्तविक नल कनेक्शन, पानी की गुणवत्ता, वित्तीय प्रक्रिया, जल स्रोतों की निगरानी और जमीनी स्तर पर आंकड़ों की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर सुधार की जरूरत है. रिपोर्ट का मुख्य संदेश यही है कि सिर्फ ‘हर घर जल’ का आंकड़ा दर्ज होना पर्याप्त नहीं है. ग्रामीण परिवारों को नियमित, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल वास्तव में मिल रहा है या नहीं, इसकी लगातार निगरानी जरूरी है.

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News Source: PTI

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