Home Latest News & Updates 10 दिन में हॉस्पिटल के बेड से पोडियम तक पहुंचीं नीरू ढांडा, सेना की नायक सूबेदार ऐसे बनीं गोल्ड मेडलिस्ट

10 दिन में हॉस्पिटल के बेड से पोडियम तक पहुंचीं नीरू ढांडा, सेना की नायक सूबेदार ऐसे बनीं गोल्ड मेडलिस्ट

by Neha Singh 29 September 2026, 3:43 PM IST (Updated 29 September 2026, 3:50 PM IST)
29 September 2026, 3:43 PM IST (Updated 29 September 2026, 3:50 PM IST)
Neeru Dhanda

Neeru Dhanda: भारत हर दिन एशियन गेम्स में मेडल जीत रहा है और नए रिकॉर्ड बना रहा है. सोमवार को नीरू ढांडा एशियन गेम्स में इंडिविजुअल ट्रैप शूटिंग में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. लगातार बारिश और गिरते तापमान का सामना करते हुए उन्होंने दो मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. इससे पहले उन्होंने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में टीम इंडिया को सिल्वर मेडल जिताने में योगदान दिया. उनके साथ भारतीय टीम में आशिमा अहलावत और मनीषा कीर भी थीं. हरियाणा के जींद की 26 साल की नीरू भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर हैं. उन्होंने शानदार संयम और सटीकता का प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के ट्रैप फाइनल में 30 में से 28 टारगेट पर निशाना साधा और चीन की सन युनोंग (26) और कुवैत की अब्दुल मलिक हाजर (21) को हराकर गोल्ड अपने नाम किया.

नीरू की कहानी सिर्फ दो मेडल जीतने की नहीं है. एशियन गेम्स से दस दिन पहले, वह गंभीर रूप से बीमार थीं. उन्हें H1N1 फ्लू की वजह से भोपाल के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. वह लगभग पांच दिनों तक कुछ खा नहीं पाई थी. उस समय, एशियन गेम्स में उनका हिस्सा लेना नामुमकिन लग रहा था. लेकिन जिस तरह से वह अपनी बीमारी से उबरी और शूटिंग रेंज में निशाना लगाया, उससे उनका डेडीकेशन साफ दिखता है.”

तीसरा मेडल जीतने का मौका

नीरू ढांडा मिक्स्ड टीम कॉम्पिटिशन में एक और शानदार भारतीय शूटर, कायनन चेनाई के साथ जोड़ी बनाएंगी. नीरू पहले ही दो मेडल (एक गोल्ड और एक सिल्वर) जीत चुकी हैं. अगर नीरू और कायनन चेनाई की जोड़ी बुधवार को एक साथ अच्छा प्रदर्शन करती है, तो वे भारत के लिए एक और मेडल जीत सकते हैं, जिससे नीरू के कुल मेडल की संख्या तीन हो जाएगी.

क्यों खास है नीरू का गोल्ड

नीरू ने महिलाओं के इंडिविजुअल ट्रैप इवेंट में शानदार प्रदर्शन किया. बारिश और गिरते तापमान की वजह से शूटिंग रेंज में विजिबिलिटी मुश्किल हो गई थी. ऐसे मौसम में उड़ते मिट्टी के टारगेट को पहचानना और टारगेट पर सटीक निशाना लगाना मुश्किल था. इसके बावजूद नीरू ने अपना फोकस नहीं खोने दिया. फाइनल में उन्होंने 30 में से 28 टारगेट पर निशाना लगाया और गोल्ड मेडल जीता. चीन की सुन युनोंग 26 पॉइंट्स के साथ दूसरे और कुवैत के अब्दुल मलिक हजर 21 पॉइंट्स के साथ तीसरे स्थान पर रहीं. नीरू का गोल्ड मेडल कई मायनों में खास था. वह एशियन गेम्स में महिलाओं की ट्रैप शूटिंग में इंडिविजुअल गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं हैं. इसके अलावा, यह मौजूदा एशियन गेम्स में भारत का पहला इंडिविजुअल शूटिंग गोल्ड मेडल है.

खराब मौसम में नहीं टूटा हौसला

नीरू का फाइनल तक का सफर आसान नहीं था. उन्होंने क्वालिफिकेशन के पहले चार राउंड में 100 में से 95 शानदार स्कोर किए. इसके बाद उन्होंने फाइनल राउंड में खराब मौसम के बावजूद अपना प्रदर्शन बनाए रखा. पांचवें राउंड में नीरू ने 23 शॉट लगाए और कुल 118 स्कोर किए. इस प्रदर्शन से उन्होंने आठ-शूटर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर दी. फाइनल में मौसम ने उन्हें परेशान करना जारी रखा, लेकिन नीरू ने अपनी रिदम बनाए रखी. कॉम्पिटिशन के दौरान एक बार उन्हें येलो कार्ड भी दिखाया गया. इससे उनका ध्यान भटक सकता था, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए फायरिंग लाइन पर वापस आईं. उन्होंने आखिरी पांचों टारगेट पर निशाना लगाया और 28 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता. जैसे ही आखिरी टारगेट गिरा, इंडियन कैंप में जश्न शुरू हो गया. भारत के ब्रिटिश कोच और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट पीटर विल्सन ने नीरू को तिरंगे में लपेटा. यह पल उनके लिए गौरव से भरा था.

गोल्ड और सिल्वर दोनों अपने नाम किए

इंडिविजुअल गोल्ड जीतने से पहले नीरू ने विमेंस ट्रैप टीम इवेंट में भी भारत को सिल्वर मेडल जिताया. यहां उन्होंने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ भारतीय टीम को नेतृत्व किया. क्वालिफिकेशन में नीरू ने 118, आशिमा ने 106 और मनीषा ने 104 पॉइंट बनाए. तीनों ने कुल 328 पॉइंट बनाए, जिससे भारत ने सिल्वर मेडल जीत लिया. चीन ने 346 पॉइंट के साथ गोल्ड जीता, जबकि कुवैत ने 325 पॉइंट के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता. इस तरह, नीरू ने लगातार दो मेडल जीते: पहले टीम इवेंट में सिल्वर और फिर इंडिविजुअल इवेंट में गोल्ड.

हॉस्पिटल से शूटिंग रेंज तक

नीरू की यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ दिन पहले तक उनका एशियन गेम्स में हिस्सा लेना पक्का नहीं था. उन्हें गंभीर फ्लू की वजह से भोपाल के एक हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा था. वह पांच दिन तक खाना भी नहीं खा पाई थीं. उस समय उनके पर्सनल कोच, मनशेर सिंह ने उन्हें सलाह दी कि वह अपनी बीमारी को पीछे छोड़कर सिर्फ अपने लक्ष्य पर फोकस करें. मनशेर सिंह खुद एक पूर्व इंटरनेशनल शूटर और कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट हैं. नीरू ने बताया कि उनके कोच ने उनसे कहा कि जो हुआ उसे भूलकर सिर्फ अपने लक्ष्य पर फोकस करें. नीरू ने उनकी यह सलाह मानी और वापस शूटिंग रेंज में लौट आईं. उन्होंने अपने टारगेट पर फोकस किया. भोपाल के हॉस्पिटल के बेड से एशियन गेम्स के पोडियम तक का यह सफर नीरू के लिए आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने अपनी बीमारी का असर अपने गेम पर नहीं पड़ने दिया.

नायक सूबेदार हैं नीरू

नीरू ढांडा का शूटिंग करियर 2017 में शुरू हुआ था. उन्हें इस खेल में आने की प्रेरणा उनके भाई लक्ष्य श्योराण से मिली थी. लक्ष्य श्योराण ने 2018 एशियन गेम्स में पुरुषों के ट्रैप इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था. इसके बाद नीरू मध्य प्रदेश शूटिंग एकेडमी गईं और ट्रैप शूटिंग में अपना करियर बनाने लगीं. धीरे-धीरे उन्होंने नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर अच्छा प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. शूटिंग के बाहर नीरू एक अलग दुनिया में जीती हैं. दरअसल, नीरू भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर हैं. हाल ही में उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर भी अपनी पहचान बनाई है. उन्होंने इटली के लोनाटो में ट्रैप शूटिंग में ISSF वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया और ट्रैप में वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं.

रणधीर सिंह की विरासत को आगे बढ़ाना

भारतीय ट्रैप शूटिंग का एशियन गेम्स में एक लंबा इतिहास रहा है. 1978 में रणधीर सिंह ने बैंकॉक एशियन गेम्स में पुरुषों के ट्रैप इवेंट में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था. इसके बाद भारत को इस डिसिप्लिन में एक और गोल्ड मेडल के लिए 32 साल इंतजार करना पड़ा. डबल-ट्रैप शूटर रोंजन सोढ़ी ने 2010 ग्वांगझू एशियन गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था. अब नीरू ढांडा ने इस विरासत में एक नया अध्याय जोड़ा है. नीरू ने अपना गोल्ड मेडल बॉर्डर पर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर सैनिक जो काम करते हैं, उसके सामने उनकी उपलब्धि कुछ भी नहीं है. उन्होंने अपना गोल्ड रणधीर सिंह को भी समर्पित किया और उन्हें याद किया.

अब तक भारत ने कितने मेडल जीते

नीरू ढांडा के गोल्ड के साथ अब तक भारत की झोली में 48 मेडल आ चुके हैं. इसमें पांच गोल्ड, 21 सिल्वर और 22 ब्रॉन्ज मेडल हैं. भारत एशियन गेम्स की पदक तालिका में 12वें नंबर पर है.

गोल्ड मेडल विजेता

  • भारतीय महिला क्रिकेट टीम: महिला T20 कॉम्पिटिशन में श्रीलंका को फाइनल में हराकर ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता.
  • कमलजीत और सुरुचि सिंह: 10m एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में अपनी सटीक शूटिंग से इंडिया के लिए शूटिंग का गोल्ड मेडल जीता.
  • भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एक रोमांचक मैच में चीनी ताइपे को हराकर गोल्ड मेडल जीता.
  • भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने फाइनल में एक ईरानी टीम को हराकर मेन्स कबड्डी का गोल्ड मेडल वापस जीता.
  • नीरू ढांडा: महिला इंडिविजुअल ट्रैप शूटिंग में 28 पॉइंट्स का नया एशियन रिकॉर्ड बनाकर ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता.

सिल्वर मेडल विजेता

  • एलावेनिल, सोनम और विदर्शा: महिला 10m एयर राइफल टीम इवेंट में बेहतरीन कोऑर्डिनेशन दिखाया और सिल्वर मेडल जीता.
  • • एलावेनिल वलारिवन: महिलाओं के 10m एयर राइफल इंडिविजुअल इवेंट में कड़े मुकाबले के बाद दूसरे स्थान पर रहीं और सिल्वर जीता.
  • रुद्राक्ष, पार्थ और हिमांशु: पुरुषों के 10m एयर राइफल टीम इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए सिल्वर मेडल जीता.
  • हिमांशु ढिल्लों: पुरुषों के 10m एयर राइफल इंडिविजुअल फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता.
  • मीराबाई चानू: महिलाओं की 49kg वेटलिफ्टिंग कैटेगरी में स्नैच और क्लीन एंड जर्क के कुल वजन के साथ सिल्वर मेडल जीता.
  • नाओरेम रोशिबिना देवी: वुशु के महिलाओं के 60kg सैंडा फाइनल में कड़ी चुनौती का सामना करते हुए सिल्वर मेडल जीता.
  • इंडियन एथलेटिक्स टीम: मिक्स्ड 4x400m रिले रेस में शानदार स्पीड के साथ दूसरे स्थान पर रहीं.
  • • ऐश्वर्या, रुद्राक्ष और नीरज: पुरुषों की 50m राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में अपनी सटीक शूटिंग से देश के लिए सिल्वर मेडल जीता.
  • गुलवीर सिंह: जबरदस्त स्टैमिना दिखाते हुए उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर लंबी दूरी की रेस में सिल्वर मेडल जीता.
  • सावन बरवाल: पुरुषों की मैराथन रेस में सिल्वर मेडल जीता.
  • विदर्शा, आशी और तिलोत्तमा: महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में जबरदस्त परफॉर्मेंस से सिल्वर मेडल जीता.
  • तजिंदरपाल सिंह तूर: पुरुषों के शॉट पुट इवेंट में जबरदस्त थ्रो से सिल्वर मेडल जीता.
  • अभय सिंह: करीबी मुकाबले के बाद पुरुषों के सिंगल्स स्क्वैश फाइनल में रनर-अप रहकर सिल्वर मेडल जीता.
  • अनाहत सिंह: सिर्फ 18 साल की उम्र में महिला सिंगल्स स्क्वैश फाइनल में पहुंचकर सिल्वर मेडल जीता.
  • एंसी सोजन: महिला लॉन्ग जंप में अपनी सबसे अच्छी जंप के साथ सिल्वर मेडल जीता.
  • सर्वेश कुशारे: शानदार जंप के साथ मेन्स हाई जंप इवेंट में दूसरे स्थान पर रहे.
  • ईशा सिंह: महिला 25m पिस्टल इंडिविजुअल इवेंट के रोमांचक फाइनल में सिल्वर मेडल जीता.
  • गुलवीर सिंह: 10,000m के बाद उन्होंने मेन्स 1500m रेस में अपनी स्पीड दिखाकर अपना दूसरा सिल्वर मेडल जीता.
  • मुरली श्रीशंकर: पुरुष लॉन्ग जंप में जबरदस्त प्रदर्शन के साथ सिल्वर मेडल जीता.
  • यशवीर सिंह: पुरुष जेवलिन थ्रो इवेंट में शानदार दूरी के साथ सिल्वर मेडल जीता.
  • • नीरू, मनीषा और आशिमा: महिलाओं की ट्रैप टीम शूटिंग इवेंट में अपने सामूहिक प्रदर्शन से भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता.

2019 और 2023 का जख्म भर पाएं हैं कोहली? दोनों हार ने तोड़ दिया था मनोबल; क्या अबकी भरेंगे हुंकार

News Source: ANI

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?