Home Latest News & Updates नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्रशासन पर NGT सख्त! अवैध भूजल निकालने के खिलाफ दिया कार्रवाई का आदेश

नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्रशासन पर NGT सख्त! अवैध भूजल निकालने के खिलाफ दिया कार्रवाई का आदेश

by Sachin Kumar 26 June 2026, 5:11 PM IST (Updated 26 June 2026, 6:17 PM IST)
26 June 2026, 5:11 PM IST (Updated 26 June 2026, 6:17 PM IST)
NGT UP action illegal groundwater Noida Greater Noida

Noida News : उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई निर्माणाधीन कार्यों के लिए अवैध रूप से भूजल निकालने का आरोप लगाया गया है. अब इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भी सख्त हो गया है और यूपी के ग्राउंड वॉटर डिपार्टमेंट से कहा है कि वह नोएडा और ग्रेटर नोएडा में गैर-कानूनी तरीके से ग्राउंड वाटर निकाले जाने की शिकायत पर विचार करें. साथ ही जरूरत पड़ने पर इस मामले में उचित कार्रवाई भी करें. एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्त और एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद की बेंच पर्यावरण संरक्षणवादी विक्रांत टोंगड़ की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

इन सेक्टर में सबसे ज्यादा हो रहा है दोहन

विक्रांत टोंगड़ की तरफ से दायर की गई याचिका में दावा किया गया था कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्राइवेट बिल्डर, इंडस्ट्री और आम लोग गैर-कानूनी तरीके से भूजल निकाल रहे हैं. खासकर नोएडा के सेक्टर 145 और 153 और ग्रेटर नोएडा के टेक जोन इलाके सेक्टर 94 और 150 सबसे ज्यादा दोहन किया जा रहा है. याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील आकाश वशिष्ठ ने कहा कि हम लगातार सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी (CGWA) और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर भूजल और गैर-कानूनी दोहर को रोकने के लिए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वहीं, अपने आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा कि सबसे पहले शिकायत करने वाले शख्स को यूपी ग्राउंड वाटर डिपार्टमेंट के पास अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी.

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दंडात्मक कार्रवाई की जाए

ट्रिब्यूनल ने कहा कि हम मूल आवेदन का निपटारा करते हुए शिकायत करने वाले को इजाजत देते हैं कि वह यूपी ग्राउंड वाटर डिपार्टमेंट के पास जाकर शिकायत दर्ज कराएं. साथ ही शिकायत मिलने के बाद अथॉरिटी कानून के मुताबिक उस पर उचित विचार करेगी, जमीन पर जाकर जांच कराएगी. अगर कोई ट्यूबवेल या बोरवेल गैर-कानूनी तरीके से चलता हुआ पाया जाता है, तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए कानून के अनुसार उचित सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करेगी. ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यह प्रक्रिया जल्द से जल्द (तीन महीने) के पूरी की जाए.

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि एक तरफ जहां पीने के पानी के लिए लोग संघर्ष कर रहे हैं. दूसरी तरफ लाखों लीटर पीने योग्य भूजल को डी-वॉटरिंग के माध्यम से निकालकर नालों एवं खुले में बहाया जा रहा है. इससे न सिर्फ जल की बर्बादी हो रही है बल्कि वह प्रदूषित भी हो रहा है.

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