Domestic Workers: दिल्ली में घरेलू कामगार उपलब्ध कराने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों के लिए अब पंजीकरण और लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है. दिल्ली सरकार के श्रम विभाग द्वारा जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. सोसायटियों में बढ़ती वारदातों और निवासियों की सुरक्षा को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है.
प्लेसमेंट एजेंसियों की तय होगी जवाबदेही
अब सभी निजी प्लेसमेंट एजेंसियों को सरकार के ‘ई-डिस्ट्रिक्ट’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा और आवेदन के 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से लाइसेंस प्राप्त करना होगा. सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए सरकार ने एक और कड़ा नियम जोड़ा है. नए दिशानिर्देशों के तहत पंजीकरण आवेदन के साथ घरेलू कामगार (मेड, ड्राइवर आदि) और नियोक्ता (काम पर रखने वाले व्यक्ति) दोनों का पुलिस सत्यापन होना अनिवार्य है. इस कदम से प्लेसमेंट एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी और दिल्ली में घरेलू सहायकों के माध्यम से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.
उल्लंघन पर 50,000 रुपए का जुर्माना
आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि 25 सितंबर 2014 के कार्यकारी आदेश के प्रावधानों का पालन न करने पर 50,000 रुपये का जुर्माना (जिसे भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूला जा सकता है) लगाया जाएगा, पंजीकरण और लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा, और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश के अनुसार, निजी प्लेसमेंट एजेंसियों को विनियमित (रेगुलेट) करने के लिए श्रम विभाग ने 2014 में यह कार्यकारी आदेश जारी किया था. नोटिस में सभी निजी प्लेसमेंट एजेंसियों से आग्रह किया गया है कि वे तुरंत अपना पंजीकरण और लाइसेंस प्राप्त कर लें और इनके बिना काम न करें. कानूनी परिणामों से बचने के लिए एजेंसियों को मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का पालन करना होगा.
कामगारों का पुलिस सत्यापन जरूरी
घरेलू कामगारों को काम पर रखने वाले नियोक्ताओं को भी सलाह दी गई है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कामगार किसी पंजीकृत एजेंसी के माध्यम से ही आए हों. नोटिस में कहा गया है कि कामगारों को काम पर रखने से पहले एजेंसी का पंजीकरण और लाइसेंस जांचना, कामगारों का पुलिस सत्यापन कराना बहुत जरूरी है. श्रम विभाग ने उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए ‘दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेगुलेशन) ऑर्डर’ जारी किया है. इसके तहत 2020 में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को भी मंजूरी दी गई थी. अदालत ने सरकार को यह निर्देश भी दिया है कि वह दिल्ली में निजी प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले घरेलू कामगारों के शोषण को रोके.
बैंक खातों में हो घरेलू सहायकों का भुगतान
कार्यकारी आदेश के अनुसार, घरेलू कामगार का अर्थ है 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति, जो किसी निजी प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से घरेलू काम में लगा हुआ है. नोटिस के अनुसार, ‘प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसी’ शब्द का अर्थ ऐसे व्यक्तियों या संगठनों से है (सरकारी एजेंसियों को छोड़कर), जो घरों में काम करने के लिए घरेलू सहायकों को उपलब्ध कराते हैं. इस आदेश में घरेलू सहायकों के काम करने की शर्तों और उन्हें काम पर रखने के तरीकों के बारे में बताया गया है. इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि घरेलू सहायकों को भुगतान उनके बैंक खातों के जरिए ही किया जाना चाहिए. आदेश में एजेंसियों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है. जो एजेंसियां पंजीकरण नहीं कराती हैं, उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.
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