Home राज्य दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में 50 मंदिरों पर संशय बरकरार, चलेगा बुलडोजर या सरकार दिखाएगी नरमी?

दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में 50 मंदिरों पर संशय बरकरार, चलेगा बुलडोजर या सरकार दिखाएगी नरमी?

by Prashant Tripathi 22 June 2026, 3:10 PM IST
22 June 2026, 3:10 PM IST
Yamuna Bazar

Yamuna Bazar Bulldozer Action: दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में नोटिस के बाद से लोगों ने मकान खाली करना शुरू कर दिया है. लोगों का कहना है मकान तो खाली कर देंगे लेकिन मंदिरों का क्या होगा. आपको बता दें कि यहां पर 50 से ज्यादा मंदिर है जहां पर हिंदू रीति रिवाज का पालन किया जाता है. कई ऐसे मंदिर है जो 200 साल पुराने हैं.. बरहाल सरकार ने अपना रुख अब तक साफ नहीं किया है.

कभी भी चल सकता है बुलडोजर

डीडीए तथा डीडीएमए के नोटिस के बाद कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार घाटों को लोगों ने खाली करना शुरू कर दिया है. पिछले माह ही 300 से अधिक परिवारों को घर खाली करने का नोटिस जारी किया गया था. यमुना किनारे होने के चलते ‘ओ’ जोन में आ रही इस बसावट को इस सप्ताह कभी भी गिराने की कार्रवाई आरंभ हो सकती है. वैसे, यहां बसावट को तोड़ना आसान नहीं है क्योकि, एक तरफ घाट तो दूसरी तरफ मोटी ऊंची दीवार है. वहीं एक तरफ निगमबोध घाट है. ऐसे में घाट नंबर दो से बुलडोजर प्रवेश कर सकेंगे. बताया जा रहा है कि पहले घाट की ओर की बसावट को तोड़कर रास्ता बनाया जाएगा. फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

लोगों की दलील

जिला प्रशासन ने बताया कि अवैध घोषित मकानों को गिराने की कार्रवाई कभी भी आरंभ हो सकती है. ऐसे में उन्होंने खुद से घरों को खाली करना शुरू कर दिया है. पंडों का परिवार (एक पिछड़ी जनजाति), मछुआरे, बाल बनाने वाले व किरायेदार यहां से निकलकर वजीराबाद, कैलाश नगर और गीता कॉलोनी में रहने के लिए जा रहे हैं. हालांकि कुछ महिलाएं अभी भी इन घरों में रह रही हैं, जिनके पास मुश्किल से कुछ सामान और बर्तन हैं. इनका कहना है कि अभी भी इनको उम्मीद है कि सरकार नरम रवैया दिखाएं. यह लोग इस बात की लगातार दुहाई दे रहे हैं कि इनके पूर्वज यहां पर रहा करते थे जिस ओजोन की बात कह कर सरकार इनसे मकान खाली करवा रही है, आज तक यमुना बाजार का कोई व्यक्ति नदी में डूबा नहीं है. इस बीच पंडों ने हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली.

200 साल पुराना मंदिर टूटेगा?

यहां मौजूद 50 से अधिक मंदिरों को लेकर अभी संशय है, क्योंकि अभी स्पष्ट नहीं है कि मंदिरों को भी हटाया जाएगा या नहीं. लोगों ने सवाल किया कि अगर मंदिर छोड़ दिए जाते हैं तो फिर प्रतिदिन पूजा- अर्चना कौन करेगा. यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा उद्घाटन किया हुआ मंदिर भी है. साथ ही यहां पर 200 साल पुराना जिंदा समाधि मंदिर भी है जहां पर आज भी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के परिवार के साथ-साथ बड़े-बड़े उद्योगपति साल में एक बार आकर पूजा अर्चना करते हैं. आपको बता दें कि यह इलाका पिछले 150 वर्षों से बसा हुआ है. हर साल यमुना में बाढ़ के वक्त यमुना बाजार में रहने वाले तैराक डूबते लोगों की जान भी बचते आए हैं. अब ऐसे में उनकी रोजी-रोटी और जीविका पर सवाल खड़े हो गए हैं.

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