Latur-Dharashiv: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के लातूर और धाराशिव जिलों में कम बारिश के कारण सूखे जैसे बेहद गंभीर हालात पैदा हो गए हैं. इस वर्ष इन दोनों जिलों में सामान्य से केवल 50 प्रतिशत ही वर्षा दर्ज की गई है, जिसके कारण खरीफ की फसलें पूरी तरह सूखकर बर्बाद हो गई हैं. खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह पीली पड़ चुकी हैं और किसानों के सामने आजीविका का गहरा संकट खड़ा हो गया है.
प्रमुख फसलें और उन पर प्रभाव
इस कृषि प्रधान क्षेत्र में मुख्य रूप से सोयाबीन, कपास, तुअर (अरहर), मूंग और गन्ना जैसी फसलें उगाई जाती हैं. इस साल मानसून की भारी बेरुखी और करीब 80 दिनों तक बारिश न होने के कारण फसलों की बढ़त पूरी तरह रुक गई. मिट्टी में नमी खत्म होने से फसलों में न तो फूल आ पाए और न ही फलियां बन सकीं. इसके अलावा कपास और गन्ने जैसी नकदी फसलों का उत्पादन भी भारी कमी की ओर बढ़ रहा है.
मुख्य रूप से बर्बाद हुई ये फसल
इस सूखे में सबसे बड़ी मार सोयाबीन की फसल पर पड़ी है. अकेले धाराशिव जिले में इस सीजन में लगभग 4.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन बोया गया था. बारिश की कमी से सोयाबीन की फसल 80 से 85 प्रतिशत तक पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. हालत इतनी खराब है कि हताश किसान अब इन सूखे और मुरझाए हुए सोयाबीन के पौधों को मवेशियों के चारे के रूप में इस्तेमाल करने को मजबूर हैं. सोयाबीन इस क्षेत्र के किसानों की कमाई का मुख्य जरिया है और इसके नष्ट होने से उनकी आजीविका पूरी तरह ठप हो गई है.
सिंचाई के साधन और संकट
लातूर और धाराशिव के अधिकांश हिस्से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं. यहां सिंचाई के मुख्य साधनों में कुएं, बोरवेल और छोटे तालाब शामिल हैं. भूजल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण और बारिश न होने से जलस्तर खतरनाक स्तर तक नीचे गिर चुका है. कृत्रिम सिंचाई के साधन भी पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं, जिससे फसलों को बचा पाना असंभव हो गया है.

टूटी किसानों की कमर
फसलें पूरी तरह नष्ट होने के कारण किसानों की कमर टूट गई है. कर्ज के बोझ तले दबे किसान अब अपने खेतों से सूखी फसलें हटाने को मजबूर हैं ताकि नुकसान का आकलन किया जा सके. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया है. उन्होंने सरकार की तरफ से हर संभव मदद तथा शुरुआती फसल मूल्यांकन के बाद मुआवजे का आश्वासन दिया है. किसानों के सामने न केवल इस साल की कमाई का बल्कि आने वाले दिनों में मवेशियों के लिए चारे और खुद के लिए पीने के पानी का भी भारी संकट मंडरा रहा है.
किसानों को हर संभव मदद का वादा
फडणवीस ने बुधवार को मराठवाड़ा इलाके के लातूर और धाराशिव में सूखे जैसे हालात को बेहद गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि इन दो ज़िलों में इस साल सामान्य से आधी ही बारिश हुई है. उन्होंने प्रभावित किसानों को हर संभव मदद का वादा किया. फडणवीस ने लातूर की निलंगा तहसील का दौरा किया, जो पानी की कमी और फ़सल के नुकसान से जूझ रही है. सीएम ने किसानों से बातचीत की. बाद में उन्होंने धाराशिव ज़िले के कुछ हिस्सों का दौरा किया और पश्चिमी महाराष्ट्र के सोलापुर ज़िले के बार्शी इलाके में सोयाबीन की फ़सलों का भी जायज़ा लिया. उन्होंने कहा कि हालात बेहद गंभीर हैं.
सरकार मजबूती से पीड़ितों के साथ
लातूर और धाराशिव में इस साल सिर्फ़ 50 फ़ीसदी बारिश हुई है. बारिश की कमी ने फ़सलों, खासकर सोयाबीन पर बुरा असर डाला है. उन्होंने आगे चलकर पीने के पानी और चारे की कमी की चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि किसानों में परेशानी और निराशा है. लेकिन मैंने उनसे कहा है कि सरकार मज़बूती से उनके साथ खड़ी रहेगी. हम हर संभव मदद देंगे. सूखे से राहत के लिए फंड की कोई कमी नहीं होगी. फडणवीस ने कहा कि फ़सल के नुकसान का सर्वे सिर्फ़ एक औपचारिकता है और इसे प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है, जबकि तबाही पहले से ही साफ़ दिख रही है. उन्होंने कहा कि हमने सभी रिपोर्ट इकट्ठा कर ली हैं और उसी के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं.
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नहीं रोकी जाएगी ऋण माफी योजना
सरकार ने सूखे की स्थिति को बहुत गंभीरता से लिया है और काम शुरू कर दिया है. हम किसानों की मदद करने जा रहे हैं, और हमारी ऋण माफ़ी योजना भी चल रही है और उसे रोका नहीं जाएगा. हम पानी और चारे का भी इंतज़ाम कर रहे हैं. फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार शनिवार से पहले सूखे की स्थिति पर एक सरकारी आदेश (GR) जारी करेगी और राहत के उपाय शुरू करेगी. उन्होंने कहा कि किसानों के आंसू पोंछना सरकार का पहला कर्तव्य है. हम निश्चित रूप से NDRF के नियमों के तहत केंद्र से फंड मांगेंगे. हालांकि, केंद्रीय फंड आने तक किसानों को इंतजार नहीं कराया जाएगा. राज्य सरकार तुरंत अपने खजाने से मदद देना शुरू कर देगी.
रबी सीजन की बुवाई में सरकार करेगी मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को रबी सीजन की बुवाई करने में मदद के लिए भी सहायता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही फसल के नुकसान का आकलन करने का आदेश दे दिया है और जोर देकर कहा कि व्यापक स्तर पर राहत दी जाएगी. उन्होंने कहा कि कानून के तहत हमें पंचनामा (नुकसान का आकलन करने वाली रिपोर्ट) तैयार करना होता है. लेकिन भले ही पंचनामा करना जरूरी हो, सहायता सभी को दी जाएगी.

कृषि ऋण माफी योजना को लागू करने में आ रही शिकायतों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ बैंकों ने किसानों के बकाया खातों पर अतिरिक्त ब्याज लगाया है. फडणवीस ने कहा कि कुछ बैंकों ने यह गलत काम किया. हमने देखा कि उन्होंने जानबूझकर अतिरिक्त ब्याज जोड़ा और बकाया राशि वाले खाते भेजे. उन सभी को सख्त निर्देश दिए गए हैं. अब वे अतिरिक्त ब्याज हटा रहे हैं और खातों को फिर से जमा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सरकार छह से सात लाख किसानों के खातों में पैसे जमा करेगी.
नहीं होगा पीने के पानी का संकट
पीने के पानी की स्थिति पर फडणवीस ने कहा कि कम बारिश ने भूजल स्तर और जल स्रोतों को बुरी तरह प्रभावित किया है. उन्होंने कहा कि अगर केवल 50 प्रतिशत बारिश होती है, तो जाहिर है कि जलाशयों और कुओं में पानी पर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सरकार ने पीने के पानी के संकट का अनुमान लगाया था और उसी के अनुसार पानी के भंडार की योजना बनाई थी. उन्होंने कहा कि हमने पीने के लिए पर्याप्त पानी बचाने की कोशिश की है. हमारे पास दिसंबर तक के लिए जरूरी पानी है, और हमने जून तक पानी बचाने की भी कोशिश की है. फिर भी, पीने के पानी का संकट होगा और हम इसके लिए इंतजाम कर रहे हैं.
असामान्य मौसम के कारण हुए ऐसे हालातः सीएम
फडणवीस ने स्थिति की गंभीरता के लिए सुपर अल नीनो सहित असामान्य मौसम की स्थितियों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि कुदरत ने हमारे सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. लेकिन सरकार पूरी तरह से किसानों के साथ खड़ी रहेगी और हालात से निपटने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करेगी. निलंगा में एक परेशान किसान फडणवीस को अपनी हालत बताते हुए रो पड़ा. फडणवीस ने उसे गले लगाया और भरोसा दिलाया. किसान ने अपनी फसलों को हुए नुकसान और अपनी आर्थिक मुश्किलों के बारे में बताया, जिसमें सोने के गहने गिरवी रखने की बात भी शामिल थी.
मराठवाड़ा इलाके में पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता
मराठवाड़ा वॉटर ग्रिड प्रोजेक्ट की किसानों की मांग पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए फडणवीस ने आरोप लगाया कि पिछली MVA सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था. उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत केंद्र से मिले फंड का इस्तेमाल वॉटर ग्रिड के लिए किया जा सकता था. इसके बजाय उन्होंने उस फंड को कहीं और लगा दिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता मराठवाड़ा इलाके में पानी पहुंचाना है. बाद में मुख्यमंत्री ने ज़मीनी हालात का जायज़ा लेने के लिए धाराशिव के कराजखेड़ा गांव का दौरा किया. उन्होंने कहा कि लोगों को धैर्य रखना चाहिए और उन्हें जल्द से जल्द मदद मिलेगी.
प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की मांगी मदद
कराज़खेड़ा में मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान, ग्रामीणों और किसानों ने प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की मदद की मांग की. बार्शी में बोलते हुए फडणवीस ने स्थानीय सोयाबीन की फसल को हुए भारी नुकसान का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि हालांकि थोड़ी बारिश की वजह से फसल बाहर से हरी-भरी दिख रही है, लेकिन फलियों में दाने नहीं भरे हैं. किसानों को पूरी तरह नुकसान हुआ है और वे बहुत परेशान हैं. फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उन्हें चारे, पीने के पानी, बच्चों की पढ़ाई और अनाज के लिए सीधी मदद देगी. उन्होंने कहा कि किसान आज निश्चित रूप से मुश्किल में हैं, लेकिन हम उनके साथ खड़े रहेंगे और इस मुश्किल हालात से बाहर निकलने में उनकी मदद करेंगे.

उजनी बांध तक ले जाएंगे परियोजनाः फडणवीस
फडणवीस ने कहा कि स्थानीय विधायक राजाभाऊ राउत और ज़िले के प्रभारी मंत्री द्वारा तैयार की गई योजना के ज़रिए इस इलाके में पानी लाने की कोशिशें भी की जाएंगी.बाढ़ के पानी को दूसरी तरफ मोड़ने वाली परियोजना (फ्लड डाइवर्जन प्रोजेक्ट) के ज़रिए पानी की किसानों की मांग के बारे में पूछे जाने पर, फडणवीस ने कहा कि परियोजना का पहला चरण शुरू हो चुका है. उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक ने इसे मंज़ूरी दे दी है. पहला टेंडर जारी हो चुका है और अब दूसरा टेंडर जारी किया जाएगा. हम इस पानी को उजनी बांध तक लाएंगे.
