ISRO : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को देश के पहले जियो-ऑर्बिट इमेजिंग सैटेलाइट EOS-05 को सफलतापूर्वक लॉन्च करके इतिहास रच दिया. इस 2,300 किलोग्राम से अधिक वजनी सैटेलाइट को GSLV रॉकेट के जरिए तय सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया. साल 2026 में इसरो की यह पहली बड़ी कामयाबी है. इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने इसे ‘आसमान में मौजूद आंख’ (eye in the sky) कहा है. यह सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से काम करेगा. इस ऊंचाई पर रहकर यह रियल-टाइम तस्वीरें देगा, जिससे खेती और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में देश को बड़ी मदद मिलेगी.
इसरो ने जासूसी के दावों को किया खारिज
इसरो ने उन अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें इसे एक ‘जासूसी सैटेलाइट’ कहा जा रहा था. लॉन्चिंग के करीब 18 मिनट बाद ही सैटेलाइट ने अपनी सही कक्षा हासिल कर ली थी. 2,300 किलोग्राम से ज़्यादा वज़न वाला यह सैटेलाइट GSLV द्वारा ले जाया गया अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है. यह अपने तय रास्ते (ट्रैजेक्टरी) पर बिल्कुल सही तरह से आगे बढ़ा. ISRO प्रमुख वी नारायणन ने कहा कि मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि GSLV F-17 व्हीकल ने एडवांस्ड EOS-05 जियो इमेजिंग सैटेलाइट को तय और ज़रूरी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है. लॉन्च के तुरंत बाद डिपार्टमेंट ऑफ़ स्पेस के सेक्रेटरी ने मिशन में शामिल मुख्य वैज्ञानिकों के साथ कहा कि यह श्रीहरिकोटा से 107वां लॉन्च और GSLV का 19वां मिशन है.
स्पेस प्रोग्राम के लिए एक बड़ी उपलब्धि
उन्होंने कहा कि एक बार जब EOS-05 ऑर्बिट में काम करना शुरू कर देगा, तो यह जियो-ऑर्बिट से भारत का पहला डेडिकेटेड इमेजिंग सैटेलाइट बन जाएगा जो देश के लिए स्ट्रैटेजिक डेटा उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि यह हमारे देश के स्पेस प्रोग्राम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह पहला EOS है जिसे राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए जियो-प्लेटफ़ॉर्म पर स्थापित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ऑर्बिट बढ़ाने की प्रक्रिया की जाएगी और सैटेलाइट को ज़रूरी ऑर्बिट तक ले जाकर जियो-प्लेटफ़ॉर्म पर स्थापित किया जाएगा.
सैटेलाइट का ऑपरेशनल जीवनकाल नौ साल
प्रोजेक्ट डायरेक्टर (सैटेलाइट) इम्तियाज़ अहमद ने EOS-05 को मल्टी बैंड क्षमता वाला एक अनोखा और अपनी तरह का इकलौता सैटेलाइट बताया. इससे पहले बुधवार रात 11:30 बजे शुरू हुए 27 घंटे के आसान काउंटडाउन के बाद रॉकेट ने सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से ठीक सुबह 2:55 बजे उड़ान भरी. ISRO प्रमुख ने कहा कि अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट का ऑपरेशनल जीवनकाल नौ साल है. उन्होंने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि यह एक जासूसी सैटेलाइट था.
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News Source: PTI
