Home Top News कक्षा 9 के बच्चे अब पढ़ेंगे SIR: NCERT ने सोशल साइंस में किया शामिल, निष्पक्ष चुनाव की तारीफ

कक्षा 9 के बच्चे अब पढ़ेंगे SIR: NCERT ने सोशल साइंस में किया शामिल, निष्पक्ष चुनाव की तारीफ

by Sanjay Kumar Srivastava 26 June 2026, 3:50 PM IST (Updated 26 June 2026, 3:53 PM IST)
26 June 2026, 3:50 PM IST (Updated 26 June 2026, 3:53 PM IST)
कक्षा 9 के बच्चे अब पढ़ेंगे SIR: NCERT ने सामाजिक विज्ञान विषय में किया शामिल, निष्पक्ष चुनाव के लिए EC की तारीफ

NCERT: NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में बदलाव करते हुए चुनावी प्रक्रिया में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण'(SIR) को शामिल किया है. किताब में बताया गया है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और कोई अयोग्य व्यक्ति इसमें शामिल न हो.संशोधित पाठ्यक्रम में 96.8 करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले भारत के विशाल चुनावी ढांचे को दुनिया में बेमिसाल बताया गया है. इसके साथ ही फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और डराने-धमकाने जैसी कठिन चुनौतियों के बीच भी निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए भारत के चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका की सराहना की गई है.

अब तक हटे 6 करोड़ नाम

SIR, जिसके तहत अब तक वोटर लिस्ट से लगभग 6 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं और जिससे विपक्षी पार्टियों और ECI के बीच तनातनी हुई है, उसे एक साल पूरा हो गया है. यह 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है. पायलट SIR की शुरुआत पिछले साल 24 जून को बिहार में राज्य चुनावों से पहले हुई थी. इसका नतीजा एक छंटनी की हुई वोटर लिस्ट थी, जिसमें लगभग 65 लाख नाम हटा दिए गए थे. विपक्ष और एक्टिविस्ट का दावा था कि ECI, BJP के कहने पर काम कर रहा था ताकि दस्तावेज़ों की कमी के कारण नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा सके. ECI ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) भी करता है, जिसमें वोटर लिस्ट को अपडेट करना, वेरिफ़ाई करना और ठीक करना शामिल है.

SIR का मकसद- अयोग्य व्यक्ति न दे पाए वोट

SIR के ज़रिए यह सुनिश्चत किया जाता है कि कोई भी योग्य नागरिक बाहर न रहे और कोई भी अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल न हो. यह प्रक्रिया सभी वोटरों को शामिल करना पक्का करती है, खासकर उन युवा वोटरों को जो अभी-अभी 18 साल के हुए हैं और जागरूकता की कमी या किसी अन्य कारण से छूट सकते हैं. इसमें बताया गया है कि SIR वोटर की मौत, घर बदलने, एक ही नाम के दो बार रजिस्टर होने और हमेशा के लिए पता न चल पाने की वजह से भी नाम हटाता है. इसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग बदली हुई वोटर लिस्ट के खिलाफ दावे या आपत्तियां करने का समय देता है और फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने से पहले इन दावों और आपत्तियों का निपटारा करता है.

भारत की चुनावी प्रक्रिया को बताया बेमिसाल

क्लास 9 की पुरानी बुक में चुनावी राजनीति वाले चैप्टर में वोटर लिस्ट के बारे में एक सेक्शन था, जिसमें बताया गया था कि लिस्ट को हर पांच साल में पूरी तरह से अपडेट किया जाता है ताकि यह हमेशा सही और नई जानकारी वाली बनी रहे. नए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के हिसाब से बदली गई बुक में भारत की चुनावी प्रक्रिया के बड़े पैमाने और पूरे देश में चुनाव कराने में ECI की भूमिका पर भी ज़ोर दिया गया है. चैप्टर में कहा गया है कि भारत की चुनावी प्रक्रिया बेमिसाल है और दुनिया के दूसरे हिस्सों से अलग है, क्योंकि यहां अलग-अलग इलाकों और भौगोलिक स्थितियों में 96.8 करोड़ से ज़्यादा योग्य वोटर हैं.

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराता है ECI

इसमें आगे कहा गया है कि ECI इस बहुत बड़ी प्रक्रिया को आज़ादी से संभालता है और यह पक्का करता है कि पूरे देश में चुनाव निष्पक्ष और सही तरीके से हों. इसमें कहा गया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में कई चुनौतियों के बावजूद ECI यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि चुनाव कई स्तरों पर निष्पक्ष रूप से हों. पाठ्यपुस्तक में ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सामने चुनौतियां’ नाम के एक खास हिस्से में कहा गया है कि भारत में, अलग-अलग इलाकों और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में फैले हज़ारों पोलिंग स्टेशनों और सैकड़ों राजनीतिक दलों के साथ 96.8 करोड़ मतदाताओं के लिए चुनाव कराना एक चुनौतीपूर्ण काम है.

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News Source: PTI

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