Home Top News दिव्यकीर्ति के नाम पर फर्जीवाड़ा : HC सख्त, फेक प्रोफाइल और डीपफेक वीडियो हटाने का आदेश

दिव्यकीर्ति के नाम पर फर्जीवाड़ा : HC सख्त, फेक प्रोफाइल और डीपफेक वीडियो हटाने का आदेश

by Sachin Kumar 29 September 2026, 3:22 PM IST (Updated 29 September 2026, 3:24 PM IST)
29 September 2026, 3:22 PM IST (Updated 29 September 2026, 3:24 PM IST)
Delhi HC fake profiles deepfake content Drishti IAS founder

Vikas Divyakirti: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को दृष्टि IAS कोचिंग के फाउंडर विकास दिव्यकीर्ति से जुड़ी डीपफेक और नकल वाली सामग्री को हटाने का आदेश दिया है. इनमें फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, डीपफेक वीडियो और उनके लेक्चर की कुछ अनधिकृत रिकॉर्डिंग शामिल हैं. विकास दिव्यकीर्ति ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने नाम, तस्वीर और पहचान के कथित गलत इस्तेमाल के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी. मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एजे भंभानी ने संबंधित सामग्री को हटाने के निर्देश दिए.

फोटो का इस्तेमाल करके कंटेंट तैयार किया गया

यह पूरा मामला ऐसे ऑनलाइन अकाउंट और चैनलों से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर विकास दिव्यकीर्ति के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल करके कंटेंट तैयार किया जा रहा था. दिव्यकीर्ति की याचिका में उन वीडियो को लेकर भी चिंता जताई गई, जिनमें उन्हें सट्टेबाजी और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का समर्थन करते हुए दिखाया गया था. दिव्यकीर्ति का कहना था कि इन वीडियो को या तो एडिट करके तैयार किया गया था या फिर उनकी सहमति के बिना इस्तेमाल किया गया. कोर्ट को उनके लेक्चर की क्लिप्स के ऑनलाइन प्रसारित होने की जानकारी भी दी गई. दिव्यकीर्ति के वकील के मुताबिक, कुछ वीडियो को इस तरह एडिट और पेश किया गया कि उनके मूल लेक्चर का अर्थ बदलता हुआ नजर आया.

अनुमति लेने की जरूरत पर दिया जोर

कोर्ट में सुनवाई डिजिटल टूल पर केंद्रित थी, जिनसे बदला हुआ कंटेंट बनाया जा सकता है. जस्टिस भंभानी ने इस पर चिंता जताई है कि ऐसे टूल बिना किसी प्रभावी सिस्टम के उपलब्ध हैं और वह दूसरे व्यक्ति का कंटेंट चुराकर दूसरा कंटेंट बना रहे हैं. यह मुद्दा मेटा के वकील वरुण पाठक की दलीलों के दौरान उठा. वकील ने उन लाइसेंसिंग और अनुमति की जरूरतों का जिक्र किया जो असल दुनिया में कुछ गतिविधियों पर लागू होती हैं. जज ने इसकी तुलना हथियार का लाइसेंस लेने की प्रक्रिया से की.

प्लेटफॉर्म जिम्मेदार नहीं हो सकता

कोर्ट ने यह भी देखा कि दमदार कंटेंट तैयार करने वाले डिजिटल टूल ऐसे यूजर्स को उपलब्ध कराए जा सकते हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाती है. इसके बाद उनके संभावित गलत इस्तेमाल की चिंता पैदा होती है. हालांकि, पाठक ने कहा कि किसी यूजर द्वारा फीचर के हर गलत इस्तेमाल के लिए प्लेटफॉर्म जिम्मेदार नहीं हो सकता है. उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि प्लेटफॉर्म कानून की जरूरत से ज्यादा पहचान संबंधि जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं.

वहीं, दिव्यकीर्ति की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दीया कपूर ने भी एक ऐसे फीचर का जिक्र किया जो किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के वीडियो का इस्तेमाल करने और उस पर अपनी परफॉर्मेंस जोड़ने की सुविधा देता है. उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे फीचर के कारण मौजूद कंटेंट का इस्तेमाल अलग संदर्भ में किया जा सकता है.

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News Source: ANI

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