Home Latest News & Updates कौन थे गैरी सोबर्स? आज भी कोई नहीं भूला एक ओवर में 6 छक्के और नाबाद 365 रनों की शानदार पारी

कौन थे गैरी सोबर्स? आज भी कोई नहीं भूला एक ओवर में 6 छक्के और नाबाद 365 रनों की शानदार पारी

by Sachin Kumar 18 July 2026, 9:19 PM IST (Updated 18 July 2026, 9:20 PM IST)
18 July 2026, 9:19 PM IST (Updated 18 July 2026, 9:20 PM IST)
Who is Garry Sobers

Garry Sobers : क्रिकेट के इतिहास में महानतम खिलाड़ियों में से एक गैरी सोबर्स का शुक्रवार को 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. पूरी दुनिया उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें महान खिलाड़ी के रूप सम्मान भी दिया. दुनिया को अलविदा कहने वाले गैरी सोबर्स ने क्रिकेट जगत में अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी से अलग पहचान बनाई. इसके अलावा उनकी सबसे ज्यादा चर्चा उनके दोनों हाथों में 12 अंगुलि को लेकर भी होती रही थी. दिग्गज क्रिकेटर खुद भी बताते थे कि निश्चित रूप से बहुत से लोग यह दावा करते हैं कि मेरी किस्मत इसलिए भी अच्छी रही है कि मेरे हाथों में दो अंगुलियां एक्स्ट्रा थीं. हालांकि, यह उनकी सोच हो सकती हैं लेकिन मैंने कभी भी इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचा. उन्होंने यह भी बताया था कि मेरे हाथों में छह-छह अंगुलियां होने से कभी कोई परेशानी नहीं हुई और न ही मेरे करियर पर इसका कोई खास प्रभाव पड़ा.

अपनी अंगुलियों को नहीं रखा साथ

सोबर्स का कहना था कि वेस्टइंडीज में अभी भी बहुत से लोग असामान्य शारीरिक बनावट वाले हैं. मैं खुद ऐसे क्रिकेटर्स के बारे में जानते हूं, जिनके हाथों में अतिरिक्त अंगुलि थीं. हालांकि, उन्होंने कभी भी इन दो एक्स्ट्रा अंगुलियों को अपने साथ नहीं रखा था. वह बताते थे कि जब उनकी उम्र 9 या 10 साल की थी उस वक्त एक धारदार हथियार से एक हाथ की एक्स्ट्रा अंगुलि को काट दिया था और फिर उसके पांच साल बाद उन्होंने चाकू से दूसरे हाथ की एक्स्ट्रा अंगुलि को काट दिया था.

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संपूर्ण क्रिकेटर हुए साबित

आपको बताते चलें कि सर गैरी सोबर्स का जन्म 28 जुलाई, 1936 को बारबाडोस में हुआ था. उन्होंने अपनी शानदार बल्लेबाजी से क्रिकेट की परिभाषा को बदलकर रख दिया था. उनके पिता कैनेडियन मर्चेंट नेवी थे और जब सोबर्स पांच साल के थे उस दौरान जर्मनों ने उनके पिता की नाव को डुबो दिया था. इसके बाद आठ साल की उम्र में वह बारबाडोस के वांडरर्स ग्राउंड में स्कोरबोर्ड स्कोरिंग करा करते थे. इस स्कोरिंग का असर यह था कि उन्होंने अपने सामने महान क्रिकेटर्स को खेलते हुए देखा, जिनमें फ्रैंक वारल, क्लाइड वालकॉट और एवर्टन वीक्स शामिल थे. इसके अलावा वह बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे और बाएं हाथ से ही फास्ट मीडियम गेंदबाजी भी करते थे. साथ ही मैदान पर अपनी गजब की फिल्डिंग की वजह से उन्हें अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ फील्डरों में शामिल थे. उनकी इसी बहुमुखी प्रतिभा की वजह से वह क्रिकेट के शिखर पर पहुंच गए और वह अपने समय में एक परिपूर्ण क्रिकेटर साबित हुए.

दो क्रिकेटरों ने किया सबसे ज्यादा प्रभावित

गैरी सोबर्स को सबसे ज्यादा प्रभावित फ्रैंक ग्रांट और बर्गेस ग्रैंडिसन जैसे महान क्रिकेटरों ने किया था. शुरुआत में वह पिच तैयार करने में उनका साथ दिया करते थे और इसके बदले में सोबर्स को मैदान पर खेलने की अनुमति मिल जाया करती थी. वहीं, बर्गेस ने सोबर्स की क्षमता को देखा और इसके बाद उन्होंने वेस्टइंडीज़ के कप्तान डेनिस एटकिंसन को इसके बारे में जानकारी दी. यही वजह अहम कड़ी साबित हुई और उन्होंने सोबर्स को अपने साथ तैयारियां करने की भी इजाजत दे दी. दूसरी तरफ गैरी सोबर्स के साथ जब इंग्लिश काउंटी नॉटिंघमशायर ने एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया तो वह काफी खुश हुए और इसके बाद उनका क्रिकेट की दुनिया में सिक्का चल पड़ा. इसके बारे में उन्होंने कभी बताया था कि इस कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से उन्हें एक सीजन में पांच हजार पाउंड, गाड़ी और बारबाडोस जाने का टिकट गया था. उन्होंने यह भी बताया था कि वह साल 1968 से पहले ही काउंटी क्रिकेट खेल चुके थे. लेकिन इसके योग्य होने के लिए उन्हें इंग्लैंड में रहना पड़ा था. साथ ही उन्हें देश के लिए नहीं खेलना खटकता रहता था.

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छह छक्के वाली घटना का भी बताया था किस्सा

खास बात यह है कि सोबर्स ने काउंटी क्रिकेट में कई यादगार पारियां खेली. लेकिन अपने पहले ही सीजन में स्वानज़ी में ग्लैमरगन के खिलाफ उनकी नाबाद 76 रनों की पारी आज भी कोई नहीं भूल पाता है. यही वह पारी थी जिसमें सोबर्स ने एक ओवर छह छक्के जड़ने का काम किया था. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में इससे पहले कोई नहीं कर पाया था. गैरी सोबर्स इस बात को याद दिलाते हैं कि मेरे द्वारा लगाए छह गेंदों में छह छक्के लगाने की वीडियो को सुरक्षित रखने का एक दिलचस्प किस्सा है. उन्होंने बताया कि वुल्फ़ वूलर उस समय कमेंट्री कर रहे थे, जब मैंने पहला छक्का मारा तो निर्माता न उनसे कहा कि मैच की आगे की रिकॉर्डिंग करने के बजाय आपको स्टूडियो में वापसी की घोषणा करनी है. वोलर ने उस वक्त कुछ और समय मांगा और जब मैंने तीसरा छक्का जड़ दिया तो वोलर ने उस अपने निर्माता से कहा कि अब कुछ भी हो जाए यह मैच जरूर रिकॉर्ड किया जाएगा. सोबर्स ने कहा था कि अगर यह पारी रिकॉर्ड नहीं हो पाती तो दुनिया के सामने इतनी प्रभावशाली पारी सामने नहीं आ पाती.

ऐसे बनाया एक पारी में सबसे ज्यादा रनों का रिकॉर्ड

काउंटी क्रिकेट खेलने के बीच सोबर्स ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत 1954 में की थी. लेकिन उन्हें पहले टेस्ट शतक के लिए करीब चार साल का इंतजार करना पड़ा था. यह इंतजार उनके शतक से नहीं बल्कि तिहरे शतक से खत्म हुआ. सोबर्स के पहले शतक के लिए चार साल के इंतजार के लिए उनकी आलोचना भी करते थे. हालांकि, लोग इस बात को भूल जाते हैं कि गैरी सोबर्स ने अपने क्रिकेट की शुरुआत एक गेंदबाज के रूप में की थी. जब उन्होंने पहला शतक जड़ा था उस वक्त कमेंटेटर रॉय लॉरेंस ने गैरी सोबर्स के बारे में कहा था कि सोबर्स ने अपना पहला शतक बनाया, तो वही नहीं रुकेंगे. वह इस पारी को दोहरे या तिहरे शतक में भी बदलने की क्षमता रखते हैं. अंत में हुआ भी यही. साल 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ किंग्स्टन टेस्ट में उन्होंने सर लिटन हटन के 364 रनों के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नाबाद 365 रनों की पारी खेली थी. सोबर्स का एक मैच यह रिकॉर्ड क्रिकेट की दुनिया में 36 सालों तक कायम रहा था और उनका रिकॉर्ड ब्रायन लारा ने 375 रन बनाकर तोड़ा था. इसके बाद मैथ्यू हेडन ने 380 रनों की पारी खेली लेकिन ब्रायन लारा ने नाबाद 400 रनों बनाकर एक बार फिर से विश्व रिकॉर्ड बना दिया. लारा का यह रिकॉर्ड आज भी कायम है.

वहीं, इस पारी को लेकर सोबर्स पर यह भी आरोप लगते हैं कि वह इस मैच में दो-तीन बार आउट हो गए थे. लेकिन अंपायर ने उन्हें नॉट आउट देकर जीवनदान दिया था. अब्दुल हफीज कारदार की किताब ग्रीन शैडोज़ लिखा है कि सोबर्स 334 के स्कोर पर फजल महमूद की गेंद पर विकेटकीपर इम्तियाज अहमद को कैच दे बैठे थे. लेकिन अंपायर ने आउट करार नहीं दिया.

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ऐसा था पाकिस्तान अंपायरों का अनुभव

गैरी सोबर्स बताते थे कि 365 रनों की यादगार पारी और सीरीज के बाद वह जब पाकिस्तान में खेलने के लिए आए तो उन्हें खराब अंपायरिंग का सामना करना पड़ा था. सोबर्स कहते थे कि कराची टेस्ट की पहली पारी में फजल महमूद की गेंद लेग स्टंप के बाहर पैड पर लगी थी और इसे बाद भी उन्हें आउट करार दे दिया गया. मैं उस वक्त अंपायर के फैसले हैरान हो गया था और उसके बाद भी मैंने कुछ नहीं कहा था. लेकिन जब दूसरी पारी खेलने के मैदान पर उतरा तो फजल की एक गेंद बल्ले का किनारा लेती हुई लेग स्लिप में एजाज बट के पास पहुंची और गेंद दस्तानों में जाने की बजाय जमीन पर गिर गई. इसके बाद फजल की अपील पर अंपायर ने अंगुलि को उठा दिया और मैं आउट करार दे दिया गया. इस बार आउट होने से मैं चौंक गया और फिर मैंने जब एजाज की तरफ देखा तो उन्होंने कहा कि क्या हुआ? उस वक्त हम दोनों जानते थे कि मुझे कैट आउट नहीं दिया गया है बल्कि LBW आउट दिया गया है.

Who is Garry Sobers

साथी क्रिकेटर की मृत्यु ने तोड़ा दिया था

इस बात को हर एक क्रिकेट प्रेमी जानता था कि गैरी सोबर्स और उनकी साथी क्रिकेटर कॉली स्मिथ के बीच दोस्ती की दुनिया भर में खूब चर्चा थी. कॉली की एक एक्सीडेंट में जब मृत्यु हो गई तो सोबर्स पूरी तरह टूट गए थे. उनकी मानसिक स्थिति पर बुरा असर इसलिए भी पड़ा था क्योंकि जिस कार का एक्सीडेंट हुआ था उसको खुद सोबर्स चला रहे थे. इसके बाद वह भारी मात्रा में सेवन करने लगे थे. वह अपने सबसे अच्छे दोस्त की मृत्यु का जिम्मेदार खुद को मानते थे.

इंडियन एक्ट्रेस से की थी सगाई

साल 1996 में वेस्टइंडीज की टीम भारत के दौरे पर आई थी. इसी बीच गैरी सोबर्स की मुलाकात मशहूर एक्ट्रेस अंजू महेंद्रू से हो गई. फिर दोनों के बीच प्यार हो गया और मामला सगाई तक पहुंच गया. सगाई के प्रोग्राम में उस वक्त करीब 500 लोगों को न्योता भेजा गया था. सोबर्स बताते हैं कि उस वक्त मैं अपने करियर के पीक पर था. साथ ही यह मामला उस वक्त चर्चाओं में था जब मंसूर अली ख़ान पटौदी की शादी मशहूर एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर से शादी हुई थी. उन्होंने बताया था कि मैं मंजू को शादी के लिए लंदन ले जाना चाहता था. लेकिन बीच में कोई समस्या आ गई और हम दोनों के बीच में दूरियां बढ़ती चली गईं. इसके कुछ साल बाद मेरी ऑस्ट्रेलियाई लड़की प्रो किर्बी से सगाई हुई तो उस वक्त मैंने बाकायदा मंजू से प्रमीशन लेनी पड़ी थी और उन्होंने मुझे इसकी इजाजत दे दी.

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