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‘खामोश मौत’: जर्मनी से ब्रिटेन तक टूटे रिकॉर्ड, यूरोप की ठंडी वादियों को अचानक किसने झुलसाया?

by Sanjay Kumar Srivastava 18 July 2026, 9:35 PM IST (Updated 18 July 2026, 9:40 PM IST)
18 July 2026, 9:35 PM IST (Updated 18 July 2026, 9:40 PM IST)
आसमान से बरसती 'खामोश मौत': यूरोप की ठंडी वादियों को अचानक किसने झुलसाया? जर्मनी से ब्रिटेन तक टूटे सारे रिकॉर्ड

EUROPE HEAT WAVE: यूरोप में समय से पहले आई भीषण और रिकॉर्डतोड़ गर्मी (हीटवेव) के कारण 10,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग हुए हैं. यूरोपीय देशों की मृत्यु दर निगरानी संस्था Euro MOMO के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल जून के आखिरी सप्ताह (22 से 28 जून) के चरम प्रकोप के दौरान ही महाद्वीप में 10,650 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं. जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, बेल्जियम और नीदरलैंड जैसे देशों में तापमान ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.

आखिर समय से पहले क्यों आई यह भीषण गर्मी?

  • मानव-जनित जलवायु परिवर्तन (Climate Change): कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक दोहन से वैश्विक तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग) लगातार बढ़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है.
  • ‘हीट डोम’ और उच्च दबाव प्रणाली (High-Pressure System): जून के महीने में पश्चिमी और मध्य यूरोप के ऊपर एक बेहद मजबूत और स्थिर हाई-प्रेशर सिस्टम (उच्च दबाव क्षेत्र) बन गया. इस प्रणाली ने एक ‘हीट डोम’ की तरह काम किया, जिसने गर्म हवा को एक ही जगह पर कैद कर दिया और ठंडी हवाओं को आने से रोक दिया.
  • उत्तर अफ्रीका से आई गर्म हवाएं: इस वायुमंडलीय दबाव के कारण उत्तरी अफ्रीका (सहारा मरुस्थल) से अत्यधिक गर्म हवाएं सीधे यूरोप की ओर खिंची चली आईं. इस वजह से फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में तापमान सामान्य से 5 से 12 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर चला गया.
  • सूखी मिट्टी और लगातार हीटवेव: इस साल मई के महीने से ही यूरोप में सूखा और समय से पहले गर्मी शुरू हो गई थी. मिट्टी में नमी न होने के कारण सूरज की किरणें जमीन को सीधे और ज्यादा गर्म करने लगीं, जिससे गर्मी का असर कई गुना तीव्र हो गया.

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इस साल यूरोप में बहुत जल्दी और जबरदस्त गर्मी पड़ी, जिससे मौतों की संख्या में भारी उछाल आया है. पूरे महाद्वीप से मिल रहे शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, हीटवेव के चरम पर सामान्य से कहीं ज़्यादा 10 हजार से भी ज़्यादा लोगों की मौत हुई. शोधकर्ता जिसे ‘अतिरिक्त मृत्यु दर’ यानी सामान्य रूप से अपेक्षित मौतों और वास्तविक मौतों की संख्या के बीच का अंतर कहते हैं, उसमें जून के आखिर में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई, जब यूरोप के कुछ हिस्सों में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ दिए.

विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तस्वीर सामने आने में समय लगता है. उदाहरण के लिए, अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से हार्ट अटैक (दिल का दौरा) पड़ सकता है खासकर बुज़ुर्गों या पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में, लेकिन डेथ सर्टिफिकेट पर इसे सिर्फ़ हार्ट अटैक के तौर पर दर्ज किया जा सकता है.

2003 में करीब 70 हजार लोगों की गई जान

गर्मियों की यह शुरुआत चिंताजनक है. पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में कई हीटवेव के कारण हज़ारों लोगों की मौत हुई है. फिर भी, गर्मी के लिहाज़ से 2003 यूरोप में सबसे घातक वर्ष रहा है, जिसमें लगभग 70,000 लोगों की मौत हुई थी. जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की बारंबारता और तीव्रता बढ़ गई है. जलवायु परिवर्तन कोयला, तेल और गैस जैसे ईंधन जलाने से होता है.

65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों पर बढ़ा खतरा

Euro MOMO का मॉर्टैलिटी मॉनिटरिंग हब, जिसे दो दर्जन देशों से डेटा मिलता है, ने 28 जून को खत्म हुए हफ़्ते में सभी वजहों से होने वाली अतिरिक्त मौतों का अनुमान 14,260 लगाया. इनमें से 12,000 से ज़्यादा मौतें 65 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की थीं. यह उस हफ़्ते हुई कुल 84,583 मौतों में से था. उससे पहले और बाद के हफ़्तों में ये आंकड़े काफ़ी कम थे.

डेनमार्क के स्टेटन्स सीरम इंस्टीट्यूट के लासे वेस्टरगार्ड, जो Euro MOMO का कामकाज संभालते हैं, ने कहा कि हम इसकी वजह यूरोप के कई देशों में पड़ रही भीषण गर्मी (हीट वेव) को मानते हैं, और ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी इतनी ज़्यादा अतिरिक्त मौतों की कोई दूसरी साफ़ वजह समझ में नहीं आती. उन्होंने कहा कि एक ही हफ़्ते में इतनी ज़्यादा अतिरिक्त मौतें होना बहुत असामान्य है. Euro MOMO अलग-अलग देशों के लिए पक्के आंकड़े नहीं देता, लेकिन उसने पाया कि अतिरिक्त मौतों की दर फ़्रांस, बेल्जियम और जर्मनी में सबसे ज़्यादा थी.

जिन देशों पर गर्मी की सबसे ज़्यादा मार पड़ी, उन्होंने अपने-अपने अनुमान जारी किए हैं. जरूरी नहीं कि वे सभी एक ही तरीके या समय-सीमा का पालन करते हों. यहां अलग-अलग देशों में गर्मी से होने वाली मौतों की जानकारी दी गई है.

जर्मनी

जर्मनी के बीमारी नियंत्रण केंद्र, रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट के अनुसार, इस साल जुलाई की शुरुआत तक गर्मी की वजह से सीधे तौर पर 6,830 लोगों की मौत हुई. इनमें से 6,470 लोग 65 साल या उससे ज़्यादा उम्र के थे. जर्मन मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले महीने के आखिर में जर्मनी में तापमान रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था और 28 जून को यह 41.7 डिग्री सेल्सियस (107.06 फ़ारेनहाइट) तक पहुंच गया था.

यूनाइटेड किंगडम

ब्रिटेन की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी ‘मेट ऑफिस’ ने बताया है कि मई और जून में इंग्लैंड और वेल्स में पड़ी भीषण गर्मी (हीट वेव) के कारण गर्मी से जुड़ी वजहों से 2,700 लोगों की मौत हुई है. एजेंसी के मुताबिक, इनमें से लगभग 550 मौतें मई के आखिर में और करीब 2,200 मौतें जून के आखिर में हुईं. इस साल मई में 35.1 डिग्री सेल्सियस (95.18 डिग्री फ़ारेनहाइट) और जून में 37 डिग्री सेल्सियस (98.6 डिग्री फ़ारेनहाइट) से ज़्यादा तापमान के साथ गर्मी के राष्ट्रीय रिकॉर्ड बने.

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फ्रांस

फ्रांस की पब्लिक हेल्थ अथॉरिटी ने बताया कि 22-28 जून के हफ़्ते में उससे पहले वाले हफ़्ते के मुकाबले कम से कम 2,000 ज़्यादा मौतें हुईं, जबकि उस समय भी तापमान बढ़ रहा था. फ्रांस में 24 और 25 जून को अब तक के सबसे गर्म दिन दर्ज किए गए. मौसम विभाग ‘मेटियो फ्रांस’ के अनुसार, राष्ट्रीय थर्मल इंडिकेटर, जो 30 मौसम केंद्रों पर मापे गए रोज़ाना के तापमान का औसत है 30 डिग्री सेल्सियस (86 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक पहुंच गया था. फ्रांस के 40% से ज़्यादा इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फ़ारेनहाइट) से ऊपर पहुंच गया था.

स्पेन

स्पेन की सरकारी निगरानी एजेंसी कार्लोस III हेल्थ इंस्टीट्यूट के अनुसार, जून में स्पेन में हुई अनुमानित 937 मौतें अत्यधिक गर्मी के कारण हुईं. मौसम एजेंसी AEMET के अनुसार, पिछले महीने का तापमान महीने के सामान्य औसत से 3.2 डिग्री सेल्सियस (5.8 डिग्री फ़ारेनहाइट) अधिक था, जिससे यह स्पेन में रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे गर्म जून बन गया. AEMET ने बताया कि पांच दिनों तक चली हीटवेव के दौरान तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फ़ारेनहाइट) से ऊपर रहा.

बेल्जियम

बेल्जियम के पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट ‘साइंसानो’ (Sciensano) के अनुसार, 18 जून से 1 जुलाई तक चली हीटवेव (लू) के दौरान सामान्य से 1,747 ज़्यादा मौतें हुईं. इंस्टीट्यूट ने कहा कि “हीटवेव के दौरान कुछ हद तक ज़्यादा मौतें होना आम बात है, ठीक वैसे ही जैसे ठंड के मौसम और फ्लू महामारी के दौरान होता है. फिर भी, जून 2026 की हीटवेव अपने असाधारण विस्तार के कारण अलग थी. IRM मौसम संस्थान ने बताया कि हीटवेव के चरम पर, 26 जून को तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस (95.9 डिग्री फ़ारेनहाइट) दर्ज किया गया था.

नीदरलैंड्स

पब्लिक हेल्थ सर्विस के अनुसार, जून में पड़ी भीषण गर्मी (हीट वेव) के दौरान हुई अतिरिक्त मौतों के शुरुआती अनुमान से पता चला है कि नीदरलैंड्स में उम्मीद से 480 ज़्यादा मौतें हुईं. पूर्वी और दक्षिणी इलाकों में मौतें ज़्यादा देखी गईं, जहां तापमान सबसे ज़्यादा था. देश में जून के महीने का अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान दर्ज किया गया. डच मौसम विभाग ने 36.8 डिग्री सेल्सियस (98.24 फ़ारेनहाइट) तापमान रिकॉर्ड किया. यह 1947 में बने पिछले रिकॉर्ड से एक डिग्री सेल्सियस (1.8 फ़ारेनहाइट) से भी ज़्यादा है.

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