Ramadan fast Break with dates: रमजान का महीना चल रहा है. ऐसे में अगर आप भी ये सोच रहे हैं कि, आखिर मुस्लिम खजूर के साथ ही अपना रोज़ा क्यों खोलते हैं, तो इसका जवाब हम लाए हैं.
20 February, 2026
जैसे ही रमजान का पाक महीना करीब आता है, हर मुस्लिम घर में इफ्तार की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. इस बीच एक चीज सबसे कॉमन होती है और वो है खजूर. आपने अक्सर देखा होगा कि दिनभर के रोजे के बाद जब शाम को फास्ट खोला जाता है, तो सबसे पहले खजूर ही खाया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे आखिर राज क्या है? क्यों दुनिया के हर कोने में मुसलमान खजूर से ही अपना रोजा खोलते हैं? आज खजूर की इस मीठी दुनिया के पीछे छिपे धार्मिक और साइंटिफिक पहलुओं को समझते हैं.

ट्रेडिशन और आस्था
इस्लामी मान्यताओं और हदीस के मुताबिक, अल्लाह के रसूल हमेशा नमाज पढ़ने से पहले पके हुए खजूर से अपना रोजा खोलते थे. यही वजह है कि खजूर से इफ्तार करना सुन्नत माना जाता है. ये सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि एक ऐसी परंपरा है जो आस्था से बंधी हुई है. मुस्लिम इसे बरकत का प्रतीक मानते हैं. यही वजह है कि इफ्तार की मेज पर चाहे जितने पकवान हों, बिना खजूर के वो दस्तरख्वान अधूरा रहता है.
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साइंटिफिक रीज़न
जब हम पूरे दिन बिना पानी और खाने के रहते हैं, तो शाम तक बॉडी में एनर्जी का लेवल काफी गिर जाता है. मेडिकल साइंस का मानना है कि खजूर कार्बोहाइड्रेट का एक छोटा लेकिन बहुत बड़ा पैकेट है. रोजा खोलने के तुरंत बाद खजूर खाने से बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है. ये बॉडी में शुगर लेवल को अचानक गिरने से बचाता है. इसके अलावा, खजूर खाने से मीठा खाने की क्रेविंग भी कम होती है, जिससे आप इफ्तार के टाइम जरूरत से ज्यादा खाने से बच जाते हैं.

सेहत का खजाना
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, खजूर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम से मीडियम होता है. इसका मतलब है कि ये खून में ग्लूकोज के लेवल को बहुत तेजी से नहीं बढ़ाता, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है और डायबिटीज का खतरा कम रहता है. खजूर एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे फ्लेवोनोइड्स, कैरोटेनॉयड्स और फेनोलिक एसिड से भरपूर होते हैं. ये बॉडी में सूजन को कम करने और पुरानी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं.

अलग-अलग किस्में
खजूर सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन्स का पावरहाउस है. इसमें मौजूद फाइबर डाइजेशन को ठीक रखता है और कब्ज जैसी प्रोब्लम को पास नहीं आने देता. वैसे, भारतीय बाजारों में खजूर की ढेरों किस्में मौजूद हैं. इनमें मेजदूल, अजवा, डेगलेट नूर, बरही, कीमिया, जाहिदी, हलवी, खुदरी और सुकरी का नाम काफी पॉपुलर है. हर खजूर का अपना एक अलग स्वाद होता है.
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