सावन के अवसर पर पहनें ये हर रंग की साड़ियां, देखने के बाद लोग भी बोलेंगे- करीना कपूर
जुलाई 19, 2026
03 March 2026
'हाए वो वक़्त कि जब बे-पिए मद-होशी थी...' पढ़ें असरार-उल-हक़ मजाज़ के बेहतरीन शेर.
ख़ुद मुझे
मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो,
तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है.
डूबता हूँ मैं
तुम्हीं तो हो जिसे कहती है नाख़ुदा दुनिया,
बचा सको तो बचा लो कि डूबता हूँ मैं.
बे-पिए मद-होशी
हाए वो वक़्त कि जब बे-पिए मद-होशी थी,
हाए ये वक़्त कि अब पी के भी मख़्मूर नहीं.
मख़्मूर आँखों
आप की मख़्मूर आँखों की क़सम,
मेरी मय-ख़्वारी अभी तक राज़ है.
जुरअत-ए-दीदार
या तो किसी को जुरअत-ए-दीदार ही न हो,
या फिर मिरी निगाह से देखा करे कोई.
आवाज़ ही आवाज़
छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर,
अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है.
रंग-ए-एहतराम
फिर किसी के सामने चश्म-ए-तमन्ना झुक गई,
शौक़ की शोख़ी में रंग-ए-एहतराम आ ही गया.
ना-ख़ुदा क्या
डुबो दी थी जहां तूफ़ां ने कश्ती,
वहाँ सब थे ख़ुदा क्या ना-ख़ुदा क्या.
कमाल-ए-इश्क़
कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूं मैं,
ये किस के हाथ से दामन छुड़ा रहा हूँ मैं.
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