Home Top News सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में कोर्ट का सख्त रुख! आरोपी शुभम त्यागी को अग्रिम जमानत देने से इनकार

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में कोर्ट का सख्त रुख! आरोपी शुभम त्यागी को अग्रिम जमानत देने से इनकार

by Sachin Kumar 11 September 2026, 3:40 PM IST
11 September 2026, 3:40 PM IST
Delhi building collapse Court rejects anticipatory bail accused

Satya Niketan: दिल्ली की एक अदालत ने सत्य निकेतन इमारत हादसे के एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी. एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप लालर शुभम त्यागी की गिरफ्तारी से पहले जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे. शुभम त्यागी पर आरोप है कि वह उस इमारत में PG सुविधा चला रहा था, जो 6 सितंबर को ढहकर मलबे में तब्दील हो गई थी. अदालत ने मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी.

गुण-दोष पर कोई राय नहीं

अदालत ने इस बात पर गौर किया कि सत्य निकेतन में पीजी चलाने वाले पार्टनरशिप का खुलासा हुआ है. साथ ही त्यागी की वित्तीय और ऑपरेशनल भूमिका की गहनता से जांच की जरूरत है. हालांकि, अदालत ने साफ किया कि इस आदेश का मतलब मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं माना जाना चाहिए. त्यागी ने अदालत को बताया कि वह दिल्ली बार काउंसिल में रजिस्टर्ड वकील हैं और पटियाला हाउस कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं. आरोपी ने दावा किया कि वह सिर्फ एक दोस्त था जिसने सुधांशु के PG बिजनेस में पैसे लगाए थे और इमारत के स्ट्रक्चर पर उसका कोई मालिकाना हक या कंट्रोल नहीं था.

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त्यागी ने नहीं किया एग्रीमेंट का जिक्र

उन्होंने मकान मालिक उर्मिला गुप्ता और सुधांशु के बीच ऊपर ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल के लिए 6 सितंबर, 2025 के लिए नोटराइज्ड रेंट एग्रीमेंट का हवाला दिया. उन्होंने तर्क दिया कि FIR में उनका नाम था और न ही उन पर किसी खास काम का आरोप लगाया था. हालांकि, सरकारी वकील ने एक दूसरा रेंट एग्रीमेंट किया. 6 सितंबर, 2025 का ही था. इसमें त्यागी को उसी बिल्डिंग की दूसरी और तीसरी मंजिल का किराएदार दिखाया गया था. कोर्ट ने गौर किया कि त्यागी ने अपनी अर्जी में इस एग्रीमेंट का जिक्र नहीं किया. खास बात यह है कि जांच एजेंसी ने बहस के दौरान ही रिकॉर्ड पर रखा था.

गवाह के तौर पर किए साइन

इसके अलावा कोर्ट ने यह भी देखा कि दोनों एंग्रीमेंट एक ही स्टाम्प-वेंडर अकाउंट के जरिए कुछ ही मिनटों के अंतराल में किए गए थे और हर आरोपी ने दूसरे दस्तावेज पर गवाह के दौरान पर साइन किए गए थे. कोर्ट ने कहा कि यह पैटर्न सुधांशु की अकेले किराएदारी के बजाय साझा काम जैसा लगता है. कोर्ट ने घायल छात्र नीतीश चिब के बयान का भी जिक्र किया, जिसने कहा था कि उसने त्यागी और सुधांशु दोनों से 14,500 रुपये प्रति महीने पर रहने की जगह ली थी.

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News Source: PTI

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