Home Latest News & Updates RG कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर चलेगा मनी लॉन्ड्रिंग का केस, सरकार ने दी मंजूरी

RG कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर चलेगा मनी लॉन्ड्रिंग का केस, सरकार ने दी मंजूरी

by Neha Singh 19 May 2026, 10:23 AM IST (Updated 19 May 2026, 10:59 AM IST)
19 May 2026, 10:23 AM IST (Updated 19 May 2026, 10:59 AM IST)
Sandeep Ghosh

Sandeep Ghosh: पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत RG कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है. यह हस्पताल अगस्त 2024 में चर्चा में आया था.

पश्चिम बंगाल सरकार ने RG कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर इंस्टीट्यूशन से जुड़े फाइनेंशियल गड़बड़ियों के मामले में केस चलाने की मंजूरी दे दी है. हेल्थ और फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट की तरफ से सोमवार को जारी एक ऑर्डर में कहा गया है कि गवर्नर ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रोविजन के तहत घोष पर केस चलाने की मंजूरी दी है. इसमें यह भी कहा गया है कि FIR और उससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स समेत केस के मटीरियल और रिकॉर्ड की “पूरी तरह और ध्यान से जांच” करने के बाद यह मंजूरी दी गई थी.

घोष समेत तीन कंपनियों पर केस दर्ज

यह मामला घोष के प्रिंसिपल रहने के दौरान R G कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में खरीद और फाइनेंशियल गड़बड़ियों से जुड़ा है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक याचिका के सिलसिले में 23 अगस्त, 2024 के ऑर्डर में मामले की जांच का निर्देश दिया था, जिसके बाद ताला पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR को CBI की एंटी-करप्शन ब्रांच ने अपने हाथ में ले लिया था. इसके बाद CBI ने घोष और तीन कंपनियों- मां तारा ट्रेडर्स, ईशान कैफे और खामा लौहा के खिलाफ क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी, धोखाधड़ी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के प्रोविजन से जुड़ी धाराओं के तहत एक रेगुलर केस दर्ज किया.

अगस्त में शुरु हुई जांच

ऑर्डर में आगे कहा गया कि कथित अपराध PMLA के तहत शेड्यूल्ड अपराध थे, जिसके बाद एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने अगस्त 2024 में ECIR रजिस्टर करके मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की. ऑर्डर में कहा गया, “पहली नजर में, अथॉरिटी द्वारा जांचे गए मटीरियल से संदीप घोष की ओर से किए गए क्रिमिनल कामों का पता चला.” राज्य के हेल्थ डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि एक कोर्ट के सामने मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी जरूरी थी.

रेप मर्डर केस के बाद चर्चा में आया अस्पताल

अधिकारी ने PTI को बताया, “अथॉरिटी ने मंजूरी देने से पहले सभी जरूरी रिकॉर्ड की जांच की. यह ऑर्डर पब्लिक इंटरेस्ट में और कानूनी प्रोविजन के अनुसार जारी किया गया है.” घोष पिछले साल से ही आर जी कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन और खरीद के तरीकों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और फाइनेंशियल गड़बड़ी को लेकर सेंट्रल एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं. यह कॉलेज 2024 में अपने कैंपस में एक डॉक्टर के रेप और मर्डर के बाद नेशनल हेडलाइंस में आया था.

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News Source: PTI

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